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ग्रामीणों ने कहा- जब राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे हैं तो स्कूल क्यों बंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 11:33 PM IST
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Villagers said - when political programs are being held then why the school is closed
बैठक में मौजूद ग्रामीण। - फोटो : Sirsa
ओढां। कोविड गाइडलाइन के तहत बंद किए गए स्कूलों को लेकर गांव नुहियांवाली के ग्रामीणों ने गांव की चौपाल में बैठक की। इस मौके पर मौजूद पूर्व डिप्टी डीईओ रामकुमार सहारण, एसएमसी कमेटी प्रधान दीवानचंद सरस्वां, रामप्रताप सरस्वां, राकेश नेहरा, हनुमान रोलण व सुरजाराम नेहरा सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सरकार द्वारा कोविड के नाम पर पिछले 2 वर्षों से स्कूल बंद कर विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे है और बाजार भी खुले हैं। लेकिन शिक्षण संस्थानों पर ही नियम क्यों थोपे जा रहे हैं। लगभग विद्यार्थियों ने वैक्सीनेशन भी करवा रखा है। मास्क व सामाजिक दूरी के साथ स्कूलों को खोला जा सकता है, लेकिन शिक्षा को लेकर सरकार की नियत में खोट नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए सभी के पास स्मार्ट फोन नहीं है। इसके अतिरिक्त जो शिक्षा स्कूलों में जाकर मिल सकती है वो ऑनलाइन नहीं। अभिभावकों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे ऑनलाइन शिक्षा से संतुष्ट नहीं है। मोबाइल में पढ़ाई के अलावा और भी विभिन्न तरह की सामग्री है। जिससे विद्यार्थियों का ध्यान शिक्षा पर कम और उक्त सामग्री पर अधिक जाता है। मात्र एक 1-2 घंटे की ऑनलाइन क्लास के लिए सभी अभिभावक स्मार्ट फोन नहीं खरीद सकते। मोबाइल पर ज्यादा सक्रिय रहने के चलते विद्यार्थियों की आंखों पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने बच्चों को कोविड के नियमों की पालना के साथ स्कूलों में भेजने के लिए तैयार हैं। विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएं नजदीक है। ऐसे में जब स्कूल ही नहीं खुलेंगे तो विद्यार्थी अपना सिलेबस कैसे पूरा कर पाएंगे। वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए ट्यूशन भी भेज दें, लेकिन सरकार ट्यूशन सेंटर भी बंद करवा रही है। ग्रामीणों व अभिभावकों ने कहा कि अगर शीघ्र ही स्कूल नहीं खोले गए तो वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर उपायुक्त कार्यालय पर पहुंच जाएंगे।
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