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Sirsa News: घर पालने के लिए लाई महिला कुत्ते का बच्चा, काटने से फैला रेबीज का संक्रमण, मौत

Mon, 01 Jun 2026 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 01 Jun 2026 10:58 PM IST
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woman died by dog bite
दो माह पहले पिल्ले ने काटा था, प्राथमिक उपचार के दौरान नहीं लगवाई इंजेक्शन
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कुछ दिन पहले महिला लगी हकलाने व बिगड़ी तबीयत, बठिंडा में उपचार के दौरान तोड़ा दम
- चिकित्सक बोले-इंजेक्शन लगाने में न बरतें लापरवाही, गांव में लोगों में डर का माहौल

फोटो -- 27

संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। गांव देसूजोधा में 38 वर्षीय महिला मनप्रीत कौर की रेबीज के संक्रमण के कारण उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों के अनुसार कुत्ते के बच्चे ने दो माह पहले महिला के हाथ पर काट लिया था। महिला ने रेबीज के इंजेक्शन लगवाने की जगह प्राथमिकी उपचार करवाया था। इसी कारण संक्रमण फैल गया। उपचार के दौरान मौत हो गई।

मृतका के चाचा ससुर साधुराम नंबरदार ने बताया कि करीब दो माह पहले परिवार के सदस्य खेत में सरसों की फसल काटने गए थे। उसी दौरान उन्हें खेत में एक कुत्ते का बच्चा मिला। उसे वे पालने के उद्देश्य से घर ले आए। घर में रहते समय उस पिल्ले ने मनप्रीत कौर के हाथ पर काट लिया था। परिवार के अनुसार, मनप्रीत ने इस घटना को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया। न तो घाव का उचित उपचार करवाया न ही रेबीजरोधी टीके लगवाए।
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साधुराम ने बताया कि कुछ समय बाद उसके हाथ में दर्द रहने लगा लेकिन उसने इसे भी गंभीरता से नहीं लिया। बीच-बीच में उसे हल्के झटके भी महसूस होते थे जिन्हें सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा कर दिया गया।
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परिजनों के अनुसार, तीन दिन पहले मौसम खराब होने और बारिश के बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे बार-बार झटके आने लगे और व्यवहार में भी बदलाव दिखाई देने लगा। रविवार को हालत ज्यादा खराब हो गई। उसे बोलने में परेशानी होने लगी और वह असामान्य हरकतें करने लगी। परिजन उसे तुरंत डबवाली के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सोमवार सुबह बठिंडा के निजी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी हालत में सुधार नहीं होने पर उसे एम्स बठिंडा भेजा गया जहां सोमवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पति को खो चुकी थी मनप्रीत

परिवार के अनुसार, मनप्रीत कौर के पति सेवक सिंह की करीब दो वर्ष पहले कैंसर के कारण मृत्यु हो गई थी। अब मनप्रीत की मौत के बाद उसके दो छोटे बेटे मातृ स्नेह से भी वंचित हो गए हैं। इस दुखद घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
खंड डबवाली में इस वर्ष रेबीज से मौत का पहला मामला
खंड डबवाली में वर्ष 2026 में रेबीज संक्रमण से मौत का यह पहला मामला सामने आया है। हालांकि, वर्ष 2025 में भी उपमंडल के गांव बिज्जूवाली में कुत्ते के महिला को सिर व अन्य हिस्सों पर गंभीर रूप से काटने का मामला सामने आया था। उसके बाद महिला की हालात गंभीर हो गई थी। उसकी भी उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
क्या है रेबीज और कैसे बनती है जानलेवा बीमारी
चिकित्सकों के अनुसार, रेबीज एक अत्यंत खतरनाक वायरल बीमारी है जो संक्रमित कुत्ते, बंदर, बिल्ली, लोमड़ी या अन्य स्तनधारी जानवर के काटने, खरोंचने अथवा उसकी लार के खुले घाव पर लगने से फैल सकती है। यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे नसों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचता है। बीमारी का असर शुरू होने में कुछ दिन, कुछ सप्ताह या कई महीने भी लग सकते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि एक बार रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगें तो मरीज को बचा पाना लगभग असंभव हो जाता है।
ये हैं मुख्य लक्षण
- काटे गए स्थान पर दर्द, झनझनाहट या जलन।
- बुखार और कमजोरी, बेचैनी और घबराहट।

- बार-बार झटके आना ,बोलने और निगलने में कठिनाई।
- पानी देखकर डर लगना (हाइड्रोफोबिया)।
- अत्यधिक उत्तेजना या असामान्य व्यवहार।
- सांस लेने में परेशानी।
कुत्ता काटने पर तुरंत क्या करें
- घाव को तुरंत धोएं।
- काटे गए स्थान को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस की मात्रा काफी हद तक कम हो सकती है।

- एंटीसेप्टिक लगाएं, घाव को धोने के बाद आयोडीन या अन्य एंटीसेप्टिक दवा लगाएं।

- घरेलू नुस्खों से बचें, घाव पर मिट्टी, तेल, हल्दी, मिर्च, राख या कोई देसी उपचार न लगाएं।
- तुरंत अस्पताल जाएं, नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में जाकर चिकित्सकीय सलाह लें और रेबीज रोधी टीकाकरण शुरू करवाएं।
- टीकों का पूरा कोर्स करवाएं, डॉक्टर की ओर से निर्धारित सभी टीके समय पर लगवाने बेहद जरूरी हैं। बीच में टीके छोड़ना खतरनाक साबित हो सकता है।

- गंभीर घाव होने पर इम्यूनोग्लोब्युलिन लगवाए, गहरे घाव या चेहरे, गर्दन, हाथ जैसी संवेदनशील जगह पर काटने की स्थिति में डॉक्टर रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन लगाने की सलाह दे सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की अपील
इस संबंध में डबवाली नागरिक अस्पताल के अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरसिमरन सिंह का कहना है कि कुत्ते या उसके पिल्ले का छोटा सा काटना भी कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका बचाव टीकाकरण से संभव है लेकिन लक्षण आने के बाद यह लगभग 100 प्रतिशत घातक साबित होती है। देसूजोधा की यह घटना लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत उपचार और टीकाकरण करवाना ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित उपाय है।
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