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Sirsa News: पराली प्रबंधन के लिए ग्रामीणों को किया जागरूक
Mon, 03 Nov 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 03 Nov 2025 11:12 PM IST
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सिरसा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीमों की ओर से प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को पराली न जलाने व प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। सोमवार को फरवाई, मल्लेकां, जीवननगर, भुर्टवाला, चिलकनी ढाब, मीरपुर, नागोकी, गदराणा, खैरेकां, मलड़ी, नटार, रानियां, बाहिया, अबूबशहर, कुमथल, माधोसिंघाना आदि विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया।
उप निदेशक डा सुखदेव सिंह कंबोज ने बताया कि गांव मिठ्ठी सुरेरां में स्कूली बच्चों ने गांव में जागरूकता रैली निकाल कर ग्रामीणों को जागरूक किया। स्कूली बच्चों व टीमों ने जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को बताया गया कि पराली जलाने की बजाय पशुचारे के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा खेतों में पराली मिलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
इसके अलावा पराली की गांठे बनाकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है। टीम ने बताया कि पराली में आग लगाने से अनेक ऐसे जीव है जो खेत से बाहर नहीं निकल पाते और आग की चपेट में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा आग लगाने से पेड़ पौधों को भी नुकसान पहुंचता है। यहीं नहीं फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति पराली में आग लगाता है। उसके पकड़े जाने पर एफआईआर व जुर्माना भी लगाया जाएगा तथा रेड एंट्री होने पर दो साल तक कोई भी विभागीय स्कीम का लाभ नहीं ले सकेगा।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीमों की ओर से प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को पराली न जलाने व प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। सोमवार को फरवाई, मल्लेकां, जीवननगर, भुर्टवाला, चिलकनी ढाब, मीरपुर, नागोकी, गदराणा, खैरेकां, मलड़ी, नटार, रानियां, बाहिया, अबूबशहर, कुमथल, माधोसिंघाना आदि विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया।
उप निदेशक डा सुखदेव सिंह कंबोज ने बताया कि गांव मिठ्ठी सुरेरां में स्कूली बच्चों ने गांव में जागरूकता रैली निकाल कर ग्रामीणों को जागरूक किया। स्कूली बच्चों व टीमों ने जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को बताया गया कि पराली जलाने की बजाय पशुचारे के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा खेतों में पराली मिलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
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इसके अलावा पराली की गांठे बनाकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है। टीम ने बताया कि पराली में आग लगाने से अनेक ऐसे जीव है जो खेत से बाहर नहीं निकल पाते और आग की चपेट में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा आग लगाने से पेड़ पौधों को भी नुकसान पहुंचता है। यहीं नहीं फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति पराली में आग लगाता है। उसके पकड़े जाने पर एफआईआर व जुर्माना भी लगाया जाएगा तथा रेड एंट्री होने पर दो साल तक कोई भी विभागीय स्कीम का लाभ नहीं ले सकेगा।
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