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Sonipat News: जिले में करीब 82 हजार विद्यार्थी ले रहे मिड डे मील का लाभ
Sun, 07 Apr 2024 02:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 07 Apr 2024 02:23 AM IST
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सोनीपत। स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही विद्यार्थियों को मिड डे मील का लाभ देना शुरू कर दिया है। मिड डे मील के मेन्यू में भी किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल सके, इसके लिए कई चरणों की जांच प्रक्रिया के बाद तैयार मिड डे मील विद्यार्थियों की थाली तक पहुंचता है। जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 82 हजार विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है।
जिले में राजकीय स्कूलों की संख्या 712 हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय 422 और अपर प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 290 है। इन विद्यालयों में रोजाना करीब 82 हजार विद्यार्थियों के लिए मिड डे मील तैयार किया जाता है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों के करीब 50 हजार तो अपर प्राथमिक विद्यालयों के 32 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। योजना के तहत पहली से पांचवीं कक्षा तक के प्रत्येक विद्यार्थी पर रोजाना मिड डे मील के तहत 5.45 रुपये खर्च होते हैं, वहीं अपर प्राथमिक के विद्यार्थी पर यह खर्च बढ़कर 8.17 रुपये तक पहुंच जाता है। जिले के 82 हजार विद्यार्थियों पर मिड डे मील के तहत प्रतिदिन करीब 5.25 लाख रुपये कुकिंग खर्च आता है। जबकि महीने में यह खर्च बढ़कर करीब 1.57 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
जांच के बाद ही स्कूलों में पहुंचता है गेहूं
शिक्षा अधिकारियों की मानें तो हैफेड से गेहूं खरीदने से पहले उसकी लैब में जांच करवाई जाती है, उसके बाद ही मिड डे मील के लिए खरीदा जाता है। मिड डे मील के लिए स्कूलों में आपूर्ति किया जाने वाला आटा 60 दिन में एक्सपायर हो जाता है। इसे देखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि गेहूं व चावल से संबंधित व्यंजन तीन-तीन दिन बनाएं जाएं। अगर आटा बचा है तो पहले आटे के व्यंजन बनाए जाएं ताकि उसे खराब होने से बचाया जा सके।
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मिड-डे-मील इंचार्ज को करवानी होती है खाने की जांच
विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल सके, इसकी जिम्मेदारी मिड डे मील इंचार्ज को सौंपी गई है। इंचार्ज कभी भी अपनी इच्छानुसार महीने में कम से कम एक बार खाने का टेस्ट करवाते हैं। अगर इंचार्ज ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। लैब टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर ही यह सुनिश्चित होता है कि खाने में पोषक तत्वों का स्तर कितना है। अगर गुणवत्ता कम पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। मिड डे मील तैयार होने के बाद पहले अध्यापक उसको चखते हैं, सही होने के बाद ही विद्यार्थियों को परोसा जाता है।
मिड डे मील में 17 व्यंजन निर्धारित
शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए डाइट प्लान तय किया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में विद्यार्थियों को मिड डे मील परोसना शुरू कर दिया है। गत वर्ष की भांति ही इस वर्ष भी मिड डे मील में 17 व्यंजन निर्धारित किए गए हैं। इसमें परांठे, दही से लेकर रागी के गुलगुले और हलवा शामिल हैं। विभाग की ओर से निर्धारित मेन्यू के हिसाब से ही खाना बनाकर विद्यार्थियों को परोसा जा रहा है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड डे मील) योजना के तहत महीने के प्रति वार के लिए व्यंजनों की सूची निर्धारित हैं।
यह है मिड डे मील का मेन्यू
पहला सप्ताह
दिन व्यंजन
सोमवार वेजिटेबल पुलाव व काला चना
मंगलवार रोटी व घीया-चना दाल
बुधवार राजमा-चावल
वीरवार कढ़ी-पकोड़ा व चावल
शुक्रवार हलवा व काला चना
शनिवार मल्टीग्रेन आटे का पराठा और दही
दूसरा सप्ताह
सोमवार पौष्टिक खिचड़ी
मंगलवार मीठा दलिया
बुधवार सोया पूरी व आलू-चने की सब्जी
वीरवार रागी की खिचड़ी
शुक्रवार बेसन पूड़ा
शनिवार चना उड़द, मूंग दाल, साबूत मूंग दाल व रोटी
तीसरा सप्ताह
सोमवार दाल-चावल
मंगलवार मूंग-मसूर की दाल व रोटी
बुधवार मैसी रोटी व मौसमी सब्जी
वीरवार मीठी मूंगफली व चावल
शुक्रवार पौष्टिक नमकीन, दलिया
शनिवार रागी के आटे के गुलगुले
चौथा दिन
सोमवार चना उड़द, मूंग दाल, साबूत मूंग दाल व रोटी
मंगलवार राजमा चावल
बुधवार चना दाल परांठा व सब्जियों का परांठा
वीरवार मीठे चावल
शुक्रवार मिस्सी रोटी व मौसमी सब्जी
शनिवार मीठी खीर
मिड डे मील के मेन्यू में किसी प्रकार का फेरबदल नहीं किया गया है। सभी स्कूलों में मिड डे मील निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल सके, इसके लिए मिड डे मील की गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जाता है। अगर कोई स्कूल नियमों की अवहेलना करते पाया जाता है तो स्कूल मुखिया के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
जितेंद्र छिक्कारा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत
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जिले में राजकीय स्कूलों की संख्या 712 हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय 422 और अपर प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 290 है। इन विद्यालयों में रोजाना करीब 82 हजार विद्यार्थियों के लिए मिड डे मील तैयार किया जाता है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों के करीब 50 हजार तो अपर प्राथमिक विद्यालयों के 32 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। योजना के तहत पहली से पांचवीं कक्षा तक के प्रत्येक विद्यार्थी पर रोजाना मिड डे मील के तहत 5.45 रुपये खर्च होते हैं, वहीं अपर प्राथमिक के विद्यार्थी पर यह खर्च बढ़कर 8.17 रुपये तक पहुंच जाता है। जिले के 82 हजार विद्यार्थियों पर मिड डे मील के तहत प्रतिदिन करीब 5.25 लाख रुपये कुकिंग खर्च आता है। जबकि महीने में यह खर्च बढ़कर करीब 1.57 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
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जांच के बाद ही स्कूलों में पहुंचता है गेहूं
शिक्षा अधिकारियों की मानें तो हैफेड से गेहूं खरीदने से पहले उसकी लैब में जांच करवाई जाती है, उसके बाद ही मिड डे मील के लिए खरीदा जाता है। मिड डे मील के लिए स्कूलों में आपूर्ति किया जाने वाला आटा 60 दिन में एक्सपायर हो जाता है। इसे देखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि गेहूं व चावल से संबंधित व्यंजन तीन-तीन दिन बनाएं जाएं। अगर आटा बचा है तो पहले आटे के व्यंजन बनाए जाएं ताकि उसे खराब होने से बचाया जा सके।
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मिड-डे-मील इंचार्ज को करवानी होती है खाने की जांच
विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल सके, इसकी जिम्मेदारी मिड डे मील इंचार्ज को सौंपी गई है। इंचार्ज कभी भी अपनी इच्छानुसार महीने में कम से कम एक बार खाने का टेस्ट करवाते हैं। अगर इंचार्ज ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। लैब टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर ही यह सुनिश्चित होता है कि खाने में पोषक तत्वों का स्तर कितना है। अगर गुणवत्ता कम पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। मिड डे मील तैयार होने के बाद पहले अध्यापक उसको चखते हैं, सही होने के बाद ही विद्यार्थियों को परोसा जाता है।
मिड डे मील में 17 व्यंजन निर्धारित
शिक्षा विभाग ने राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए डाइट प्लान तय किया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में विद्यार्थियों को मिड डे मील परोसना शुरू कर दिया है। गत वर्ष की भांति ही इस वर्ष भी मिड डे मील में 17 व्यंजन निर्धारित किए गए हैं। इसमें परांठे, दही से लेकर रागी के गुलगुले और हलवा शामिल हैं। विभाग की ओर से निर्धारित मेन्यू के हिसाब से ही खाना बनाकर विद्यार्थियों को परोसा जा रहा है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड डे मील) योजना के तहत महीने के प्रति वार के लिए व्यंजनों की सूची निर्धारित हैं।
यह है मिड डे मील का मेन्यू
पहला सप्ताह
दिन व्यंजन
सोमवार वेजिटेबल पुलाव व काला चना
मंगलवार रोटी व घीया-चना दाल
बुधवार राजमा-चावल
वीरवार कढ़ी-पकोड़ा व चावल
शुक्रवार हलवा व काला चना
शनिवार मल्टीग्रेन आटे का पराठा और दही
दूसरा सप्ताह
सोमवार पौष्टिक खिचड़ी
मंगलवार मीठा दलिया
बुधवार सोया पूरी व आलू-चने की सब्जी
वीरवार रागी की खिचड़ी
शुक्रवार बेसन पूड़ा
शनिवार चना उड़द, मूंग दाल, साबूत मूंग दाल व रोटी
तीसरा सप्ताह
सोमवार दाल-चावल
मंगलवार मूंग-मसूर की दाल व रोटी
बुधवार मैसी रोटी व मौसमी सब्जी
वीरवार मीठी मूंगफली व चावल
शुक्रवार पौष्टिक नमकीन, दलिया
शनिवार रागी के आटे के गुलगुले
चौथा दिन
सोमवार चना उड़द, मूंग दाल, साबूत मूंग दाल व रोटी
मंगलवार राजमा चावल
बुधवार चना दाल परांठा व सब्जियों का परांठा
वीरवार मीठे चावल
शुक्रवार मिस्सी रोटी व मौसमी सब्जी
शनिवार मीठी खीर
मिड डे मील के मेन्यू में किसी प्रकार का फेरबदल नहीं किया गया है। सभी स्कूलों में मिड डे मील निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल सके, इसके लिए मिड डे मील की गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जाता है। अगर कोई स्कूल नियमों की अवहेलना करते पाया जाता है तो स्कूल मुखिया के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
जितेंद्र छिक्कारा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत