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किसानों के पास पहुंच रहे फसल बिजाई संबंधित गलत मैसेज, विभाग में काट रहे चक्कर
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सिरसा। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत पंजीकृत किसानों के पास अब मुख्यालय से फसल बदलने के संदेश जा रहे है। संदेश पहुंचने के बाद किसान कृषि विभाग में मैसेज लेकर पहुंच रहे है। लेकिन अधिकारी पोर्टल की खामी बता किसानों से आवेदन पत्र लिखने की बात कह रहे हैं। पोर्टल के माध्यम से कितने किसानों को मैसेज अब तक पहुंच चुका है इससे संबंधित डाटा नहीं है। प्रशासन की गलती के कारण योजना के अंतर्गत धान की फसल छोड़कर अन्य फसल लगाने के बाद भी किसानों को योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है।
किसानों को मेरा पानी मेरी विरासत योजना का लाभ देने के लिए विभागों की ओर से सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई। किसान द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए रिकॉर्ड से मिलान कर सही किया जाना था। लेकिन पोर्टल पर गलत डाटा अपलोड होने के कारण किसानों के पास भी इसके मैसेज पहुंचना शुरू हो गया। बता दे कि यह बदलाव पोर्टल पर केवल उपायुक्त की लॉगिन आईडी से होना था। किसानों के फोन पर जैसे ही मैसेज पहुंचना शुरू हुए वे उन्हें दिखाने कृषि उपनिदेशक कार्यालय में पहुंचना शुरू हो गए। किसानों को पोर्टल में खामी होने की जानकारी दी गई। उन्हें आवेदन पत्र लिखकर उपायुक्त कार्यालय में जमा करवाने की जानकारी दी गई। जिसके कारण अब किसानों को एक जगह से दूसरी जगह पर चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।
5528 किसानों ने योजना के लाभ के लिए अपलोड किया था डाटा
भूमिगत पानी को बचाने के लिए सरकार की ओर से योजना शुरू की गई थी। जिले के करीब 5 हजार 528 किसानों ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत पोर्टल पर पंजीकरण करवाया था। वहीं किसान सुरजीत सिंह, सुनील कुमार व अनिल ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने इस बार धान की फसल की बिजाई ना कर नरमे व अन्य फसलों की बिजाई की थी। बीते रविवार को फोन पर मैसेज मिला कि आपकी रूई की फसल को बदलकर धान, ग्वार व अरबी कर दिया गया है। यदि आपको कोई शिकायत है तो उपायुक्त से संपर्क करें।
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योजना के तहत करवाया था फिजिकल सर्वे, नहीं हुआ मिलान
योजना में पंजीकरण वाले किसानों को योजना का लाभ देेने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को पंजीकृत किसानों के खेतों में जाकर वेरिफाई करना था कि किसान द्वारा पोर्टल पर दर्ज फसल उसके खेतों में लगी है या नहीं। वेरिफाई करने के बाद डाटा पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया गया था। सर्वे डाटा व ई -गिरदावरी के डाटा का मिलान नहीं हुआ। मिलान ना होने वाले डाटा को जब सही करने के लिए उपायुक्त की लॉगिन आईडी से फेरबदल करना चाहा तो किसानों को फसल बदलने के मैसेज जाने लगे।
यह होना था योजना से लाभ
भूमिगत जल को बचाने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को धान की फसल के बदले अन्य फसल लगाने पर मुआवजे के तौर पर 7 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मिलने है। लेकिन यह लाभ उन किसानों को मिलना था जो पहले धान की खेती करते हो लेकिन योजना में आकर उन्होंने इस बार धान की फसल ना लगाकर अन्य फसल लगाई हो।
तकनीकी टीम जांच कर रही है कि कहां गलती हुई है। जिन किसानों को फसल बदलने के मैसेज मिल रहे हैं। वह उपायुक्त कार्यालय में जाकर आवेदन पत्र जमा करवा सकते हैं।
-बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, कृषि विभाग सिरसा।
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किसानों को मेरा पानी मेरी विरासत योजना का लाभ देने के लिए विभागों की ओर से सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई। किसान द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए रिकॉर्ड से मिलान कर सही किया जाना था। लेकिन पोर्टल पर गलत डाटा अपलोड होने के कारण किसानों के पास भी इसके मैसेज पहुंचना शुरू हो गया। बता दे कि यह बदलाव पोर्टल पर केवल उपायुक्त की लॉगिन आईडी से होना था। किसानों के फोन पर जैसे ही मैसेज पहुंचना शुरू हुए वे उन्हें दिखाने कृषि उपनिदेशक कार्यालय में पहुंचना शुरू हो गए। किसानों को पोर्टल में खामी होने की जानकारी दी गई। उन्हें आवेदन पत्र लिखकर उपायुक्त कार्यालय में जमा करवाने की जानकारी दी गई। जिसके कारण अब किसानों को एक जगह से दूसरी जगह पर चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।
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5528 किसानों ने योजना के लाभ के लिए अपलोड किया था डाटा
भूमिगत पानी को बचाने के लिए सरकार की ओर से योजना शुरू की गई थी। जिले के करीब 5 हजार 528 किसानों ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत पोर्टल पर पंजीकरण करवाया था। वहीं किसान सुरजीत सिंह, सुनील कुमार व अनिल ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने इस बार धान की फसल की बिजाई ना कर नरमे व अन्य फसलों की बिजाई की थी। बीते रविवार को फोन पर मैसेज मिला कि आपकी रूई की फसल को बदलकर धान, ग्वार व अरबी कर दिया गया है। यदि आपको कोई शिकायत है तो उपायुक्त से संपर्क करें।
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योजना के तहत करवाया था फिजिकल सर्वे, नहीं हुआ मिलान
योजना में पंजीकरण वाले किसानों को योजना का लाभ देेने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को पंजीकृत किसानों के खेतों में जाकर वेरिफाई करना था कि किसान द्वारा पोर्टल पर दर्ज फसल उसके खेतों में लगी है या नहीं। वेरिफाई करने के बाद डाटा पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया गया था। सर्वे डाटा व ई -गिरदावरी के डाटा का मिलान नहीं हुआ। मिलान ना होने वाले डाटा को जब सही करने के लिए उपायुक्त की लॉगिन आईडी से फेरबदल करना चाहा तो किसानों को फसल बदलने के मैसेज जाने लगे।
यह होना था योजना से लाभ
भूमिगत जल को बचाने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को धान की फसल के बदले अन्य फसल लगाने पर मुआवजे के तौर पर 7 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मिलने है। लेकिन यह लाभ उन किसानों को मिलना था जो पहले धान की खेती करते हो लेकिन योजना में आकर उन्होंने इस बार धान की फसल ना लगाकर अन्य फसल लगाई हो।
तकनीकी टीम जांच कर रही है कि कहां गलती हुई है। जिन किसानों को फसल बदलने के मैसेज मिल रहे हैं। वह उपायुक्त कार्यालय में जाकर आवेदन पत्र जमा करवा सकते हैं।
-बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, कृषि विभाग सिरसा।