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जिले में 900 फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप, 25 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
Updated Sun, 12 Nov 2017 01:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
प्रशासन ने ऐसी फैक्ट्रियों के बॉयलर बंद करने के आदेश जारी किए हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता हो। इसका जिले की फैक्ट्रियों पर बड़ा असर पड़ा है और यहां लगभग 900 फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। क्योंकि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर फैक्ट्रियों में कपड़ों पर डाई की जाती है तो कुंडली में बर्तन व कपड़ा बनाने की फैक्ट्री चलती है। राई औद्योगिक क्षेत्र में जरूर गत्ते की पैकेजिंग का काम है, इसलिए वहां ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। कुंडली में एक बड़ी परेशानी उद्योगपतियों के सामने यह भी आ रही है कि वहां दिन में लगातार कई घंटे बिजली गायब रहती है और जनरेटर चलाने पर रोक है। इसलिए वहां की फैक्ट्रियों में अन्य काम भी बंद हो गया है। वहीं, फैक्ट्री बंद होने से एक दिन में लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान उद्योगपतियों को हो रहा है और इस तरह 14 नवंबर तक यह नुकसान 100 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा।
दिल्ली समेत एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के कारण हर किसी को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसको देखते हुए प्रशासन ने एनजीटी के आदेश पर 14 नवंबर तक उन सभी फैक्ट्रियों को बंद कराने का आदेश जारी किया है, जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। यहां बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में लगभगत 600 फैक्ट्री है, जिनमें लगभग 400 ऐसी फैक्ट्रियां हैं उनमें कपड़ों पर डाई होती है। इसके लिए फैक्ट्रियों में बॉयलर लगे हुए हैं।
वहीं कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1200 फैक्ट्रियां हैं और उनमें से लगभग 500 फैक्ट्री बर्तन व कपड़ा बनाने की है। उनमें भी बॉयलर से काम होता है और उनसे भी प्रदूषण निकलता है। इस तरह दोनों औद्योगिक क्षेत्र की इन लगभग 900 फैक्ट्रियों के बॉयलर बंद करा दिए गए हैं, जिससे वहां उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है। फैक्ट्री में अन्य काम भी बिजली के कारण रुक गया है, क्योंकि बिजली निगम की ओर से पिछले कई दिनों से लाइन पर काम किया जा रहा है और उस दौरान बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है।
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वहीं फैक्ट्री में जनरेटर चलाने पर पूरी तरह से रोक है और ऐसे में बिजली नहीं होने से फैक्ट्री के अंदर अन्य काम भी रुक जाते हैं। इस तरह जहां प्रशासन के आदेश से 900 फैक्ट्री में उत्पादन बंद हो गया है, वहीं बिजली निगम के कारण भी अधिकतर फैक्ट्री में काम प्रभावित हो रहा है। इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार एक अनुमान के आधार पर रोजाना लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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जिले के 260 ईंट भट्ठे व दोनों शुगर मिल भी बंद
जिले में इस समय लगभग 260 ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जिनको पूरी तरह बंद करा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने सभी भट्ठों को बंद कराने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा सोनीपत शुगर मिल व आहुलाना शुगर मिल भी एनजीटी के आदेशों के कारण बंद करा दी गई है। इस कारण किसानों को परेशानी का सामना पड़ रहा है। क्योंकि किसान अपना गन्ना लेकर मिल में पहुंच चुके हैं और मिल में अचानक ही गन्ना लेने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि यह सबकुछ 14 नवंबर तक के लिए किया गया है।
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बिल्डिंग मैटीरियल लेकर आते वाहन जब्त
एडीसी आमना तस्नीम ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में सभी भवनों व सड़कों के निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। शहर में जहां खुले में सीमेंट, रेत या अन्य बिल्डिंग मैटीरियल पड़ा हुआ है, उसे जब्त किया जा रहा है। वहीं शहर में बिल्डिंग मैटीरियल लेकर आने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों को फिलहाल रोक दिया गया है और ऐसे ट्रैक्टर-ट्राली को जब्त कर आरटीए ग्राउंड में खड़ा कर दिया गया है। यह कार्रवाई पूरा दिन चलाई गई।
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सरपंच रखेंगे पराली जलाने वालों पर नजर, 9 टीमें भी लगी
एडीसी ने बताया कि गांवों में पराली नहीं जलाई जाए, उसके लिए लोगों से अपील की जा रही है। इसके साथ ही लोगों से कहा जा रहा है कि वह पराली जलाने की जगह चारे के लिए गोशालाओं में दान करें। वहीं सरपंचों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह खेतों में पराली जलाने वालों पर नजर रखें और इस बारे में प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने पांच टीमों को औद्योगिक क्षेत्र व भट्ठों की निगरानी में लगाया है, जबकि चार टीम नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्य रोकने के लिए निगरानी कर रही है।
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नेशनल हाईवे पर वाहनों को किया इंपाउंड
प्रशासन की ओर से 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहन जब्त करने के आदेश जारी करने के बाद नेशनल हाईवे पर अभियान चलाया गया। वहां प्रशासन के आदेश के बावजूद भी सड़कों पर चल रहे ऐसे डीजल व पेट्रोल वाहनों को इंपाउंड किया गया है। आरटीए इंस्पेक्टर सचिन ने बताया कि 49 वाहन इंपाउंड किए गए हैं और यह अभियान लगातार जारी रहेगा। क्योंकि वाहन चालक लगातार आदेश के बावजूद 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहनों को लगातार दौड़ा रहे हैं।
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उन सभी फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए है, जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है और इस आदेश के बावजूद बॉयलर चलाने वाले फैक्ट्री मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी। दवाई, दूध, ब्रैड आदि फैक्टरी को इसमें छूट दी गई है। यह आदेश 14 नवंबर तक जारी रहेगा।
-नवीन गुलिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग
प्रशासन के इस आदेश से कुंडली की अधिकतर फैक्ट्री बंद हो गई है, जबकि अन्य फैक्ट्री बिजली निगम के अधिकारियों ने बंद करा दी। इस समय फैक्टरी में जनरेटर नहीं चलाने के आदेश हैं और उसके बावजूद बिजली लाइन पर काम करके कट लगाए जा रहे हैं। इससे जिन फैक्ट्रियों में बॉयलर नहीं है, वह भी बंद हो जाती है। इस तरह उद्योगपतियों को बड़ा नुकसान किया जा रहा है और इसके लिए बिजली निगम के अधिकारी सबसे बड़े जिम्मेदार है।
-सुभाष गुप्ता, उपाध्यक्ष कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
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सोनीपत।
प्रशासन ने ऐसी फैक्ट्रियों के बॉयलर बंद करने के आदेश जारी किए हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता हो। इसका जिले की फैक्ट्रियों पर बड़ा असर पड़ा है और यहां लगभग 900 फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। क्योंकि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर फैक्ट्रियों में कपड़ों पर डाई की जाती है तो कुंडली में बर्तन व कपड़ा बनाने की फैक्ट्री चलती है। राई औद्योगिक क्षेत्र में जरूर गत्ते की पैकेजिंग का काम है, इसलिए वहां ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। कुंडली में एक बड़ी परेशानी उद्योगपतियों के सामने यह भी आ रही है कि वहां दिन में लगातार कई घंटे बिजली गायब रहती है और जनरेटर चलाने पर रोक है। इसलिए वहां की फैक्ट्रियों में अन्य काम भी बंद हो गया है। वहीं, फैक्ट्री बंद होने से एक दिन में लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान उद्योगपतियों को हो रहा है और इस तरह 14 नवंबर तक यह नुकसान 100 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा।
दिल्ली समेत एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के कारण हर किसी को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसको देखते हुए प्रशासन ने एनजीटी के आदेश पर 14 नवंबर तक उन सभी फैक्ट्रियों को बंद कराने का आदेश जारी किया है, जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। यहां बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में लगभगत 600 फैक्ट्री है, जिनमें लगभग 400 ऐसी फैक्ट्रियां हैं उनमें कपड़ों पर डाई होती है। इसके लिए फैक्ट्रियों में बॉयलर लगे हुए हैं।
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वहीं कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1200 फैक्ट्रियां हैं और उनमें से लगभग 500 फैक्ट्री बर्तन व कपड़ा बनाने की है। उनमें भी बॉयलर से काम होता है और उनसे भी प्रदूषण निकलता है। इस तरह दोनों औद्योगिक क्षेत्र की इन लगभग 900 फैक्ट्रियों के बॉयलर बंद करा दिए गए हैं, जिससे वहां उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है। फैक्ट्री में अन्य काम भी बिजली के कारण रुक गया है, क्योंकि बिजली निगम की ओर से पिछले कई दिनों से लाइन पर काम किया जा रहा है और उस दौरान बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है।
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वहीं फैक्ट्री में जनरेटर चलाने पर पूरी तरह से रोक है और ऐसे में बिजली नहीं होने से फैक्ट्री के अंदर अन्य काम भी रुक जाते हैं। इस तरह जहां प्रशासन के आदेश से 900 फैक्ट्री में उत्पादन बंद हो गया है, वहीं बिजली निगम के कारण भी अधिकतर फैक्ट्री में काम प्रभावित हो रहा है। इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार एक अनुमान के आधार पर रोजाना लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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जिले के 260 ईंट भट्ठे व दोनों शुगर मिल भी बंद
जिले में इस समय लगभग 260 ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जिनको पूरी तरह बंद करा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने सभी भट्ठों को बंद कराने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा सोनीपत शुगर मिल व आहुलाना शुगर मिल भी एनजीटी के आदेशों के कारण बंद करा दी गई है। इस कारण किसानों को परेशानी का सामना पड़ रहा है। क्योंकि किसान अपना गन्ना लेकर मिल में पहुंच चुके हैं और मिल में अचानक ही गन्ना लेने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि यह सबकुछ 14 नवंबर तक के लिए किया गया है।
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बिल्डिंग मैटीरियल लेकर आते वाहन जब्त
एडीसी आमना तस्नीम ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में सभी भवनों व सड़कों के निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। शहर में जहां खुले में सीमेंट, रेत या अन्य बिल्डिंग मैटीरियल पड़ा हुआ है, उसे जब्त किया जा रहा है। वहीं शहर में बिल्डिंग मैटीरियल लेकर आने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों को फिलहाल रोक दिया गया है और ऐसे ट्रैक्टर-ट्राली को जब्त कर आरटीए ग्राउंड में खड़ा कर दिया गया है। यह कार्रवाई पूरा दिन चलाई गई।
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सरपंच रखेंगे पराली जलाने वालों पर नजर, 9 टीमें भी लगी
एडीसी ने बताया कि गांवों में पराली नहीं जलाई जाए, उसके लिए लोगों से अपील की जा रही है। इसके साथ ही लोगों से कहा जा रहा है कि वह पराली जलाने की जगह चारे के लिए गोशालाओं में दान करें। वहीं सरपंचों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह खेतों में पराली जलाने वालों पर नजर रखें और इस बारे में प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने पांच टीमों को औद्योगिक क्षेत्र व भट्ठों की निगरानी में लगाया है, जबकि चार टीम नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्य रोकने के लिए निगरानी कर रही है।
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नेशनल हाईवे पर वाहनों को किया इंपाउंड
प्रशासन की ओर से 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहन जब्त करने के आदेश जारी करने के बाद नेशनल हाईवे पर अभियान चलाया गया। वहां प्रशासन के आदेश के बावजूद भी सड़कों पर चल रहे ऐसे डीजल व पेट्रोल वाहनों को इंपाउंड किया गया है। आरटीए इंस्पेक्टर सचिन ने बताया कि 49 वाहन इंपाउंड किए गए हैं और यह अभियान लगातार जारी रहेगा। क्योंकि वाहन चालक लगातार आदेश के बावजूद 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहनों को लगातार दौड़ा रहे हैं।
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उन सभी फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए है, जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है और इस आदेश के बावजूद बॉयलर चलाने वाले फैक्ट्री मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी। दवाई, दूध, ब्रैड आदि फैक्टरी को इसमें छूट दी गई है। यह आदेश 14 नवंबर तक जारी रहेगा।
-नवीन गुलिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग
प्रशासन के इस आदेश से कुंडली की अधिकतर फैक्ट्री बंद हो गई है, जबकि अन्य फैक्ट्री बिजली निगम के अधिकारियों ने बंद करा दी। इस समय फैक्टरी में जनरेटर नहीं चलाने के आदेश हैं और उसके बावजूद बिजली लाइन पर काम करके कट लगाए जा रहे हैं। इससे जिन फैक्ट्रियों में बॉयलर नहीं है, वह भी बंद हो जाती है। इस तरह उद्योगपतियों को बड़ा नुकसान किया जा रहा है और इसके लिए बिजली निगम के अधिकारी सबसे बड़े जिम्मेदार है।
-सुभाष गुप्ता, उपाध्यक्ष कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन