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बजरंग ने घर आकर खाया मां के हाथों का चूरामा, दोस्तों के साथ समय बिताया
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:12 AM IST
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बजरंग ने घर आकर खाया मां के हाथों का चूरामा, दोस्तों के साथ समय बिताया
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लौटे पहलवान बजरंग पूनिया ने घर आते ही सबसे पहले मां के हाथ का चूरमा खाया। बुधवार सुबह होते ही बधाई देने के लिए बजरंग के पास फोन आने शुरू हो गए तो दोस्त भी घर पहुंच गए। इस तरह बजरंग पूनिया अपने परिवार के अलावा दोस्तों के साथ दिनभर समय बिताया
पहलवान बजरंग पूनिया जब मंगलवार की रात को घर पहुंचे तो उनकी मां ओमप्यारी ने अपने हाथ से चूरमा व खाना बनाया हुआ था। क्योंकि बजरंग को अपनी मां के हाथों का चूरमा व खाना बहुत पसंद है। बजरंग ने बताया कि वह जब कभी विदेश में चैंपियनशिप खेलने के लिए जाता हूं तो सबसे ज्यादा मां के हाथों का चूरमा व घर का खाना मिस करता है। क्योंकि विदेशों के खाने में अपने यहां के जैसे खाने की बात नहीं है। बजरंग ने घर आकर रात में काफी देर तक पिता बलवान सिंह, भाई हरेंद्र, मां ओमप्यारी समेत परिवार के अन्य लोगों के साथ बातचीत की। वहीं, जब बुधवार सुबह दोस्तों व अन्य लोगों को बजरंग के घर वापसी का पता चला तो हर किसी ने फोन करके उसे बधाई देनी शुरू कर दी। बजरंग का कहना है कि एशियन गेम्स खत्म होने के बाद वह दोबारा से पहले जैसी दिनचर्या शुरू कर देगा। क्योंकि वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप अक्टूबर में होनी है और इस तरह उसके लिए ज्यादा समय नहीं है। उसके बाद 2020 में टोक्यो ओलंपिक भी सिर पर दिख रहा है और उसके लिए भी बड़ी तैयारी करनी है। जिससे ओलंपिक तक कोई ऐसा दांव न बचे, जिसमें कमजोरी नजर आए। बजरंग ने कहा कि उसका सपना है कि वह ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतकर लाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लौटे पहलवान बजरंग पूनिया ने घर आते ही सबसे पहले मां के हाथ का चूरमा खाया। बुधवार सुबह होते ही बधाई देने के लिए बजरंग के पास फोन आने शुरू हो गए तो दोस्त भी घर पहुंच गए। इस तरह बजरंग पूनिया अपने परिवार के अलावा दोस्तों के साथ दिनभर समय बिताया
पहलवान बजरंग पूनिया जब मंगलवार की रात को घर पहुंचे तो उनकी मां ओमप्यारी ने अपने हाथ से चूरमा व खाना बनाया हुआ था। क्योंकि बजरंग को अपनी मां के हाथों का चूरमा व खाना बहुत पसंद है। बजरंग ने बताया कि वह जब कभी विदेश में चैंपियनशिप खेलने के लिए जाता हूं तो सबसे ज्यादा मां के हाथों का चूरमा व घर का खाना मिस करता है। क्योंकि विदेशों के खाने में अपने यहां के जैसे खाने की बात नहीं है। बजरंग ने घर आकर रात में काफी देर तक पिता बलवान सिंह, भाई हरेंद्र, मां ओमप्यारी समेत परिवार के अन्य लोगों के साथ बातचीत की। वहीं, जब बुधवार सुबह दोस्तों व अन्य लोगों को बजरंग के घर वापसी का पता चला तो हर किसी ने फोन करके उसे बधाई देनी शुरू कर दी। बजरंग का कहना है कि एशियन गेम्स खत्म होने के बाद वह दोबारा से पहले जैसी दिनचर्या शुरू कर देगा। क्योंकि वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप अक्टूबर में होनी है और इस तरह उसके लिए ज्यादा समय नहीं है। उसके बाद 2020 में टोक्यो ओलंपिक भी सिर पर दिख रहा है और उसके लिए भी बड़ी तैयारी करनी है। जिससे ओलंपिक तक कोई ऐसा दांव न बचे, जिसमें कमजोरी नजर आए। बजरंग ने कहा कि उसका सपना है कि वह ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतकर लाए।
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