{"_id":"6ade4afb2bb85960240700d0","slug":"problem-of-combined-market-in-parking-sirsa-news-c-128-1-svns1027-167449-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: टाउन पार्क पार्किंग पर साझा बाजार ने बढ़ाई आमजन की परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: टाउन पार्क पार्किंग पर साझा बाजार ने बढ़ाई आमजन की परेशानी
Mon, 26 Oct 2026 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:01 AM IST
विज्ञापन
सिरसा। पोटा कैबिन लगने के बाद सड़क पर वाहन पार्क करते हुए लोग। संवाद
नगर परिषद ने 10 स्वयं सहायता समूहों को दी जगह, पार्किंग न मिलने पर सडकों पर खड़े होंगे वाहन
पांच से जगह का इंतजार कर रहे स्ट्रीट वेंडर रोड पर खड़े, उन्हें जगह तक नहीं दे पाया प्रशासन
फोटो-- - 42,43,44
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद ने शहर के मुख्य टाउन पार्क और सालासर मंदिर की पार्किंग में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए साझा बाजार स्थापित किया है। इस बाजार के लिए 10 बड़े पोटा केबिन लगाए गए हैं।
इस कदम से वाहन चालकों के लिए आधी पार्किंग जगह छिन गई है। इससे आमजन को अपने वाहन सड़क पर खड़े करने पड़ेंगे, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना होगा।
यह पहल महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने और सरकार से प्रशंसा प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई है। हालांकि, इस व्यवस्था से पार्किंग की समस्या और बढ़ गई है। पांच सालों से जगह का इंतजार कर रहे स्ट्रीट वेंडर्स को अभी तक कोई स्थान नहीं मिला है।
विज्ञापन
उनकी रेहड़ियां सड़कों पर ही लगी रहती हैं जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। स्ट्रीट वेंडर्स भी बार-बार तंग होते हैं। हैरानी की बात है कि महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप को बढ़ावा देने वाले अधिकारी ही स्ट्रीट वेंडर्स योजना भी देखते हैं।
वे दोनों योजनाओं को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं अपनाते हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत दबाव पड़ने पर इन स्ट्रीट वेंडर्स को लोन दिया जाता है। हालांकि, उन्हें जगह देने की बात आने पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। इसी कारण रेहड़ी वाले जगह-जगह भटकते रहते हैं और अक्सर यातायात जाम का कारण बन जाते हैं।
उत्पादों की बिक्री और पार्किंग की चुनौती
नगर परिषद ने साझा बाजार में अचार, मुरब्बा, फिनाइल और कपड़े के बैग जैसे उत्पाद रखे हैं। इसके अतिरिक्त, लड्डू-गोपाल की पोशाक, किसानों से जुड़े सजावटी सामान और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इन उत्पादों को खरीदने के लिए लोग अपने वाहनों पर ही आएंगे। पार्किंग की जगह पर 10 पोटा केबिन होने के कारण ग्राहकों को वाहन पार्क करने में दिक्कत होगी। उन्हें अपने वाहन सड़क पर ही खड़े करने पड़ेंगे।
समूहों के लिए बारी-बारी से अवसर
नगर परिषद ने 10 पोटा केबिन में से पांच शहरी और पांच ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए निर्धारित किए हैं। किसी एक समूह को स्थायी रूप से स्टॉल नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय, समूहों को बारी-बारी से अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। पहले सप्ताह 10 समूह अपने उत्पाद बेचेंगे जिसके बाद अगले समूहों को मौका मिलेगा। इस व्यवस्था से अधिक महिलाओं को बाजार तक पहुंच बनाने और आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, नगर परिषद ने पहले भी ट्रेड टावर मार्केट में पोटा केबिन लगाए थे। ग्राहकों की कमी और मार्केट के लोगों के विरोध के कारण वे करीब तीन महीने तक बंद पड़े रहे थे।
जनता बाजार का सुझाव और उसके लाभ
प्रदेश के कई जिलों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए जनता बाजार लगाए जाते हैं। यह बाजार सप्ताह में दो बार शहर की अलग-अलग या एक स्थायी जगह पर लगता है। इसमें महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप, महिला स्वयं सहायता समूह, फड़ी वाले और छोटे व्यापारी अपना सामान बेचते हैं। दिवाली जैसे त्योहारों पर यह बाजार सात दिनों तक चलता है। इस बाजार में आमजन को अपनी हर जरूरत का सामान आसानी से मिल जाता है। मध्यम वर्ग के लिए यह व्यवस्था बेहद कामयाब साबित हुई है। इसलिए नगर परिषद प्रशासन को इस दिशा में काम करने पर विचार करना चाहिए।
विज्ञापन
पांच से जगह का इंतजार कर रहे स्ट्रीट वेंडर रोड पर खड़े, उन्हें जगह तक नहीं दे पाया प्रशासन
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद ने शहर के मुख्य टाउन पार्क और सालासर मंदिर की पार्किंग में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए साझा बाजार स्थापित किया है। इस बाजार के लिए 10 बड़े पोटा केबिन लगाए गए हैं।
इस कदम से वाहन चालकों के लिए आधी पार्किंग जगह छिन गई है। इससे आमजन को अपने वाहन सड़क पर खड़े करने पड़ेंगे, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना होगा।
विज्ञापन
यह पहल महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने और सरकार से प्रशंसा प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई है। हालांकि, इस व्यवस्था से पार्किंग की समस्या और बढ़ गई है। पांच सालों से जगह का इंतजार कर रहे स्ट्रीट वेंडर्स को अभी तक कोई स्थान नहीं मिला है।
विज्ञापन
उनकी रेहड़ियां सड़कों पर ही लगी रहती हैं जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। स्ट्रीट वेंडर्स भी बार-बार तंग होते हैं। हैरानी की बात है कि महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप को बढ़ावा देने वाले अधिकारी ही स्ट्रीट वेंडर्स योजना भी देखते हैं।
वे दोनों योजनाओं को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं अपनाते हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत दबाव पड़ने पर इन स्ट्रीट वेंडर्स को लोन दिया जाता है। हालांकि, उन्हें जगह देने की बात आने पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। इसी कारण रेहड़ी वाले जगह-जगह भटकते रहते हैं और अक्सर यातायात जाम का कारण बन जाते हैं।
उत्पादों की बिक्री और पार्किंग की चुनौती
नगर परिषद ने साझा बाजार में अचार, मुरब्बा, फिनाइल और कपड़े के बैग जैसे उत्पाद रखे हैं। इसके अतिरिक्त, लड्डू-गोपाल की पोशाक, किसानों से जुड़े सजावटी सामान और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इन उत्पादों को खरीदने के लिए लोग अपने वाहनों पर ही आएंगे। पार्किंग की जगह पर 10 पोटा केबिन होने के कारण ग्राहकों को वाहन पार्क करने में दिक्कत होगी। उन्हें अपने वाहन सड़क पर ही खड़े करने पड़ेंगे।
समूहों के लिए बारी-बारी से अवसर
नगर परिषद ने 10 पोटा केबिन में से पांच शहरी और पांच ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए निर्धारित किए हैं। किसी एक समूह को स्थायी रूप से स्टॉल नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय, समूहों को बारी-बारी से अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। पहले सप्ताह 10 समूह अपने उत्पाद बेचेंगे जिसके बाद अगले समूहों को मौका मिलेगा। इस व्यवस्था से अधिक महिलाओं को बाजार तक पहुंच बनाने और आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, नगर परिषद ने पहले भी ट्रेड टावर मार्केट में पोटा केबिन लगाए थे। ग्राहकों की कमी और मार्केट के लोगों के विरोध के कारण वे करीब तीन महीने तक बंद पड़े रहे थे।
जनता बाजार का सुझाव और उसके लाभ
प्रदेश के कई जिलों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए जनता बाजार लगाए जाते हैं। यह बाजार सप्ताह में दो बार शहर की अलग-अलग या एक स्थायी जगह पर लगता है। इसमें महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप, महिला स्वयं सहायता समूह, फड़ी वाले और छोटे व्यापारी अपना सामान बेचते हैं। दिवाली जैसे त्योहारों पर यह बाजार सात दिनों तक चलता है। इस बाजार में आमजन को अपनी हर जरूरत का सामान आसानी से मिल जाता है। मध्यम वर्ग के लिए यह व्यवस्था बेहद कामयाब साबित हुई है। इसलिए नगर परिषद प्रशासन को इस दिशा में काम करने पर विचार करना चाहिए।