{"_id":"5bedc962bdec2269945cad90","slug":"131542310242-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम से 15 गांव बाहर निकालने पर कानूनी लड़ाई, दो गांवों से 12 लोग हाईकोर्ट में गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम से 15 गांव बाहर निकालने पर कानूनी लड़ाई, दो गांवों से 12 लोग हाईकोर्ट में गए
Updated Fri, 16 Nov 2018 01:07 AM IST
विज्ञापन
निगम से 15 गांव बाहर निकालने पर कानूनी लड़ाई, दो गांवों से 12 लोग हाईकोर्ट पहुंचे
अंकित चौहान
सोनीपत। सरकार ने नगर निगम विरोध समिति व सांसद के कहने पर 15 गांवों को भले ही नगर निगम से बाहर निकाल दिया हो, लेकिन अब इसको लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। जिन गांवों को नगर निगम से बाहर निकाला गया है, उनमें से कई गांवों के 12 लोग हाईकोर्ट में चले गए हैं। उन लोगों ने याचिका में साफ कहा है कि नगर निगम में गांवों को शामिल करने के बाद करोड़ों रुपया खर्च करके किस आधार पर दोबारा से बाहर निकाला गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि नगर निगम में रहते हुए उनके गांवों में बेहतर विकास हो सकता है और राजनीति के चक्कर में गांवों को नगर निगम से बाहर निकाला गया है। इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की गई है।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का 157 करोड़ रुपया व 3700 एकड़ पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम विरोध समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया था। इस मामले में सांसद रमेश कौशिक के मध्यस्थता करने पर 15 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून को घोषणा कर दी थी और इसमें एक माह पहले ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
--
ऐसे हुआ दोबारा से निगम की सीमा का निर्धारण
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना खुर्द, हरसाना कलां, नसीरपुर बांगर, मुरशीदपुर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। इनमें मुरशीदपुर में आबादी नहीं है जो केवल राजस्व रिकार्ड में दर्ज है, जबकि हरसाना खुर्द व हरसाना कला रिकार्ड में दो गांव दर्ज हैं। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी। इनके अलावा बढ़खालसा, ककरोई, महलाना, भिगान, हसनपुर, इब्राहिमपुर कुराड के कुछ हिस्से को नगर निगम में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
--
कुमासपुर व किशोरा के 12 लोगों ने हाईकोर्ट में डाले दो केस
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और उन गांवों के लोगों ने लड़ाई शुरू कर दी है। इसके लिए ही एक केस कुमासपुर गांव के प्रेम, अजय, जयसिंह, किशोरा के महिपाल, राजेश ने हाईकोर्ट में डाला है। जिन्होंने अपने केस में मुरथल, कुमासपुर, किशोरा व नांगल खुर्द का जिक्र करते हुए कहा है कि इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र से गलत बाहर किया गया है। जबकि नगर निगम में रहते हुए हर तरह से बेहतर सुविधा मिल रही थी और वहां विकास भी काफी शुरू हो गया था। वहीं दूसरा केस कुमासपुर के सतपाल, जगबीर, ओमप्रकाश, प्रेम, चरण सिंह, राजू आदि ने हाईकोर्ट में डाला है, जिसमें सभी गांवों को लेकर कहा गया है कि नगर निगम में शामिल करके गांवों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया गया है। उसका असर भी गांवों में दिखने लगा था और विकास होने लगा था। दोनों याचिकाओं में गांवों को फिर से निगम में शामिल करने की मांग की गई है।
--
राजनीति के चक्कर में निकले बाहर, नेता के खिलाफ बढ़ रहा रोष
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने की मांग को लेकर नगर निगम विरोध समिति के लोग जब अग्रसेन चौक पर धरने पर बैठे हुए थे तो एक नेता आए दिन जाकर उनकी पैरवी करते थे। निगम से बाहर निकाले गए गांवों के लोगों का कहना है कि उस नेता ने राजनीति के चक्कर में गांवों को निगम से बाहर निकलवाया है, जबकि निगम में रहते हुए ही विकास बेहतर हो रहा था। गांवों को निगम से बाहर निकालने के बाद भाजपा के उस नेता के खिलाफ गांवों के लोगों में रोष बढ़ गया है।
--
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाले जाने की अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है। यह केस हो सकता है कि कुछ समय पहले ही डाले गए हैं, जिसका अभी कोई कागज हमारे पास नहीं आया है। इसमें किसी तरह का जवाब मांगा जाता है तो वह हाईकोर्ट में दिया जाएगा। सुनीता वर्मा, कमिश्नर नगर निगम
विज्ञापन
अंकित चौहान
सोनीपत। सरकार ने नगर निगम विरोध समिति व सांसद के कहने पर 15 गांवों को भले ही नगर निगम से बाहर निकाल दिया हो, लेकिन अब इसको लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। जिन गांवों को नगर निगम से बाहर निकाला गया है, उनमें से कई गांवों के 12 लोग हाईकोर्ट में चले गए हैं। उन लोगों ने याचिका में साफ कहा है कि नगर निगम में गांवों को शामिल करने के बाद करोड़ों रुपया खर्च करके किस आधार पर दोबारा से बाहर निकाला गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि नगर निगम में रहते हुए उनके गांवों में बेहतर विकास हो सकता है और राजनीति के चक्कर में गांवों को नगर निगम से बाहर निकाला गया है। इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की गई है।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का 157 करोड़ रुपया व 3700 एकड़ पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम विरोध समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया था। इस मामले में सांसद रमेश कौशिक के मध्यस्थता करने पर 15 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून को घोषणा कर दी थी और इसमें एक माह पहले ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
विज्ञापन
--
ऐसे हुआ दोबारा से निगम की सीमा का निर्धारण
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना खुर्द, हरसाना कलां, नसीरपुर बांगर, मुरशीदपुर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। इनमें मुरशीदपुर में आबादी नहीं है जो केवल राजस्व रिकार्ड में दर्ज है, जबकि हरसाना खुर्द व हरसाना कला रिकार्ड में दो गांव दर्ज हैं। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी। इनके अलावा बढ़खालसा, ककरोई, महलाना, भिगान, हसनपुर, इब्राहिमपुर कुराड के कुछ हिस्से को नगर निगम में शामिल किया गया है।
विज्ञापन
--
कुमासपुर व किशोरा के 12 लोगों ने हाईकोर्ट में डाले दो केस
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और उन गांवों के लोगों ने लड़ाई शुरू कर दी है। इसके लिए ही एक केस कुमासपुर गांव के प्रेम, अजय, जयसिंह, किशोरा के महिपाल, राजेश ने हाईकोर्ट में डाला है। जिन्होंने अपने केस में मुरथल, कुमासपुर, किशोरा व नांगल खुर्द का जिक्र करते हुए कहा है कि इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र से गलत बाहर किया गया है। जबकि नगर निगम में रहते हुए हर तरह से बेहतर सुविधा मिल रही थी और वहां विकास भी काफी शुरू हो गया था। वहीं दूसरा केस कुमासपुर के सतपाल, जगबीर, ओमप्रकाश, प्रेम, चरण सिंह, राजू आदि ने हाईकोर्ट में डाला है, जिसमें सभी गांवों को लेकर कहा गया है कि नगर निगम में शामिल करके गांवों पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया गया है। उसका असर भी गांवों में दिखने लगा था और विकास होने लगा था। दोनों याचिकाओं में गांवों को फिर से निगम में शामिल करने की मांग की गई है।
--
राजनीति के चक्कर में निकले बाहर, नेता के खिलाफ बढ़ रहा रोष
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने की मांग को लेकर नगर निगम विरोध समिति के लोग जब अग्रसेन चौक पर धरने पर बैठे हुए थे तो एक नेता आए दिन जाकर उनकी पैरवी करते थे। निगम से बाहर निकाले गए गांवों के लोगों का कहना है कि उस नेता ने राजनीति के चक्कर में गांवों को निगम से बाहर निकलवाया है, जबकि निगम में रहते हुए ही विकास बेहतर हो रहा था। गांवों को निगम से बाहर निकालने के बाद भाजपा के उस नेता के खिलाफ गांवों के लोगों में रोष बढ़ गया है।
--
नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाले जाने की अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है। यह केस हो सकता है कि कुछ समय पहले ही डाले गए हैं, जिसका अभी कोई कागज हमारे पास नहीं आया है। इसमें किसी तरह का जवाब मांगा जाता है तो वह हाईकोर्ट में दिया जाएगा। सुनीता वर्मा, कमिश्नर नगर निगम