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11 करोड़ का भैंसा रुस्तम तो 22 लाख की घोड़ी रानी
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11 करोड़ का भैंसा रुस्तम तो 22 लाख की घोड़ी रानी
अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। एग्री लीडरशिप समिट में किसानों को खेती की नई तकनीक बताकर केवल जागरूक ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि वहां लगी प्रदर्शनी में पशु भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहां 11 करोड़ रुपये की कीमत का भैंसा रुस्तम देखने हर कोई पहुंच रहा है तो 22 लाख रुपये की कीमत की घोड़ी रानी भी किसान देखने जाते हैं। वहां प्रदर्शनी में आए भैंसा, गाय, भैंस, घोड़ी व सांड़ हर साल 1 से 15 लाख रुपये तक कमाई करते हैं।
जींद के गतौली गांव के रहने वाले दलेल सिंह का मुर्रा ए प्लस नस्ल का भैंसा रुस्तम सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना है, जिसने अपने मालिक के घर पुरस्कार की लाइन लगाई हुई है। वह जहां भी जाता है, वहां से चैंपियन बनकर आता है और उसके सहारे दलेल सिंह हर साल लगभग एक करोड़ रुपये की कमाई करते हैं। दलेल सिंह का दावा है कि उसके 11 करोड़ रुपये लग चुके हैं, लेकिन वह उसे बेचना नहीं चाहते हैं। उसके खाने पर वह हर माह पचास हजार रुपये तक खर्च करते हैं, क्योंकि वह दूध, चना, गेहूं, सोयाबीन, गन्ना, गाजर, सेब आदि खाता है। वहां प्रदर्शनी में सोनीपत की घोड़ी रानी भी लोगों को आकर्षित कर रही है। घोड़ी रानी के मालिक सोनीपत के रहने वाले मोनार्क भारद्वाज ने बताया कि रानी पिछले चार सालों से चैंपियन का खिताब अपने नाम कर रही है और उससे करीब दो लाख रुपये की आय साल में होती है। गन्नौर के गुमड़ गांव के अजय पहल का विराट नाम का भैंसा सालाना 15 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है। गोहाना के सैनीपुरा के रहने वाले विरेंद्र सिंह का सरताज केवल चार साल में 12 लाख रुपये सालाना तक कमाई कर रहा है। गोहाना के दलबीर का पांच वर्षीय कमांडो भैंसा भी सालाना छह लाख रुपये की कमाई कर रहा है। इस तरह कमाई के मामले में सांड़ भी कम नहीं है। पानीपत के नरेंद्र सिंह का रामा सांड़ सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है। इनके अलावा भी वहां काफी पशु आए हुए हैं जो खूब कमाई करते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। एग्री लीडरशिप समिट में किसानों को खेती की नई तकनीक बताकर केवल जागरूक ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि वहां लगी प्रदर्शनी में पशु भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहां 11 करोड़ रुपये की कीमत का भैंसा रुस्तम देखने हर कोई पहुंच रहा है तो 22 लाख रुपये की कीमत की घोड़ी रानी भी किसान देखने जाते हैं। वहां प्रदर्शनी में आए भैंसा, गाय, भैंस, घोड़ी व सांड़ हर साल 1 से 15 लाख रुपये तक कमाई करते हैं।
जींद के गतौली गांव के रहने वाले दलेल सिंह का मुर्रा ए प्लस नस्ल का भैंसा रुस्तम सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना है, जिसने अपने मालिक के घर पुरस्कार की लाइन लगाई हुई है। वह जहां भी जाता है, वहां से चैंपियन बनकर आता है और उसके सहारे दलेल सिंह हर साल लगभग एक करोड़ रुपये की कमाई करते हैं। दलेल सिंह का दावा है कि उसके 11 करोड़ रुपये लग चुके हैं, लेकिन वह उसे बेचना नहीं चाहते हैं। उसके खाने पर वह हर माह पचास हजार रुपये तक खर्च करते हैं, क्योंकि वह दूध, चना, गेहूं, सोयाबीन, गन्ना, गाजर, सेब आदि खाता है। वहां प्रदर्शनी में सोनीपत की घोड़ी रानी भी लोगों को आकर्षित कर रही है। घोड़ी रानी के मालिक सोनीपत के रहने वाले मोनार्क भारद्वाज ने बताया कि रानी पिछले चार सालों से चैंपियन का खिताब अपने नाम कर रही है और उससे करीब दो लाख रुपये की आय साल में होती है। गन्नौर के गुमड़ गांव के अजय पहल का विराट नाम का भैंसा सालाना 15 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है। गोहाना के सैनीपुरा के रहने वाले विरेंद्र सिंह का सरताज केवल चार साल में 12 लाख रुपये सालाना तक कमाई कर रहा है। गोहाना के दलबीर का पांच वर्षीय कमांडो भैंसा भी सालाना छह लाख रुपये की कमाई कर रहा है। इस तरह कमाई के मामले में सांड़ भी कम नहीं है। पानीपत के नरेंद्र सिंह का रामा सांड़ सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है। इनके अलावा भी वहां काफी पशु आए हुए हैं जो खूब कमाई करते हैं।
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