{"_id":"680d1ffd9c24b1e0b104035b","slug":"water-crisis-deepens-in-summer-wells-are-dry-thirst-is-being-quenched-with-salty-water-from-tube-wells-sirsa-news-c-128-1-slko1008-136932-2025-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: गर्मी में गहराया पानी का संकट... डिग्गियां सूखी, नलकूपों के खारे पानी से बूझ रही प्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: गर्मी में गहराया पानी का संकट... डिग्गियां सूखी, नलकूपों के खारे पानी से बूझ रही प्यास
Sat, 26 Apr 2025 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 26 Apr 2025 11:33 PM IST
विज्ञापन
चोपटा में जलघर की सूखी पड़ी डिग्गी । संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के पैंतालिसा इलाके के 45 गांव इन दिनों पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गर्मी की तपिश के बीच लंबे समय से चल रही नहरबंदी ने ग्रामीणों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। गांवों में जल घरों की डिग्गियां सूख चुकी हैं और घरों की नलों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा।
इस हालात में ग्रामीण नलकूपों से निकलने वाले खारे पानी को 700 से 800 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से खरीदने को मजबूर हैं। ‘हर घर नल-हर घर जल’ योजना पर तंज कसते हुए ग्रामीणों का कहना है कि हर घर में नल तो है, लेकिन पानी नहीं।
गांव गुसाईआना, कुम्हारिया, हजीरा, जसानिया, गंजा रुपाणा, गिगोरानी, खेड़ी, रामपुर बगड़िया, जोगीवाला, जमाल, ढूकड़ा, बरासरी, रायपुर समेत दर्जनों गांवों में पिछले एक महीने से जल संकट गहराया हुआ है। जल घरों में पानी नहीं होने से पेयजल सप्लाई पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने के बाद घर लौटने पर पीने का पानी भी मयस्सर नहीं होता। ग्रामीण महेंद्र सिंह, विमला देवी, महावीर, सुनीता और संतोष ने बताया कि बाहर से मंगवाया जा रहा पानी भी खारा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में पेट से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद ग्रामीण 700 से 800 रुपये तक खर्च कर टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
चोपटा क्षेत्र की टेल पर बसे गांवों तक नहर का पानी अक्सर नहीं पहुंच पाता। खेड़ी, गुसाईआना, जमाल, गुडियाखेड़ा, वरूवाली जैसे गांवों में हर साल गर्मियों में यही हाल होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बैनीवाल ने विधानसभा सत्र में पैंतालिसा क्षेत्र में पेयजल संकट का मुद्दा जोरशोर से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जल्द नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि गांवों को राहत मिल सके।
-- -- -
वरूवाली नहर में आया पानी, शेरांवाली नहर में पानी का इंतजार
हालांकि सिंचाई विभाग ने जानकारी दी है कि वरूवाली नहर में पानी छोड़ दिया गया है, जिससे माखोसरानी, लुदेसर, रायपुर, ढूकड़ा जैसे गांवों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं, शेरांवाली नहर में एक मई से पानी छोड़े जाने की उम्मीद जताई गई है।
कोट्स
लंबी नहरबंदी के कारण गांवों में बनी जल घर की डिग्गियों में पानी की कमी आई है। फिर भी गांवों में पानी की किल्लत न हो इसके लिए व्यवस्था के अनुसार सप्लाई दी गई है। अभी नहरों में पानी आ गया है और जल्दी ही पेयजल सप्लाई सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी।-- - संदीप मेहता एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग।
विज्ञापन
चोपटा। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के पैंतालिसा इलाके के 45 गांव इन दिनों पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गर्मी की तपिश के बीच लंबे समय से चल रही नहरबंदी ने ग्रामीणों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। गांवों में जल घरों की डिग्गियां सूख चुकी हैं और घरों की नलों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा।
इस हालात में ग्रामीण नलकूपों से निकलने वाले खारे पानी को 700 से 800 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से खरीदने को मजबूर हैं। ‘हर घर नल-हर घर जल’ योजना पर तंज कसते हुए ग्रामीणों का कहना है कि हर घर में नल तो है, लेकिन पानी नहीं।
विज्ञापन
गांव गुसाईआना, कुम्हारिया, हजीरा, जसानिया, गंजा रुपाणा, गिगोरानी, खेड़ी, रामपुर बगड़िया, जोगीवाला, जमाल, ढूकड़ा, बरासरी, रायपुर समेत दर्जनों गांवों में पिछले एक महीने से जल संकट गहराया हुआ है। जल घरों में पानी नहीं होने से पेयजल सप्लाई पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने के बाद घर लौटने पर पीने का पानी भी मयस्सर नहीं होता। ग्रामीण महेंद्र सिंह, विमला देवी, महावीर, सुनीता और संतोष ने बताया कि बाहर से मंगवाया जा रहा पानी भी खारा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में पेट से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद ग्रामीण 700 से 800 रुपये तक खर्च कर टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
चोपटा क्षेत्र की टेल पर बसे गांवों तक नहर का पानी अक्सर नहीं पहुंच पाता। खेड़ी, गुसाईआना, जमाल, गुडियाखेड़ा, वरूवाली जैसे गांवों में हर साल गर्मियों में यही हाल होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बैनीवाल ने विधानसभा सत्र में पैंतालिसा क्षेत्र में पेयजल संकट का मुद्दा जोरशोर से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जल्द नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि गांवों को राहत मिल सके।
वरूवाली नहर में आया पानी, शेरांवाली नहर में पानी का इंतजार
हालांकि सिंचाई विभाग ने जानकारी दी है कि वरूवाली नहर में पानी छोड़ दिया गया है, जिससे माखोसरानी, लुदेसर, रायपुर, ढूकड़ा जैसे गांवों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं, शेरांवाली नहर में एक मई से पानी छोड़े जाने की उम्मीद जताई गई है।
कोट्स
लंबी नहरबंदी के कारण गांवों में बनी जल घर की डिग्गियों में पानी की कमी आई है। फिर भी गांवों में पानी की किल्लत न हो इसके लिए व्यवस्था के अनुसार सप्लाई दी गई है। अभी नहरों में पानी आ गया है और जल्दी ही पेयजल सप्लाई सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी।

चोपटा में जलघर की सूखी पड़ी डिग्गी । संवाद