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तीन माह से 23 दवाएं खत्म, ढाई माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं
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नागरिक अस्पताल में बेंचों पर जगह नहीं मिलने पर फर्श पर बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : Sonipat
प्रदेश सरकार ने भले ही नागरिक अस्पताल में 14 नए चिकित्सकों की नियुक्ति के आदेश दिए हैं, लेकिन अस्पताल में तीन माह से दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। अस्पताल की डिस्पेंसरी से सभी दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीज बाहर मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं। अमर उजाला टीम ने सोमवार सुबह 11 बजे अस्पताल पहुंची तो ओपीडी में चिकित्सक कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। बैठने के लिए बेंच पूरी तरह से फुल थे और कई मरीज फर्श पर बैठकर अपने नंबर का इंतजार कर रहे थे। साथ ही डिस्पेंसरी पर मरीजों को एक या दो दवाएं मिल रही थीं। बाकी दवाएं न होने की बात कही जा रही थी। दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों का दर्द और बढ़ रहा था।
मौसम में आए परिवर्तन के चलते नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां पर रोजाना 1600 की ओपीडी हो रही है, लेकिन अस्पताल में दर्द निवारक, पेट व आंखों में संक्रमण, गुम चोट, व एंटीबायोटिक समेत 23 दवाएं नहीं है। अस्पताल में पेट की बीमारी ठीक करने की टैबलेट से लेकर आई ड्रॉप और स्किन तक की दवाई नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों को पैसे खर्च करके बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। दवाओं की कमी तीन माह से चल रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की तरफ से इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। साथ ही ढाई माह से अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन भी नहीं आ रहे हैं। 4 जून को एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे।
400 से अधिक बुखार के मरीज पहुंच रहे
अस्पताल की ओपीडी में सबसे अधिक वायरल बुखार, सर्दी व खांसी के मरीज आ रहे हैं। मौसम परिवर्तन के चलते लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। ऐसे मौसम में खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अस्पताल खुलने से पहले ही मरीजों की भीड़ लगने शुरू हो जाती है। आम दिनों में प्रतिदिन करीब 150 बुखार से पीड़ित मरीज ही अस्पताल में आते थे, लेकिन अब रोजाना 400 से अधिक पहुंच रहे हैं। इसके अतिरिक्त सर्दी और खांसी के मरीज भी आ रहे हैं। मरीजों के बैठने के लिए बेंच भी कम पड़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों को ओपीडी परिसर में फर्श पर बैठकर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है।
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अस्पताल में 300 से ज्यादा चर्म रोगी पहुंचे
अस्पताल में सोमवार को 300 से ज्यादा चर्म रोगी पहुंचे। रोगियों की संख्या बढ़ने के कारण चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंघल को ओपीडी करीब एक घंटा ज्यादा लगानी पड़ी। वातावरण में नमी की अधिक मात्रा होने के कारण चर्म रोग के मरीज बढ़ रहे हैं। चर्म रोग के रूप में आर्टीकेरिया, टिनिया पेडिस व एलर्जी राइनाइटिस नामक अधिक फैल रहा है। इसका मुख्य कारण बरसात के बाद हुए मौसम में बदलाव है।
अस्पताल में नहीं मिल रही यह दवाएं
नागरिक अस्पताल में दर्द निवारक में डाईक्लो फिफ्टी, डाइक्लोपारा और एंटीबायोटिक में अमोक्सी, अमोक्सीक्लेव, पेट के संक्रमण के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन, पेट दर्द निवारक के लिए मेट्रोजिल दवाएं मिलती थीं। अब यह दवा खत्म है। इसके अलावा गुम चोट के लिए डिक्लो जेल व आंख के लिए आई ड्रॉप सिपरो भी नहीं मिल रही है। मरीजों ने बताया कि उनको इन बीमारियों की दवा अस्पताल में नहीं मिली तो पर्ची पर लिखी दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है।
मेरे पैरों में काफी समय से एलर्जी है। मैं कई बार अस्पताल में एलर्जी की दवा लेने आ चुकी हूं, लेकिन दवाएं नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। एलर्जी के इलाज के लिए मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं मिल रही हैं। सरकार की ओर से जल्द दवाओं की आपूर्ति की जानी चाहिए। -कृष्णा निवासी मुकीमपुर
मुझे कई दिन से पेट में दर्द हो रहा है। अस्पताल में आया तो चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर कुछ दवाएं लिखकर दी और अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। अस्पताल में काफी समय से रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका और दवाओं नहीं होने से वापस लौटने पड़ा। -बब्लू, निवासी बीसवां मील
सरकार एक तरफ अस्पताल में ही मरीजों को मुफ्त दवाएं देने का वादा कर रही है। अस्पताल में चिकित्सक हैं, लेकिन दवाओं की कमी होने के कारण मरीज लौट रहे है। अधिकतर दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। -आलम निवासी कबीरपुर
मैं बुखार से पीड़ित तीन वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल आया था। यहां बच्चों के लिए दवाएं तक नहीं मिलीं। जिसके कारण ज्यादा परेशानी हुई है। सरकार से मांग है कि जल्द अस्पताल में दवाओं की कमी पूरी की जाए। जिससे मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो। जगपाल, निवासी देवडू रोड
दवाओं की कमी को लेकर शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। एंटी रेबीज इंजेक्शन भी काफी समय से नहीं है। जल्द ही दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर खरीद की जाएगी। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। -डॉ. संदीप लठवाल, उप चिकित्सा अधीक्षक नागरिक अस्पताल।
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मौसम में आए परिवर्तन के चलते नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां पर रोजाना 1600 की ओपीडी हो रही है, लेकिन अस्पताल में दर्द निवारक, पेट व आंखों में संक्रमण, गुम चोट, व एंटीबायोटिक समेत 23 दवाएं नहीं है। अस्पताल में पेट की बीमारी ठीक करने की टैबलेट से लेकर आई ड्रॉप और स्किन तक की दवाई नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों को पैसे खर्च करके बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। दवाओं की कमी तीन माह से चल रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की तरफ से इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। साथ ही ढाई माह से अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन भी नहीं आ रहे हैं। 4 जून को एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे।
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400 से अधिक बुखार के मरीज पहुंच रहे
अस्पताल की ओपीडी में सबसे अधिक वायरल बुखार, सर्दी व खांसी के मरीज आ रहे हैं। मौसम परिवर्तन के चलते लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। ऐसे मौसम में खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अस्पताल खुलने से पहले ही मरीजों की भीड़ लगने शुरू हो जाती है। आम दिनों में प्रतिदिन करीब 150 बुखार से पीड़ित मरीज ही अस्पताल में आते थे, लेकिन अब रोजाना 400 से अधिक पहुंच रहे हैं। इसके अतिरिक्त सर्दी और खांसी के मरीज भी आ रहे हैं। मरीजों के बैठने के लिए बेंच भी कम पड़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों को ओपीडी परिसर में फर्श पर बैठकर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है।
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अस्पताल में 300 से ज्यादा चर्म रोगी पहुंचे
अस्पताल में सोमवार को 300 से ज्यादा चर्म रोगी पहुंचे। रोगियों की संख्या बढ़ने के कारण चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंघल को ओपीडी करीब एक घंटा ज्यादा लगानी पड़ी। वातावरण में नमी की अधिक मात्रा होने के कारण चर्म रोग के मरीज बढ़ रहे हैं। चर्म रोग के रूप में आर्टीकेरिया, टिनिया पेडिस व एलर्जी राइनाइटिस नामक अधिक फैल रहा है। इसका मुख्य कारण बरसात के बाद हुए मौसम में बदलाव है।
अस्पताल में नहीं मिल रही यह दवाएं
नागरिक अस्पताल में दर्द निवारक में डाईक्लो फिफ्टी, डाइक्लोपारा और एंटीबायोटिक में अमोक्सी, अमोक्सीक्लेव, पेट के संक्रमण के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन, पेट दर्द निवारक के लिए मेट्रोजिल दवाएं मिलती थीं। अब यह दवा खत्म है। इसके अलावा गुम चोट के लिए डिक्लो जेल व आंख के लिए आई ड्रॉप सिपरो भी नहीं मिल रही है। मरीजों ने बताया कि उनको इन बीमारियों की दवा अस्पताल में नहीं मिली तो पर्ची पर लिखी दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है।
मेरे पैरों में काफी समय से एलर्जी है। मैं कई बार अस्पताल में एलर्जी की दवा लेने आ चुकी हूं, लेकिन दवाएं नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। एलर्जी के इलाज के लिए मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं मिल रही हैं। सरकार की ओर से जल्द दवाओं की आपूर्ति की जानी चाहिए। -कृष्णा निवासी मुकीमपुर
मुझे कई दिन से पेट में दर्द हो रहा है। अस्पताल में आया तो चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर कुछ दवाएं लिखकर दी और अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। अस्पताल में काफी समय से रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका और दवाओं नहीं होने से वापस लौटने पड़ा। -बब्लू, निवासी बीसवां मील
सरकार एक तरफ अस्पताल में ही मरीजों को मुफ्त दवाएं देने का वादा कर रही है। अस्पताल में चिकित्सक हैं, लेकिन दवाओं की कमी होने के कारण मरीज लौट रहे है। अधिकतर दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। -आलम निवासी कबीरपुर
मैं बुखार से पीड़ित तीन वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल आया था। यहां बच्चों के लिए दवाएं तक नहीं मिलीं। जिसके कारण ज्यादा परेशानी हुई है। सरकार से मांग है कि जल्द अस्पताल में दवाओं की कमी पूरी की जाए। जिससे मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो। जगपाल, निवासी देवडू रोड
दवाओं की कमी को लेकर शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। एंटी रेबीज इंजेक्शन भी काफी समय से नहीं है। जल्द ही दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर खरीद की जाएगी। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। -डॉ. संदीप लठवाल, उप चिकित्सा अधीक्षक नागरिक अस्पताल।

नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ के कमरे के बाहर लाइन में फर्श पर बैठा मरीज। संवाद- फोटो : Sonipat