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Sonipat News: कंक्रीट के बीच खिलाई फूलों की महकती बगिया
Sun, 05 Apr 2026 06:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 05 Apr 2026 06:41 PM IST
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फोटो :: सोनीपत के गांव राई में अपने घर की छत पर लगाए पौधों की देखभाल करती रितु कौशिक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। भागदौड़ और कंक्रीट से घिरी आधुनिक जीवनशैली के बीच यदि कहीं हरियाली, फूलों की महक और प्रकृति का सुकून एक साथ मिल जाए तो वह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। ऐसा ही मनोहारी दृश्य गांव राई में रितु कौशिक के घर में देखने के लिए मिलता है। उनके घर का आंगन से लेकर छत तक ने बगिया का रूप ले लिया है।
रितु कौशिक की इस बगिया में कदम रखते ही रंगों और सुगंधों की दुनिया जैसे आंखों के सामने सजीव हो उठती है। गुलाबी गुलाब अपनी कोमल पंखुड़ियों से मन मोह लेते हैं तो मैरीगोल्ड (गेंदा) की सुनहरी छटा पूरे वातावरण को उल्लास से भर देती है।
एरिका पाम, मनी प्लांट, समी, जेड प्लांट, अपराजिता, मधुकामिनी, पोर्टुलाका और सदाबहार जैसे पौधे बगिया की शोभा को चार चांद लगा रहे हैं। हर पौधा मानो हर मौसम में नई ऊर्जा और ताजगी का संचार करता है।
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इस बगिया की खूबसूरती केवल रंगों तक सीमित नहीं बल्कि इसकी सुगंध भी मन को आनंदित कर देती है। हरसिंगार की मंद-मंद खुशबू, रजनीगंधा और वैजयंती की महक वातावरण को और भी मोहक बना देती है।
आंगन में सजी तुलसी न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। वहीं स्नेक प्लांट जैसे इनडोर पौधे घर के भीतर शुद्ध हवा और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है।
रितु कौशिक बताती हैं कि उनके लिए यह बगिया केवल पौधों का संग्रह नहीं बल्कि जीवन जीने का एक सकारात्मक तरीका है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का सबसे सरल और प्रभावी उपाय पौधरोपण है। छोटी सी शुरुआत भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।
उनकी यह बगिया न केवल उनके घर की सुंदरता बढ़ा रही है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। रितु का संदेश साफ है कि हर व्यक्ति अपने घर के आंगन, छत या बालकनी में थोड़ी-सी हरियाली जरूर लगाए ताकि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखते हुए एक स्वस्थ और सुखद जीवन जिया जा सके।
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सोनीपत। भागदौड़ और कंक्रीट से घिरी आधुनिक जीवनशैली के बीच यदि कहीं हरियाली, फूलों की महक और प्रकृति का सुकून एक साथ मिल जाए तो वह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। ऐसा ही मनोहारी दृश्य गांव राई में रितु कौशिक के घर में देखने के लिए मिलता है। उनके घर का आंगन से लेकर छत तक ने बगिया का रूप ले लिया है।
रितु कौशिक की इस बगिया में कदम रखते ही रंगों और सुगंधों की दुनिया जैसे आंखों के सामने सजीव हो उठती है। गुलाबी गुलाब अपनी कोमल पंखुड़ियों से मन मोह लेते हैं तो मैरीगोल्ड (गेंदा) की सुनहरी छटा पूरे वातावरण को उल्लास से भर देती है।
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एरिका पाम, मनी प्लांट, समी, जेड प्लांट, अपराजिता, मधुकामिनी, पोर्टुलाका और सदाबहार जैसे पौधे बगिया की शोभा को चार चांद लगा रहे हैं। हर पौधा मानो हर मौसम में नई ऊर्जा और ताजगी का संचार करता है।
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इस बगिया की खूबसूरती केवल रंगों तक सीमित नहीं बल्कि इसकी सुगंध भी मन को आनंदित कर देती है। हरसिंगार की मंद-मंद खुशबू, रजनीगंधा और वैजयंती की महक वातावरण को और भी मोहक बना देती है।
आंगन में सजी तुलसी न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। वहीं स्नेक प्लांट जैसे इनडोर पौधे घर के भीतर शुद्ध हवा और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है।
रितु कौशिक बताती हैं कि उनके लिए यह बगिया केवल पौधों का संग्रह नहीं बल्कि जीवन जीने का एक सकारात्मक तरीका है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का सबसे सरल और प्रभावी उपाय पौधरोपण है। छोटी सी शुरुआत भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।
उनकी यह बगिया न केवल उनके घर की सुंदरता बढ़ा रही है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। रितु का संदेश साफ है कि हर व्यक्ति अपने घर के आंगन, छत या बालकनी में थोड़ी-सी हरियाली जरूर लगाए ताकि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखते हुए एक स्वस्थ और सुखद जीवन जिया जा सके।