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Sirsa News: सुविधाओं की बाट जोह रहे गांव ताजिया खेड़ा के ग्रामीण, बोले- दवाई कै नाम पर भाई गाम मैं तो सिर की गोली भी कौनी मिलै

Sat, 21 Sep 2024 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sat, 21 Sep 2024 11:50 PM IST
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Villagers of Tajiya Kheda village, waiting for facilities, said - Brother, in the name of medicine, who can even get a bullet for the head in the village?
ताजिया खेड़ा मेंे समस्याओं पर चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। सिरसा विधानसभा हलके का गांव ताजिया खेड़ा मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु औषधालय व स्कूल अपग्रेडेशन की मांग लंबे समय से लंबित है। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर गांव में कोई डिस्पेंसरी तक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि दवाई कै नाम पर भाई गाम मैं तो सिर की गोली भी कौनी मिलै।
गांव का मुख्य पेशा खेती बाड़ी व पशुपालन है। पूरे गांव की स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर के कंधों पर है। गांव में पशुओं के लिए भी कोई चिकित्सालय नहीं बना हुआ है। स्वास्थ्य सुविधा जैसा ही हाल गांव में शिक्षा का है। गांव के बच्चों के लिए सिर्फ आठवीं कक्षा तक का स्कूल है। इसमें भी स्टाफ पूरा नहीं है। आठवीं से आगे की शिक्षा ग्रहण करने के लिए गांव के बच्चों को अन्य गांवों में जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर हम क्षेत्र के पक्ष व विपक्ष के सभी नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, सभी इन समस्याओं के निदान का वादा भी करते हैं। परंतु आज तक नेता व शासन-प्रशासन कोई भी ध्यान नहीं गया है।
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नशे की चपेट में आ रहे युवा, जमीन देने के बाद भी गांव में जलसंकट
ग्रामीण जगदीश, संतलाल, रामकुमार, प्रेम, राजाराम व सुभाष डेलू बताते हैं कि बेरोजगारी के कारण गांव के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। गांव के कुछ लोग मेडिकल नशा व गोलियां बेचते हैं। इनके खिलाफ काफी बार शिकायत दे चुके है, परंतु कोई कार्रवाई नहीं होती हैं। गांव में ग्रामीणों ने जलघर को अपने स्तर पर जमीन उपलब्ध करवाई थी, ताकि की पानी की कोई कमी न रहे। यह भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई। कुछ साल पहले ही जलघर में बना टैंक अब लीक हो चुका। गांव में पानी का संकट पहले की भांति ही बना हुआ है। गांव में गलियां तो पक्की बनी हुई पर उनमें निकासी का कोई सिस्टम नहीं है।
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राजकीय औषधालय की बाट देखते-देखते बूढ़े हो गए
ताजिया खेड़ा में सरकारी अस्पताल के नाम पर कुछ नहीं है। बुजुर्ग मोहनलाल बताते हैं कि गांव में दवाई के नाम पर सिर दर्द की दवा तक नहीं मिलती है। गांव में कोई सरकारी डॉक्टर नहीं है। गांव के अनेक लोग पशुओं का दूध बेचकर आजीविका चला रहे थे, लेकिन लंपी बीमारी के समय काफी परिवारों के आजीविका का साधन छिन गया।




मिन्नतों के बाद बनी गली, कीचड़ की समस्या ज्यों कि त्यों
ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय तक मांग के बाद गांव की मुख्य गली बनी थी, लेकिन लेवल ठीक न होने के कारण गली में कीचड़ पसरा रहता है। इससे वे काफी परेशान हैं। ठेकेदार के कारनामों को लेकर कई बार विरोध प्रर्दशन किया गया, लेकिन प्रशासन ने पेमेंट जारी कर दी।
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