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जल संरक्षण दिवस : बचपन में झेला पानी संकट तो बना दिया टैंक, बारिश के पानी का होता है संचयन
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बरसाती पानी का भंडारण दिखाते महंत सुंदराई नाथ।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। पानी के प्रति जागरूक होना वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वर्तमान परिवेश में जल का संरक्षण नहीं किया गया तो समाज को भयंकर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। जल की उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है, और जो उपलब्ध है वह तेजी से दूषित हो रहा है। इसलिए पानी का संचयन जरूरी है। ऐसा ही एक प्रयास डेरा बाबा सरसाई नाथ प्रबंधन ने किया है। मंदिर परिसर में बारिश के पानी का संचयन किया जाता है। ये पानी ना केवल मंदिर बल्कि आसपास के लोग भी इसका प्रयोग करते हैं।
सरसाईं नाथ मंदिर में महंत सुंदराई नाथ ने करीब 13 वर्ष पूर्व बरसाती पानी को स्टोरेज करने के लिए मंदिर में ही इस प्रोजेक्ट का निर्माण करवाया। मंदिर में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से करीब सवा लाख लीटर बारिश के पानी का स्टोरेज किया जाता है। सरसाईं नाथ मंदिर में दो बड़े-बड़े कुंड बने हुए हैं, जिनमें बारिश के पानी को साफ कर स्टोरेज किया जाता है। इनमें एक कुंड 27 फीट गहरा व 11 फीट चौड़ा है तथा दूसरा कुंड 26 फीट गहरा व 23 फीट चौड़ा है। सरसाईं नाथ मंदिर के महंत सुंदराई नाथ ने बताया कि मंदिर से आसपास के दुकानदार भी पानी भरकर ले जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार भी ऐसा प्रोजेक्ट प्रदेशभर में लगाए तो करोड़ों लीटर व्यर्थ बहने वाले जल को संरक्षित किया जा सकता है, जिस कारण पानी की समस्या का समाधान होगा तथा लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
बचपन बीता राजस्थान में तो जाना पानी का महत्व
सरसाईं नाथ मंदिर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करवाने वाले महंत सुंदराई नाथ ने बताया कि उनका जन्म राजस्थान के नोहर कस्बे का है। बचपन से ही पानी की कमी का सामना किया है तथा पानी के महत्व को समझते हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांवों में पानी की कमी होने के चलते इसी प्रकार बारिश के पानी का भंडारण किया जाता था। सिरसा आने के बाद उन्होंने पानी को व्यर्थ बहने से बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू करवाया तथा आज उनके साथ आसपास के दुकानदार व मोहल्ले वाले भी मंदिर में जमा पानी को ले जाते हैं तथा अपनी प्यास बुझाते हैं। महंत सुंदराई नाथ ने कहा कि पानी मानव जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। अगर समय रहते लोगों को इसका महत्व नहीं समझ आया तो आने वाले समय में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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जानिये ... ऐसे बहता है व्यर्थ पानी, आदत सुुधरे तो बचेगा
- ब्रश करते समय नल को खुला न छोड़ें, डिब्बे में पानी भरकर उससे ब्रश करने से करीब 30 लीटर जल की बर्बादी रोकी जा सकती है।
- दाढ़ी करते समय नल को खुला न रखें। इससे करीब 10 लीटर व्यर्थ बह जाता है।
- शौचालय में फ्लश टैंक का उपयोग करने पर एक समय में करीब 13 लीटर पानी बह जाता है। इस पर भी सावधानी बरतें।
- महिलाएं कपड़े धोते समय नल को खुला ना रखें। ऐसा करने से पानी को व्यर्थ बहने से बचाया जा सकता है।
- घरों व कार्यालय में लीक पानी की टोंटी को सही करवाएं। पानी की टोंटी टपकती रहती है परंतु इस पर कोई ध्यान नहीं देता है। प्रति सेकेंड नल से टपकती बूंद से एक दिन में लगभग 17 लीटर पानी का अपव्यय होता है।
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सरसाईं नाथ मंदिर में महंत सुंदराई नाथ ने करीब 13 वर्ष पूर्व बरसाती पानी को स्टोरेज करने के लिए मंदिर में ही इस प्रोजेक्ट का निर्माण करवाया। मंदिर में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से करीब सवा लाख लीटर बारिश के पानी का स्टोरेज किया जाता है। सरसाईं नाथ मंदिर में दो बड़े-बड़े कुंड बने हुए हैं, जिनमें बारिश के पानी को साफ कर स्टोरेज किया जाता है। इनमें एक कुंड 27 फीट गहरा व 11 फीट चौड़ा है तथा दूसरा कुंड 26 फीट गहरा व 23 फीट चौड़ा है। सरसाईं नाथ मंदिर के महंत सुंदराई नाथ ने बताया कि मंदिर से आसपास के दुकानदार भी पानी भरकर ले जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार भी ऐसा प्रोजेक्ट प्रदेशभर में लगाए तो करोड़ों लीटर व्यर्थ बहने वाले जल को संरक्षित किया जा सकता है, जिस कारण पानी की समस्या का समाधान होगा तथा लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
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बचपन बीता राजस्थान में तो जाना पानी का महत्व
सरसाईं नाथ मंदिर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करवाने वाले महंत सुंदराई नाथ ने बताया कि उनका जन्म राजस्थान के नोहर कस्बे का है। बचपन से ही पानी की कमी का सामना किया है तथा पानी के महत्व को समझते हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांवों में पानी की कमी होने के चलते इसी प्रकार बारिश के पानी का भंडारण किया जाता था। सिरसा आने के बाद उन्होंने पानी को व्यर्थ बहने से बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू करवाया तथा आज उनके साथ आसपास के दुकानदार व मोहल्ले वाले भी मंदिर में जमा पानी को ले जाते हैं तथा अपनी प्यास बुझाते हैं। महंत सुंदराई नाथ ने कहा कि पानी मानव जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। अगर समय रहते लोगों को इसका महत्व नहीं समझ आया तो आने वाले समय में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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जानिये ... ऐसे बहता है व्यर्थ पानी, आदत सुुधरे तो बचेगा
- ब्रश करते समय नल को खुला न छोड़ें, डिब्बे में पानी भरकर उससे ब्रश करने से करीब 30 लीटर जल की बर्बादी रोकी जा सकती है।
- दाढ़ी करते समय नल को खुला न रखें। इससे करीब 10 लीटर व्यर्थ बह जाता है।
- शौचालय में फ्लश टैंक का उपयोग करने पर एक समय में करीब 13 लीटर पानी बह जाता है। इस पर भी सावधानी बरतें।
- महिलाएं कपड़े धोते समय नल को खुला ना रखें। ऐसा करने से पानी को व्यर्थ बहने से बचाया जा सकता है।
- घरों व कार्यालय में लीक पानी की टोंटी को सही करवाएं। पानी की टोंटी टपकती रहती है परंतु इस पर कोई ध्यान नहीं देता है। प्रति सेकेंड नल से टपकती बूंद से एक दिन में लगभग 17 लीटर पानी का अपव्यय होता है।

सरसाईं नाथ मंदिर में बरसाती पानी के लिए लगा वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट।- फोटो : Sirsa