Sonipat: 39 बंदी मिले हेपेटाइटिस सी से पीड़ित, एक सप्ताह से दवाई खत्म, दो दिन पहले मुफ्त जांच का टेंडर खत्म
नागरिक अस्पताल में एक बार में हेपेटाइटिस सी के मरीज को तीन माह की दवाइयां दी जाती है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि करनाल से अस्पताल में काला पीलिया की दवाई आती है। हेपेटाइटिस सी और बी को लेकर लोगों में जागरूकता जरूरी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोनीपत में जिला कारागार में शिविर लगाया गया। इसमें 1040 बंदियों के स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें 39 बंदी हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) से पीड़ित मिले हैं। हेपेटाइटिस सी के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से की जाने वाली मुफ्त जांच (टेस्ट) और उपचार सुविधा बंद हो गई है। विभाग के पास उपचार और दवाई के लिए कूपन आने बंद हो गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का जिस फर्म के साथ उपचार को लेकर टेंडर था वह 26 जुलाई को खत्म हो गया है। अभी नया टेंडर विभाग ने जारी नहीं किया है। ऐसे में जिन मरीजों का पहले से उपचार चल रहा है उन्हें भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही हैं। अस्पताल में टेंडर खत्म होने से चार दिन पहले ही खत्म हो गई थी। जिसके चलते हेपेटाइटिस के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला कारागार में लगाए गए शिविर में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कारागार में 1040 बंदियों के स्वास्थ्य जांच की गई तो उनमें से 39 बंदी हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) से पीड़ित मिले हैं। सिविल सर्जन डॉ. जयकिशोर व उप सिविल सर्जन डॉ. तरुण यादव ने शिविर का निरीक्षण भी किया।
वहीं हेपेटाइटिस सी और बी के मरीज में काला पीलिया किस स्थिति में इसकी जांच भी अब कोर डायग्नोस्टिक लैब (जिसके साथ अनुबंध था) में नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग का लैब के साथ 26 जुलाई तक का अनुबंध था जो खत्म हो गया है। चिकित्सक का कहना है कि हेपेटाइटिस के मरीजों को अस्पताल से एक बार में तीन माह की दवा दी जाती है।
दवा का कोर्स पूरा होने के तीन माह बाद भी जांच जरूरी है। यह खतरनाक बीमारी मां से बच्चे में भी आ सकती है, अगर समय रहते इसका उपचार करा लिया जाए तो बच्चे में आने से रोका जा सकता है। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उन मरीजों को छह महीने दवाई दी जाती है।
बंदियों का उपचार शुरू होने में लगेगा समय
कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के चलते अब जिला कारागार में मिले हेपेटाइटिस सी के 39 मरीजों का उपचार शुरू होने में समय लगेगा। अब लैब से अनुबंध होने के बाद ही उनका उपचार शुरू हो सकेगा।
ऐसे होती है हेपेटाइटिस की पहचान
चिकित्सक तरुण यादव का कहना है कि काफी समय पर पीलिया रहना, बार-बार उल्टी लगना व भूख न लगना हेपेटाइटिस के लक्षण हैं। ऐसे में लोगों को अपना इलाज तुरंत शुरू कराना चाहिए। प्राथमिक जांच में ही चिकित्सक मरीज को हेपेटाइटिस होने की पुष्टि कर देते हैं। इसके बाद मरीजों को कूपन जारी किया जाता है। उस कूपन के माध्यम से लैब पर मरीज को मुफ्त में काला पीलिया की स्थिति व जिनोटाइप टेस्ट कराया जाता था। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता है। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है, अगर लीवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवा खानी पड़ती है। करनाल से दवाई आने के बाद हेपेटाइटिस सी के पुराने मरीजों को वितरित कर दी जाएगी।
हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता जरूरी
हेपेटाइटिस सी और बी को लेकर लोगों में जागरूकता जरूरी है। जिस मरीज को काला पीलिया है, उसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही जो लोग नशा करते हैं वह अपने साथियों के साथ एक ही सीरींज का प्रयोग करते हैं। इसलिए नशे से दूर रहना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में अब तक 1470 हेपेटाइटिस के मरीज रजिस्टर्ड हैं। जिसमें से 1196 हेपेटाइटिस सी व 274 हेपेटाइटिस बी के मरीज हैं।
हेपेटाइटिस सी के टेस्ट और उपचार के लिए मुख्यालय की ओर से कूपन उपलब्ध कराया जाता है।। इसके तहत मरीजों के निशुल्क टेस्ट और दवाइयां मिलती हैं। विभाग का जिस कंपनी के साथ टेंडर था, वह खत्म हो गया है। इसके चलते फिलहाल टेस्ट बंद हो गए हैं। मरीजों को इंतजार करने के लिए कहा गया है। मुख्यालय स्तर पर टेंडर होते ही टेस्ट शुरू करा दिए जाएंगे। -डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन