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एकत्व के पुल बनाने में किया जाए मानवीय मूल्यों का प्रयोग : माता सुदीक्षा
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:06 AM IST
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एकत्व के पुल बनाने में किया जाए मानवीय मूल्यों का प्रयोग : माता सुदीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि मानव मूल्यों का प्रयोग सदा एकत्व के पुल बनाने में किया जाना चाहिए। निरंकारी मिशन ने सदैव मानव मात्र को सदैव निष्काम प्रेम की सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानव को चाहिए कि वह नकारात्मकता को नकार एक-दूसरे के करीब आकर मतभेदों को दूर करें। संत सदा ही इंसान को सुमति प्रदान करते हैं। जिससे मानव अपने जीवन में सुधार कर सके।
वे निरंकारी मिशन के 71वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन गन्नौर व समालखा के बीच संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर संगत को संदेश दे रही थीं। समागम में देश-विदेश से पांच लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। माता सुदीक्षा ने कहा कि महापुुरुषों ने सदा इंसान के विवेक को जगाया है। जिससे वह सोच-समझकर एक सुगम रास्ते पर चलकर प्रभु की सेवा कर सकें। गलत रास्ते पर चलकर इंसान दूसरों के रास्ते में कांटे बिछाने का काम करता है और संत सदा बिखरे हुए कांटों को समेटते हैं। संतों के पास वह ज्ञान होता है जिससे वह सभी को सुख प्रदान करते हैं। मिशन के गुरुओं ने सदैव मानव-मात्र के प्रति निष्काम प्रेम की सीख दी। उन्होंने कहा कि मानव को अपने जीवन में निष्काम भाव व दृढ़ता से मानवता के उत्थान के लिए सदैव योगदान देते रहना चाहिए। माता सुदीक्षा ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह ने पूरे विश्व में सद्भावपूर्ण एकता का संदेश दिया। वह कहते थे कि नकारात्मकता को नकारते हुए सभी को एक-दूसरे के करीब आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव को एक-दूसरे के बारे में बात करने के बजाए, एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। अवगुणों को त्यागकर सद्गुण ग्रहण करें।
माता सविंदर को समर्पित नृत्य किया प्रस्तुत
निरंकारी संत समागम के दौरान लुधियाना से आए बच्चों ने माता सविंदर को समर्पित नृत्य किया। इसमें दर्शाया गया कि माता ने किस तरह बाबा गुरू बचन सिंह, राजमाता कुलवंत कौर व बाबा हरदेव सिंह के साथ मिलकर मिशन का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने अपना जीवन मिशन व सद्गुरु की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। वह चाहती थी कि मिशन का प्रत्येक श्रद्धालु दूसरों के लिए एक आदर्श बने। उनका विश्वास था कि कर्म की आवाज शब्दों से भी अधिक होती है। कार्यक्रम नृत्य निदेशक शर्लिया व कोरियोग्राफर कुसुम के नेतृत्व में तैयार करवाया गया। इसे आराधना, नम्रता, नवजोत, हरिदेव, अनमोल, शोभित, निखिल, नयन, आर्यन, प्रियंका, आकाश, हरीश, साहिल, नेहा व प्रियंका ने प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम का हुआ भव्य समापन
निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित तीन दिवसीय 71वें निरंकारी संत समागम का सोमवार को भव्य समापन हुआ। समागम के समापन के साथ ही शाम से ही इसमें भाग लेने पहुंचे भक्तों के जाने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। भक्त चेहरे पर सुकून व आध्यात्मिकता का भाव लिए निजी व सार्वजनिक वाहनों से अपने घरों की ओर लौटते दिखाई दिए। देश के विभिन्न प्रांतों से अलग-अलग वेशभूषा में पहुंचे भक्तों का यह कारवां अनेकता में एकता का अद्भुत नजारा पेश कर रहा था। भक्तों के कारवां ने शोभा यात्रा का रूप ले लिया था। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने भी दोनों हाथ जोड़कर भक्तों का आभार प्रकट किया।
डाक्टरों की टीमों का जताया आभार
समापन के अवसर पर सद्गुरु माता सुदीक्षा ने दूर देशों से आई कायरोप्रेटिक डाक्टरों की टीम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की टीम ने समागम में आए श्रद्धालुओं की निष्काम भाव से सेवा की। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान द्वारा परमात्मा के साथ जुड़े सच्चे इंसान सदा संतुलित एवं आनंदित जीवन जीते हैं। सद्गुरु माता ने भक्तों का आह्वान किया कि सभी ईश्वर में पूर्ण आस्था रखते हुए अपने साथी भक्तों के साथ आदरपूर्ण व्यवहार करते रहें।
कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
समागम स्थल पर देश-विदेश से आए कवियों ने अपनी कविताओं के साथ को भाव विभोर किया। इसमें विभिन्न भाषाओं के कविओं ने अपनी रचना के माध्यम से विश्व बंधुत्व का संदेश दिया।
आतंकी हमले में मारे गए सुखदेव कुमार की पत्नी ने कहा मानव सेवा सबसे बड़ी
अमृतसर में निरंकारी सत्संग के दौरान आतंकियों के ग्रेनेड हमले में मारे गए सुखदेव कुमार की पत्नी प्रवीण कुमारी भी समागम में पहुंची थी। प्रवीण कुमारी ने कहा कि जिंदगी आनी-जानी है। यह सौभाग्य है कि सद्गुरु ने हमें इस प्रकार की जिंदगी दी। मैं चाहती हूं कि सारे संसार के अंदर सुख शांति और संस्कारों का उजियारा फैले। सभी अपने जीवन को व्यतीत करते हुए सद्गुरु का यश गाते चले जाएं। समागम से मिली शिक्षा को अपने जीवन के अंदर अपना लें। हर व्यक्ति को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। यही समागम में आने का सबसे बड़ा उद्देश्य है। समागम में आने वाला हर व्यक्ति सद्गुरु के प्रति अपने आपको समर्पित करके सेवा करता रहे। मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। इसे जीवन में अपना लेना चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि मानव मूल्यों का प्रयोग सदा एकत्व के पुल बनाने में किया जाना चाहिए। निरंकारी मिशन ने सदैव मानव मात्र को सदैव निष्काम प्रेम की सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानव को चाहिए कि वह नकारात्मकता को नकार एक-दूसरे के करीब आकर मतभेदों को दूर करें। संत सदा ही इंसान को सुमति प्रदान करते हैं। जिससे मानव अपने जीवन में सुधार कर सके।
वे निरंकारी मिशन के 71वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन गन्नौर व समालखा के बीच संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर संगत को संदेश दे रही थीं। समागम में देश-विदेश से पांच लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। माता सुदीक्षा ने कहा कि महापुुरुषों ने सदा इंसान के विवेक को जगाया है। जिससे वह सोच-समझकर एक सुगम रास्ते पर चलकर प्रभु की सेवा कर सकें। गलत रास्ते पर चलकर इंसान दूसरों के रास्ते में कांटे बिछाने का काम करता है और संत सदा बिखरे हुए कांटों को समेटते हैं। संतों के पास वह ज्ञान होता है जिससे वह सभी को सुख प्रदान करते हैं। मिशन के गुरुओं ने सदैव मानव-मात्र के प्रति निष्काम प्रेम की सीख दी। उन्होंने कहा कि मानव को अपने जीवन में निष्काम भाव व दृढ़ता से मानवता के उत्थान के लिए सदैव योगदान देते रहना चाहिए। माता सुदीक्षा ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह ने पूरे विश्व में सद्भावपूर्ण एकता का संदेश दिया। वह कहते थे कि नकारात्मकता को नकारते हुए सभी को एक-दूसरे के करीब आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव को एक-दूसरे के बारे में बात करने के बजाए, एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। अवगुणों को त्यागकर सद्गुण ग्रहण करें।
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माता सविंदर को समर्पित नृत्य किया प्रस्तुत
निरंकारी संत समागम के दौरान लुधियाना से आए बच्चों ने माता सविंदर को समर्पित नृत्य किया। इसमें दर्शाया गया कि माता ने किस तरह बाबा गुरू बचन सिंह, राजमाता कुलवंत कौर व बाबा हरदेव सिंह के साथ मिलकर मिशन का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने अपना जीवन मिशन व सद्गुरु की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। वह चाहती थी कि मिशन का प्रत्येक श्रद्धालु दूसरों के लिए एक आदर्श बने। उनका विश्वास था कि कर्म की आवाज शब्दों से भी अधिक होती है। कार्यक्रम नृत्य निदेशक शर्लिया व कोरियोग्राफर कुसुम के नेतृत्व में तैयार करवाया गया। इसे आराधना, नम्रता, नवजोत, हरिदेव, अनमोल, शोभित, निखिल, नयन, आर्यन, प्रियंका, आकाश, हरीश, साहिल, नेहा व प्रियंका ने प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम का हुआ भव्य समापन
निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित तीन दिवसीय 71वें निरंकारी संत समागम का सोमवार को भव्य समापन हुआ। समागम के समापन के साथ ही शाम से ही इसमें भाग लेने पहुंचे भक्तों के जाने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। भक्त चेहरे पर सुकून व आध्यात्मिकता का भाव लिए निजी व सार्वजनिक वाहनों से अपने घरों की ओर लौटते दिखाई दिए। देश के विभिन्न प्रांतों से अलग-अलग वेशभूषा में पहुंचे भक्तों का यह कारवां अनेकता में एकता का अद्भुत नजारा पेश कर रहा था। भक्तों के कारवां ने शोभा यात्रा का रूप ले लिया था। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने भी दोनों हाथ जोड़कर भक्तों का आभार प्रकट किया।
डाक्टरों की टीमों का जताया आभार
समापन के अवसर पर सद्गुरु माता सुदीक्षा ने दूर देशों से आई कायरोप्रेटिक डाक्टरों की टीम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की टीम ने समागम में आए श्रद्धालुओं की निष्काम भाव से सेवा की। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान द्वारा परमात्मा के साथ जुड़े सच्चे इंसान सदा संतुलित एवं आनंदित जीवन जीते हैं। सद्गुरु माता ने भक्तों का आह्वान किया कि सभी ईश्वर में पूर्ण आस्था रखते हुए अपने साथी भक्तों के साथ आदरपूर्ण व्यवहार करते रहें।
कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
समागम स्थल पर देश-विदेश से आए कवियों ने अपनी कविताओं के साथ को भाव विभोर किया। इसमें विभिन्न भाषाओं के कविओं ने अपनी रचना के माध्यम से विश्व बंधुत्व का संदेश दिया।
आतंकी हमले में मारे गए सुखदेव कुमार की पत्नी ने कहा मानव सेवा सबसे बड़ी
अमृतसर में निरंकारी सत्संग के दौरान आतंकियों के ग्रेनेड हमले में मारे गए सुखदेव कुमार की पत्नी प्रवीण कुमारी भी समागम में पहुंची थी। प्रवीण कुमारी ने कहा कि जिंदगी आनी-जानी है। यह सौभाग्य है कि सद्गुरु ने हमें इस प्रकार की जिंदगी दी। मैं चाहती हूं कि सारे संसार के अंदर सुख शांति और संस्कारों का उजियारा फैले। सभी अपने जीवन को व्यतीत करते हुए सद्गुरु का यश गाते चले जाएं। समागम से मिली शिक्षा को अपने जीवन के अंदर अपना लें। हर व्यक्ति को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। यही समागम में आने का सबसे बड़ा उद्देश्य है। समागम में आने वाला हर व्यक्ति सद्गुरु के प्रति अपने आपको समर्पित करके सेवा करता रहे। मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। इसे जीवन में अपना लेना चाहिए।