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महिला किसान खुद प्रगतिशील बनकर अन्य महिलाओं को बना रही काबिल, राज्य स्तर तक हो चुकी सम्मानित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 11:21 PM IST
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Women farmers are making themselves progressive and making other women capable, have been honored up to the state level
वर्मीकंपोस्ट खाद को दिखाती महिला किसान मंजू रानी। - फोटो : Sirsa
सिरसा। तकनीकी खेती कर कम जमीन में भी अच्छी आमदन की जा सकती है। यह कर दिखाया गांव बेगू की महिला किसान मंजू रानी ने। जो खुद प्रगतिशील किसान तो है ही। साथ में जिले की अन्य महिला किसानों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। मंजू रानी को इस उपलब्धि के चलते जिला स्तर व राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जा चुका है।
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गांव बेगू निवासी मंजू रानी ने वर्ष 2011 में वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए प्रशिक्षण लिया था। इसके पश्चात वर्ष 2017 में खुंबी उत्पादन शुरू करने के साथ ही कॉटन सीड पर काम किया। आज इसी की बदौलत मंजू रानी की ओर से तैयार किया जाने वाला कॉटन सीड देश के तीन राज्यों में सप्लाई हो रहा है। इसके अलावा मंजू आलू के बीज की भी अच्छी किस्म तैयार कर रही है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि मंजू रानी खुद प्रगतिशील होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है। जिन्हें वर्मी कंपोस्ट खाद व कॉटन का बीज तैयार करना सिखाया जाता है। मंजू रानी ने बताया कि वह इन महिलाओं को अपने फार्म पर फ्री में प्रशिक्षण देती हैं।
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5 एकड़ भूमि से 5 लाख रुपये की आमदनी
मंजू रानी के पास करीब 5 एकड़ भूमि है। परंपरागत खेती से जहां एक सीजन के दौरान 1 से 1.50 लाख रुपये की आमदनी होती थी। वहीं अबमंजू रानी इतनी भूमि में तकनीकी खेती कर 5 से 6 लाख रुपये की आमदनी हर सीजन में कर रही हैं। इसी पांच एकड़ में खुंबी, केंचुआ, बीज व वर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन किया जाता है।
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महिला किसान द्वारा तैयार की गई किस्में
महिला किसान मंजू रानी ने कॉटन की करीब 5 किस्में तैयार की है। इनमें कॉटन की हाईब्रीड किस्म एएएच-1, सीआईसीआर-2, सीआईसीआर-6 व देशी कपास की एचडी 266, एलडी 327 शामिल है। इन बीजों को राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के किसान लेकर जाते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इनमें से सीआईसीआर -6 नंबर किस्म में अमरीकन सूंडी नहीं लगती और किसान खुद के खेत में इस किस्म को बोने के बाद उससे बीज खुद तैयार कर सकता है। जिससे किसानों का आर्थिक नुकसान कम होता है।
ऐसे होती है वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार
मंजू रानी अपने खेत में एक बार में 30 से 40 टन खाद तैयार करती है। जिसकी कीमत 500 रुपये प्रति क्विंटल है। मुख्य रूप से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए 200 क्विंटल कॉटन की लकड़ी व 10 प्रतिशत गोबर का इस्तेमाल करती हैं। इस प्रकार से तैयार की गई खाद किसान 30 क्विंटल प्रति एकड़ में डाल सकते हैं।

खुंबी उत्पादन व केंचुआ से बढ़ी आमदन
मंजू रानी ने बताया कि वर्ष 2017 से खुंबी उत्पादन व केंचुआ की यूनिट लगाई। मशरूम की डिंगरी किस्म अच्छी पैदावार देती है। वहीं केंचुआ भी वह 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचती है। इन सभी से प्रति वर्ष उसे अच्छी खासी आमदनी हो जाती है। मंजू रानी एक बार राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। वहीं हाल ही में सीजेएम अनुराधा ने मंजू रानी को महिला दिवस पर सम्मानित किया है।
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