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क्रोध का जलता शोला अब चढ़ जाएगा परवान
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‘क्रोध का जलता शोला अब चढ़ जाएगा परवान’
-महिला काव्य मंच ने दी पुलवामा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। पुलवामा में हुए आतंकी हमले की निंदा में महिला काव्य मंच सोनीपत इकाई की तरफ से मुरथल में मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें देश के जाबांज सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि डॉ.कमलेश मालिक ने अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने आतंक के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि -गूंज रहा है हर चौराहा व्यर्थ न जाएगा बलिदान, इसी क्रोध का जलता शोला अब चढ़ जाएगा परवान। मंच की प्रदेशाध्यक्ष डा. ज्योति राज ने कहा कि ये धरा पर ख़ून किसका आज फिर से बह गया, दुश्मनों की बुजदिली के नापाक किस्से कह गया। गन्नौर की कवयित्री चंचल द्विवेदी ने कहा कि हिंदुस्तान के जज्बात पर ना हाथ डालो तुम, नजर मेरे भारत पर ना बेपाक डालो तुम। बढ़खालसा से आई ज्योति दहिया ने कहा कि हास्य कविता नहीं लिखी, ना कोई गजल सुनाने आई हूं, आग लगी है सीने में, घायल भारत चीख रहा है मैं वो चीख सुनाने आई हूं। सोनीपत की डा. अनिता फोर ने फरमाया कि नाज हमें है उन वीरों पर, मां का आंचल छोड़ जिन्होंने कफन तिरंगा ओढ़ लिया है। वहीं शीतल नवीन ने कहा कि सरहद पर प्राण न्योछावर करके जब शहादत आती है, वीर सैनिक की पत्नी खुद मां की धीर बंधाती है। प्रदेश सचिव संचिता ने कहा कि धर्म जात मंदिर मस्जिद अब यही बातें हैं, क्यूं तेरे देश में अब अंधेरी सी रातें हैं। इसके साथ ही भिगान से तुलसी, मुरथल से सीमा गुप्ता, संध्या, मंजू, सोनीपत से योगिता ने भी देश के वीरों को नम श्रद्धांजलि दी।
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-महिला काव्य मंच ने दी पुलवामा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। पुलवामा में हुए आतंकी हमले की निंदा में महिला काव्य मंच सोनीपत इकाई की तरफ से मुरथल में मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें देश के जाबांज सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि डॉ.कमलेश मालिक ने अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने आतंक के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि -गूंज रहा है हर चौराहा व्यर्थ न जाएगा बलिदान, इसी क्रोध का जलता शोला अब चढ़ जाएगा परवान। मंच की प्रदेशाध्यक्ष डा. ज्योति राज ने कहा कि ये धरा पर ख़ून किसका आज फिर से बह गया, दुश्मनों की बुजदिली के नापाक किस्से कह गया। गन्नौर की कवयित्री चंचल द्विवेदी ने कहा कि हिंदुस्तान के जज्बात पर ना हाथ डालो तुम, नजर मेरे भारत पर ना बेपाक डालो तुम। बढ़खालसा से आई ज्योति दहिया ने कहा कि हास्य कविता नहीं लिखी, ना कोई गजल सुनाने आई हूं, आग लगी है सीने में, घायल भारत चीख रहा है मैं वो चीख सुनाने आई हूं। सोनीपत की डा. अनिता फोर ने फरमाया कि नाज हमें है उन वीरों पर, मां का आंचल छोड़ जिन्होंने कफन तिरंगा ओढ़ लिया है। वहीं शीतल नवीन ने कहा कि सरहद पर प्राण न्योछावर करके जब शहादत आती है, वीर सैनिक की पत्नी खुद मां की धीर बंधाती है। प्रदेश सचिव संचिता ने कहा कि धर्म जात मंदिर मस्जिद अब यही बातें हैं, क्यूं तेरे देश में अब अंधेरी सी रातें हैं। इसके साथ ही भिगान से तुलसी, मुरथल से सीमा गुप्ता, संध्या, मंजू, सोनीपत से योगिता ने भी देश के वीरों को नम श्रद्धांजलि दी।
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