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नेशनल हाईवे पर सर्दी में हादसे रोकने को तीन करोड़ खर्च करेगा एनएचएआई
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नेशनल हाईवे-44 पर बीसवां मील चौक के पास खुदाई करके छोड़ी गई सड़क
- फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 को चौड़ीकरण के कारण खुदाई करके छोड़ने से वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं तो सर्दियों में कोहरे के कारण लोगों की जान का खतरा बढ़ जाएगा। इसको देखते हुए एनएचएआई ने नेशनल हाईवे पर हादसे रोकने को तीन करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया है। इन रुपयों से नेशनल हाईवे पर सफेद पट्टी, किनारों पर साइन बोर्ड, जालियां व दीवार बनवाई जाएगी। यह काम 10 दिन में शुरू हो जाएगा, जिससे कोहरा शुरू होने से पहले ही इसे पूरा किया जा सके।
नेशनल हाईवे-44 मुकरबा चौक से सिंघु बॉर्डर तक पहले ही आठ लेन बना हुआ था, जबकि उससे आगे छह लेन का नेशनल हाईवे था। इस नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से पानीपत तक 70.5 किमी छह लेन से आठ लेन की सड़क के साथ ही दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाने का प्लान तैयार किया गया था। जिसके बाद वर्ष 2015 में केजीपी व केएमपी के साथ ही राई से पीएम नरेंद्र मोदी से इसका शिलान्यास कराया गया। नेशनल हाईवे के जिस 70.5 किमी के हिस्से का चौड़ीकरण किया जाना है, इस हिस्से को कंपनी ने खुदाई करके छोड़ दिया है। इसके साथ ही एक दर्जन फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। लेकिन उन फ्लाईओवर को अधूरा छोड़ने के साथ ही छह फुट तक गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। जिससे वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है तो नेशनल हाईवे पर आए दिन जाम भी लगता है। नेशनल हाईवे पर कोहरे में जान को खतरा बढ़ जाता है और पिछले साल भी काफी लोग कोहरे में सड़क निर्माण के कारण हादसा होने पर जान गंवा चुके थे। इसको देखते हुए ही एनएचएआई ने इस बार कोहरे में हादसे रोकने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है और नेशनल हाईवे पर व्यवस्था बेहतर करने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
यह कराया जाएगा काम
नेशनल हाईवे-44 पर दिल्ली बॉर्डर से पानीपत तक सफेद पट्टी लगाई जाएगी तो सांकेतिक चिह्न वाले बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इसके साथ ही जिन जगहों पर ज्यादा खतरा है, वहां बेरीकेट्स लगाए जाएंगे। जिन जगहों पर ज्यादा गहरी खुदाई की गई है, वहां छोटी दीवार भी बनवाई जाएगी। जिससे कोई वाहन अनियंत्रित होकर गड्ढों में नहीं जा सके।
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इन जगहों पर ज्यादा खतरा
नेशनल हाईवे पर जिन जगहों पर फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं और वहां उन फ्लाईओवर को अधूरा छोड़ दिया गया है, वहां ज्यादा खतरा रहता है। इनमें रसोई, राई औद्योगिक क्षेत्र, राई गांव, सेक्टर 7 डिवाइडर रोड के सामने वर्धमान चौक, नांगल खुर्द, गोहाना बाईपास, हसनपुर, भिगान चौक, बड़ी औद्योगिक क्षेत्र, गढ़ी कलां, पट्टी कल्याणा, करहंस, मछरौली, जटीपुरा आदि जगह शामिल है।
यह होते हैं नियम
-डायवर्जन देना जरूरी है, जिसके लिए पुरानी सड़क होने पर उससे काम चलाया जाता है या वहां नई सड़क बनाई जानी चाहिए।
-सुरक्षा को देखते हुए बैरिकेट्स लगाए जाने चाहिए।
-ऐसी जगहों पर संकेतक चिह्न वाले बोर्ड लगाए जाने चाहिए
-वहां बोर्ड लगाकर यह लिखा जाए कि काम प्रगति पर है
- सफेद पट्टी जरूर होनी चाहिए
कोहरे में नेशनल हाईवे-44 पर हादसा नहीं हो सके, उसके लिए एनएचएआई तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इससे व्यवस्था बेहतर करने के लिए सफेद पट्टी, बेरीकेट्स, सांकेतिक चिह्न के बोर्ड आदि लगवाए जाएंगे। जिसके लिए काम शुरू कराया जा रहा है।
-आनंद दहिया, टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई
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सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 को चौड़ीकरण के कारण खुदाई करके छोड़ने से वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं तो सर्दियों में कोहरे के कारण लोगों की जान का खतरा बढ़ जाएगा। इसको देखते हुए एनएचएआई ने नेशनल हाईवे पर हादसे रोकने को तीन करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया है। इन रुपयों से नेशनल हाईवे पर सफेद पट्टी, किनारों पर साइन बोर्ड, जालियां व दीवार बनवाई जाएगी। यह काम 10 दिन में शुरू हो जाएगा, जिससे कोहरा शुरू होने से पहले ही इसे पूरा किया जा सके।
नेशनल हाईवे-44 मुकरबा चौक से सिंघु बॉर्डर तक पहले ही आठ लेन बना हुआ था, जबकि उससे आगे छह लेन का नेशनल हाईवे था। इस नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से पानीपत तक 70.5 किमी छह लेन से आठ लेन की सड़क के साथ ही दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाने का प्लान तैयार किया गया था। जिसके बाद वर्ष 2015 में केजीपी व केएमपी के साथ ही राई से पीएम नरेंद्र मोदी से इसका शिलान्यास कराया गया। नेशनल हाईवे के जिस 70.5 किमी के हिस्से का चौड़ीकरण किया जाना है, इस हिस्से को कंपनी ने खुदाई करके छोड़ दिया है। इसके साथ ही एक दर्जन फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। लेकिन उन फ्लाईओवर को अधूरा छोड़ने के साथ ही छह फुट तक गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। जिससे वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है तो नेशनल हाईवे पर आए दिन जाम भी लगता है। नेशनल हाईवे पर कोहरे में जान को खतरा बढ़ जाता है और पिछले साल भी काफी लोग कोहरे में सड़क निर्माण के कारण हादसा होने पर जान गंवा चुके थे। इसको देखते हुए ही एनएचएआई ने इस बार कोहरे में हादसे रोकने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है और नेशनल हाईवे पर व्यवस्था बेहतर करने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
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यह कराया जाएगा काम
नेशनल हाईवे-44 पर दिल्ली बॉर्डर से पानीपत तक सफेद पट्टी लगाई जाएगी तो सांकेतिक चिह्न वाले बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इसके साथ ही जिन जगहों पर ज्यादा खतरा है, वहां बेरीकेट्स लगाए जाएंगे। जिन जगहों पर ज्यादा गहरी खुदाई की गई है, वहां छोटी दीवार भी बनवाई जाएगी। जिससे कोई वाहन अनियंत्रित होकर गड्ढों में नहीं जा सके।
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इन जगहों पर ज्यादा खतरा
नेशनल हाईवे पर जिन जगहों पर फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं और वहां उन फ्लाईओवर को अधूरा छोड़ दिया गया है, वहां ज्यादा खतरा रहता है। इनमें रसोई, राई औद्योगिक क्षेत्र, राई गांव, सेक्टर 7 डिवाइडर रोड के सामने वर्धमान चौक, नांगल खुर्द, गोहाना बाईपास, हसनपुर, भिगान चौक, बड़ी औद्योगिक क्षेत्र, गढ़ी कलां, पट्टी कल्याणा, करहंस, मछरौली, जटीपुरा आदि जगह शामिल है।
यह होते हैं नियम
-डायवर्जन देना जरूरी है, जिसके लिए पुरानी सड़क होने पर उससे काम चलाया जाता है या वहां नई सड़क बनाई जानी चाहिए।
-सुरक्षा को देखते हुए बैरिकेट्स लगाए जाने चाहिए।
-ऐसी जगहों पर संकेतक चिह्न वाले बोर्ड लगाए जाने चाहिए
-वहां बोर्ड लगाकर यह लिखा जाए कि काम प्रगति पर है
- सफेद पट्टी जरूर होनी चाहिए
कोहरे में नेशनल हाईवे-44 पर हादसा नहीं हो सके, उसके लिए एनएचएआई तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इससे व्यवस्था बेहतर करने के लिए सफेद पट्टी, बेरीकेट्स, सांकेतिक चिह्न के बोर्ड आदि लगवाए जाएंगे। जिसके लिए काम शुरू कराया जा रहा है।
-आनंद दहिया, टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई