फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   india proposes russia ukraine ceasefire to protect energy sites and black sea shipping

युद्धविराम के लिए भारत का तीन सूत्रीय प्रस्ताव: शांति की नई पहल से बढ़ी उम्मीदें; क्या मानेंगे रूस-यूक्रेन?

Mon, 26 Oct 2026 10:18 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, कीव/मॉस्को
आईएएनएस, कीव/मॉस्को Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 26 Oct 2026 10:18 PM IST
सार

रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत ने तीन सूत्रीय प्रस्ताव दिया है। इसमें सीमित युद्धविराम के जरिये ऊर्जा ठिकानों, अनाज की आपूर्ति और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने पर जोर है। लेकिन क्या रूस और यूक्रेन इस पहल पर सहमत होंगे? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

विज्ञापन
india proposes russia ukraine ceasefire to protect energy sites and black sea shipping
रूस यूक्रेन युद्ध - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच जंग रोकने के लिए एक प्रस्ताव दिया है। इसमें सीमित समय के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। यूक्रेन के अनुसार, अभी इस मुद्दे पर विचार किए जा रहे प्रस्तावों में भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। यह मिस्र, अमेरिका और तुर्किये के प्रस्तावों से आगे जाता है।
विज्ञापन


एशियन इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने तीन हिस्सों वाला एक प्रस्ताव दिया है। इसमें ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की बात है। काला सागर के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की आपूर्ति जारी रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा, व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन


बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान यूक्रेन के अधिकारियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। यूक्रेन ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत के प्रस्ताव पर यूक्रेन ने क्या कहा?
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने कहा कि विचार किए जा रहे चार प्रस्तावों में भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। इससे संकेत मिलता है कि यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों और काला सागर से जुड़े मामलों में युद्धविराम की संभावना पर विचार कर सकता है।

रूस ने भारत की कूटनीतिक कोशिश का स्वागत किया
हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि भारत के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं। क्रेमलिन ने भी भारत की कूटनीतिक कोशिशों का स्वागत किया है। लेकिन रूस का कहना है कि किसी भी समझौते से स्थायी और न्यायपूर्ण शांति मिलनी चाहिए। रूस केवल कुछ समय के लिए युद्ध रोकने के पक्ष में नहीं है। रूस के अधिकारियों ने कहा कि युद्धविराम से यूक्रेन को फिर से तैयारी करने का मौका मिल सकता है। इससे उसे अपने हथियार और सैन्य ताकत बढ़ाने का समय मिल जाएगा।

ये भी पढ़ें: 'शांति और स्थिरता बनाए रखें': अरुणाचल में सीमा पर तनाव को लेकर चीन ने तोड़ी चुप्पी; भारत से क्या अपील की?


भारत के लिए यह प्रस्ताव क्यों अहम है?
  • भारत की चिंता केवल जंग के मैदान तक सीमित नहीं है। रूस और यूक्रेन के बीच जंग से दुनिया के ऊर्जा बाजार में अस्थिरता आती है। खाद्य आपूर्ति और समुद्री व्यापार भी प्रभावित होते हैं।
  • काला सागर अनाज के निर्यात का एक अहम मार्ग है। यहां से बड़ी मात्रा में अनाज दूसरे देशों तक पहुंचाया जाता है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का असर भी बाजार पर पड़ता है। इससे जरूरी वस्तुओं की कीमतें और उनकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसलिए ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और समुद्री व्यापार में रुकावट भारत के लिए भी चिंता का विषय है।
  • भारत का प्रस्ताव इन सभी मुद्दों से जुड़ा है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा की बात है। समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने पर जोर है। खाद्य आपूर्ति जारी रखने की बात भी है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
  • इस पहल से भारत की कूटनीतिक भूमिका भी मजबूत हो सकती है। भारत रूस और यूक्रेन, दोनों से बातचीत कर सकता है। ऐसे में वह दोनों देशों के बीच शांति की कोशिशों में भूमिका निभा सकता है।

क्या रूस और यूक्रेन युद्धविराम के लिए तैयार होंगे?
भारत के प्रस्ताव के सामने बड़ी चुनौती है। रूस और यूक्रेन, दोनों को लगता है कि उन्होंने अभी अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं किए हैं। दोनों देश सैन्य दबाव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहते हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि दोनों देश सीमित युद्धविराम के लिए तैयार होंगे या नहीं।

अगर ऊर्जा ठिकानों, बंदरगाहों और व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने पर सहमति बनती है, तो इससे युद्ध के मैदान से बाहर भी आर्थिक फायदा हो सकता है। इससे ऊर्जा की आपूर्ति, अनाज के व्यापार और समुद्री आवाजाही को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मॉस्को और कीव अपने सैन्य लक्ष्यों से ऊपर आर्थिक सुरक्षा और आम लोगों की जरूरतों को रखेंगे?

सितंबर में कीव गए थे विदेश मंत्री जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर सितंबर में आधिकारिक यात्रा पर कीव गए थे। वहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा से मुलाकात की थी। सिबिहा के साथ बैठक में जयशंकर ने भारत का रुख दोहराया था। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध का हल जंग के मैदान में नहीं निकल सकता। इसके लिए बातचीत और कूटनीति जरूरी है।


ये भी पढ़ें: क्या चुनाव से पहले ईरान पर कार्रवाई करना चाहते थे नेतन्याहू?: रिपोर्ट पर अब दी सफाई, विपक्ष ने लगाए कई आरोप

सिबिहा ने जयशंकर को युद्ध से जुड़े ताजा घटनाक्रम की जानकारी दी थी। उन्होंने शांति वार्ता के बारे में भी बताया था। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुलाकात के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने सिबिहा को उनके आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें युद्ध और शांति वार्ता से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी मिली।

जयशंकर ने व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया था। दोनों नेताओं ने भारत और यूक्रेन के बीच संबंध मजबूत करने पर भी चर्चा की थी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल क्षेत्र और नवाचार जैसे मुद्दे शामिल थे। दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रशिक्षण और विकास सहयोग पर भी बात हुई थी। जयशंकर ने राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भारत और यूक्रेन के संबंधों पर चर्चा हुई। युद्ध खत्म करने के तरीकों पर भी बात हुई।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed