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Sirsa News: घग्गर में पानी पहुंचने से किसानों को राहत, ट्यूबवेल पर निर्भरता होगी कम
Sun, 05 Jul 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 05 Jul 2026 11:40 PM IST
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गांव मत्तड़ में घग्गर में बहता पानी____संवाद
- ओटू तक पहुंचा पानी, लंबे समय से जिले के लोग कर रहे थे इंतजार
फोटो-- 20 से 24
संवाद न्यूज़ एजेंसी
सिरसा/रोड़ी। जिले में मानसून की बारिश समय पर शुरू नहीं होने से धान की खेती कर रहे किसान पिछले कई दिनों से सिंचाई के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर थे। लगातार बढ़ते तापमान और प्री मानसून की बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई थी। दूसरी ओर नहरबंदी के कारण धान लगाने में तेजी देखने को नहीं मिल रही थी। अब घग्गर में पानी आने के बाद रोडी, सिरसा, रानियां क्षेत्रों में बड़े स्तर पर धान की बिजाई शुरू हो जाएगी।
एमआईडी के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह दस बजे तक रोड़ी से सिरसा के खैरेका के डबवाली पुल तक पानी पहुंच गया था। इसके बाद शाम तक ओटू हेड तक पानी पहुंच गया। रोड़ी, बड़ागुढ़ा, रानियां और सिरसा क्षेत्र के लोग लोग डीजल और बिजली से चलने वाले ट्यूबवेलों के सहारे ही धान की रोपाई और सिंचाई कर रहे थे। लगातार ट्यूबवेल चलाने से किसानों पर बिजली और ईंधन का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा था। अब घग्गर में पानी पहुंचने से किसानों को राहत मिलेगी।
किसानों का कहना है कि समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध होना धान की खेती के लिए बेहद जरूरी है। बारिश नहीं होने से खेतों में नमी बनाए रखना चुनौती बन गया था। घग्गर में पानी आने से खेतों तक सिंचाई का विकल्प मिलेगा और जिन किसानों ने अभी तक धान की रोपाई शुरू नहीं की है वे भी तेजी से कार्य पूरा कर सकेंगे। इससे खेती का काम निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ने की संभावना है।
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किसानों ने कहा कि यदि समय पर पर्याप्त पानी मिलता रहे तो पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में घग्गर में पानी का प्रवाह किसानों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। किसानों को अब उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून भी सक्रिय होगा और अच्छी बारिश होने पर सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
फिलहाल, घग्गर में पहुंचे पानी से रोड़ी, बड़ागुढ़ा, रानियां और सिरसा क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। वहीं, धान की रोपाई और सिंचाई के कार्य में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
कोट्स
मानसून में देरी से धान की सिंचाई पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर हो गई थी। इससे बिजली और डीजल का खर्च लगातार बढ़ रहा था। घग्गर में पानी आने से बड़ी राहत मिली है। अब सिंचाई सुचारु होगी, लागत घटेगी और फसल की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद है।
-किसान बब्बू सिंह, मत्तड़।
बारिश नहीं होने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। घग्गर में पानी पहुंचने से धान की रोपाई और सिंचाई दोनों कार्यों में तेजी आएगी। यदि नियमित रूप से पर्याप्त पानी मिलता रहा तो फसल अच्छी होगी और किसानों की आर्थिक चिंता भी काफी कम होगी।
-किसान सुक्खा सिंह, मत्तड़।
घग्गर में पानी आने से क्षेत्र के किसानों को वैकल्पिक सिंचाई स्रोत मिल गया है। नहरबंदी के दौरान यह पानी बेहद उपयोगी साबित होगा। समय पर सिंचाई मिलने से पौधों का विकास बेहतर रहेगा, उत्पादन बढ़ेगा और खेती का पूरा कार्य निर्धारित समय के अनुसार पूरा किया जा सकेगा।
- किसान मनजीत सिंह, मत्तड़।
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फोटो
संवाद न्यूज़ एजेंसी
सिरसा/रोड़ी। जिले में मानसून की बारिश समय पर शुरू नहीं होने से धान की खेती कर रहे किसान पिछले कई दिनों से सिंचाई के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर थे। लगातार बढ़ते तापमान और प्री मानसून की बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई थी। दूसरी ओर नहरबंदी के कारण धान लगाने में तेजी देखने को नहीं मिल रही थी। अब घग्गर में पानी आने के बाद रोडी, सिरसा, रानियां क्षेत्रों में बड़े स्तर पर धान की बिजाई शुरू हो जाएगी।
एमआईडी के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह दस बजे तक रोड़ी से सिरसा के खैरेका के डबवाली पुल तक पानी पहुंच गया था। इसके बाद शाम तक ओटू हेड तक पानी पहुंच गया। रोड़ी, बड़ागुढ़ा, रानियां और सिरसा क्षेत्र के लोग लोग डीजल और बिजली से चलने वाले ट्यूबवेलों के सहारे ही धान की रोपाई और सिंचाई कर रहे थे। लगातार ट्यूबवेल चलाने से किसानों पर बिजली और ईंधन का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा था। अब घग्गर में पानी पहुंचने से किसानों को राहत मिलेगी।
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किसानों का कहना है कि समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध होना धान की खेती के लिए बेहद जरूरी है। बारिश नहीं होने से खेतों में नमी बनाए रखना चुनौती बन गया था। घग्गर में पानी आने से खेतों तक सिंचाई का विकल्प मिलेगा और जिन किसानों ने अभी तक धान की रोपाई शुरू नहीं की है वे भी तेजी से कार्य पूरा कर सकेंगे। इससे खेती का काम निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ने की संभावना है।
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किसानों ने कहा कि यदि समय पर पर्याप्त पानी मिलता रहे तो पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में घग्गर में पानी का प्रवाह किसानों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। किसानों को अब उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून भी सक्रिय होगा और अच्छी बारिश होने पर सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
फिलहाल, घग्गर में पहुंचे पानी से रोड़ी, बड़ागुढ़ा, रानियां और सिरसा क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। वहीं, धान की रोपाई और सिंचाई के कार्य में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
कोट्स
मानसून में देरी से धान की सिंचाई पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर हो गई थी। इससे बिजली और डीजल का खर्च लगातार बढ़ रहा था। घग्गर में पानी आने से बड़ी राहत मिली है। अब सिंचाई सुचारु होगी, लागत घटेगी और फसल की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद है।
-किसान बब्बू सिंह, मत्तड़।
बारिश नहीं होने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। घग्गर में पानी पहुंचने से धान की रोपाई और सिंचाई दोनों कार्यों में तेजी आएगी। यदि नियमित रूप से पर्याप्त पानी मिलता रहा तो फसल अच्छी होगी और किसानों की आर्थिक चिंता भी काफी कम होगी।
-किसान सुक्खा सिंह, मत्तड़।
घग्गर में पानी आने से क्षेत्र के किसानों को वैकल्पिक सिंचाई स्रोत मिल गया है। नहरबंदी के दौरान यह पानी बेहद उपयोगी साबित होगा। समय पर सिंचाई मिलने से पौधों का विकास बेहतर रहेगा, उत्पादन बढ़ेगा और खेती का पूरा कार्य निर्धारित समय के अनुसार पूरा किया जा सकेगा।
- किसान मनजीत सिंह, मत्तड़।