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Sirsa News: कुत्ते, बंदर, बिल्ली के काटने से बने मरीजों के घाव धोने के लिए बना वॉशिंग वार्ड

Sun, 12 Jan 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 12 Jan 2025 01:52 AM IST
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Washing ward made for washing wounds of patients bitten by dogs, monkeys and cats
नागरिक अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बनाया जा रहा वाशिंग वार्ड।
सिरसा। जिला स्वास्थ्य विभाग ने रैबीज संक्रमण रोकने को लेकर अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। कुत्ते व अन्य जानवर के काटने के बाद उसके घाव धोने में अनियमितता देखते हुए संक्रमण का खतरा रहता था। ऐसे में जिले में 33 वॉशिंग यार्ड बनाए जाने का काम शुरू किया गया है। जिले में रोजाना 35-40 मरीज जानवरों के काटे के आते हैं।
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यह वॉशिंग यार्ड जिला अस्पतालों के साथ पीएचसी, सीएचसी में बनाए जाने हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इनको बनाने को लेकर तेजी से कार्य किया जा रहा है। अभी तक विभाग द्वारा सिरसा, डबवाली के नागरिक अस्पताल के साथ जगहों पर 15 वॉशिंग वार्ड बनने का कार्य किया जा चुका है। बची हुई सीएचसी व पीएचसी में जल्द ही कार्य पूरा कर दिया जाएगा।
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बता दें कि जिले के नागरिक अस्पताल के ट्रामा सेंटर में कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से आने वाले मरीजों के घाव धाेने के लिए यह विशेष वार्ड बनाए जा रहे हैं। इनमें घाव को धोने की अलग से व्यवस्था रहेगी। जिससे वह दूसरे मरीजों के संपर्क में नहीं आएगा। अच्छी तरह से घाव को विभिन्न दवाओं के साथ 10 मिनट तक धोया जाएगा और वेस्ट को अलग ही स्टोर पर डिस्पोज ऑफ किया जाएगा। जिससे कोई अन्य व्यक्ति इसके संपर्क में न आए। यहीं इस वार्ड की विशेषता होगी।
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चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते, बिल्ली, बंदर व अन्य जानवरों के काटे जाने से रैबीज होने का खतरा रहता है। यह बीमारी नौ प्रजातियों के जानवरों से फैल सकती है, लेकिन सबसे अधिक खतरा कुत्तों से ही होता है। क्योंकि कुत्तों के संपर्क में लोग सबसे अधिक रहते हैं। ऐसे में जिन लोगों को कुत्ते, बिल्ली, बंदर या किसी ऐसे जानवर ने काटा हो, जिससे रैबीज फैलने का खतरा होता है। ऐसे में उसके घावों की ठीक से सफाई और इलाज मिलना जरूरी है। ऐसा न करने से संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है और जान तक जा सकती है। पूर्व में नागरिक अस्पताल में आने वाले रैबीज के मरीजों के लिए घाव धोने के लिए कोई विशेष स्थान नहीं थी। इस कारण घाव को इलाज वाले स्थान पर ही धोया जाता था। जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता था। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मरीजों के लिए नागरिक अस्पताल सहित सीएचसी और पीएचसी में अलग से घाव धोने की व्यवस्था होगी।

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यहां पर बनाए जाने हैं वॉशिंग वार्ड

नागरिक अस्पताल - सिरसा और डबवाली

सीएचसी - बडागुढ़ा, चौटाला, ऐलनाबाद, कालांवाली, माधोसिंघाना, नाथूसरी चोपटा, ओढां और रानियां

पीएचसी - बणी, बनसुधार, भावदीन, दादू, दड़बाकलां, दड़बी, देसूजोधा, धोतड़, डिंग, गंगा, गोरीवाला, जगमलेरा, जमाल, जोतांवाली, कागदाना, कालूआना, केहरवाला, खारियां, मल्लेकां, पनिहारी, पन्नीवाला मोटा, रंधावा और रोड़ी।






जानवरों के काटने से घायल हुए मरीजों के प्राथमिक उपचार यानी घाव को धोने के लिए विशेष वार्ड बनाने का काम चल रहा है। जिले में 33 स्थान निर्धारित किए गए हैं। जिसमें से 15 स्थानों पर वॉशिंग वार्ड बन गए हैं और अन्य का काम चल रहा है।


-डाॅ. महेंद्र भादू, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, सिरसा।

हत्या के बाद जला रहे थे महिला की लाश

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