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Sirsa News: गांव अलीकां में सरकारी स्कूल में ग्रामीणों ने की तालाबंदी, हेड टीचर के तबादले की मांग
Wed, 05 Aug 2026 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:49 PM IST
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सरपंच, पंचायत समिति सदस्य व अन्य मौजिज लोग प्रदर्शन करते हुए। ग्रामीण
आश्वासन के बाद खुला गेट- बच्चों की सुरक्षा के लिए जर्जर पेड़ों को हटाने की भी उठाई मांग
फोटो-- 11,12, 13
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। उपमंडल के गांव अलीकां स्थित राजकीय मिडिल स्कूल में बुधवार को हेड टीचर की कार्यशैली से नाराज स्कूल प्रबंधन समिति, ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और स्कूली बच्चे शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने हेड टीचर का तबादला करने तथा स्कूल परिसर में खड़े जर्जर सफेदे के पेड़ों को हटाने की मांग उठाई। धरने और तालाबंदी की सूचना मिलते ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डबवाली के प्राचार्य लक्ष्मण दास नाहर तथा शहर थाना प्रभारी अवतार सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं। एक घंटे तक चली वार्ता के बाद प्राचार्य ने जिला शिक्षा अधिकारी से बातचीत कर ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिए कि हेड टीचर के तबादले की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी तथा अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त कर स्कूल का गेट खोल दिया।
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गांव के सरपंच मलकीत सिंह, एसएमसी सदस्य गुरविंदर सिंह नंबरदार तथा अन्य ग्रामीणों बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ सुबह स्कूल पहुंचे। बच्चों को स्कूल के बाहर रोककर मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया और वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हेड टीचर राजेंद्र कौर का विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों के प्रति व्यवहार सहयोगात्मक नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल परिसर में कई वर्ष पुराने करीब 60 सफेदे के पेड़ दीमक लगने के कारण खोखले हो चुके हैं। पहले भी कुछ पेड़ गिर चुके हैं और एक बार एक शिक्षक भी बाल-बाल बच गए थे। कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वन विभाग कर चुका है सर्वे
ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग इन पेड़ों का सर्वे कर चुका है लेकिन अब तक इन्हें हटाया नहीं गया। उनका कहना है कि यदि पेड़ों को काटने की अनुमति मिलती है तो गांववासी स्वयं इन पेड़ों को काटकर नए पौधे लगा देंगे। वे पर्यावरण संरक्षण में योगदान देंगे। जिला वन अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कानूनी अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई संभव नहीं है।
प्राचार्य ने दिया समाधान का भरोसा
प्राचार्य लक्ष्मण दास नाहर ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी शिकायतों की जांच कर संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि हेड टीचर के तबादले सहित अन्य मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।
हेड टीचर ने आरोपों को बताया निराधार
हेड टीचर राजेंद्र कौर ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत रंजिश के चलते लगाया जा रहा है। उन्होंने कभी किसी विद्यार्थी, अभिभावक या ग्रामीण के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्जर पेड़ों को हटाने के लिए वह लगातार संबंधित विभागों को पत्र लिखती रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला वन अधिकारी से भी बातचीत हुई है लेकिन विभाग ने मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण फिलहाल पेड़ों की कटाई में असमर्थता जताई है।
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। उपमंडल के गांव अलीकां स्थित राजकीय मिडिल स्कूल में बुधवार को हेड टीचर की कार्यशैली से नाराज स्कूल प्रबंधन समिति, ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और स्कूली बच्चे शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने हेड टीचर का तबादला करने तथा स्कूल परिसर में खड़े जर्जर सफेदे के पेड़ों को हटाने की मांग उठाई। धरने और तालाबंदी की सूचना मिलते ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डबवाली के प्राचार्य लक्ष्मण दास नाहर तथा शहर थाना प्रभारी अवतार सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
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अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं। एक घंटे तक चली वार्ता के बाद प्राचार्य ने जिला शिक्षा अधिकारी से बातचीत कर ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिए कि हेड टीचर के तबादले की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी तथा अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त कर स्कूल का गेट खोल दिया।
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गांव के सरपंच मलकीत सिंह, एसएमसी सदस्य गुरविंदर सिंह नंबरदार तथा अन्य ग्रामीणों बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ सुबह स्कूल पहुंचे। बच्चों को स्कूल के बाहर रोककर मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया और वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हेड टीचर राजेंद्र कौर का विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों के प्रति व्यवहार सहयोगात्मक नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल परिसर में कई वर्ष पुराने करीब 60 सफेदे के पेड़ दीमक लगने के कारण खोखले हो चुके हैं। पहले भी कुछ पेड़ गिर चुके हैं और एक बार एक शिक्षक भी बाल-बाल बच गए थे। कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वन विभाग कर चुका है सर्वे
ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग इन पेड़ों का सर्वे कर चुका है लेकिन अब तक इन्हें हटाया नहीं गया। उनका कहना है कि यदि पेड़ों को काटने की अनुमति मिलती है तो गांववासी स्वयं इन पेड़ों को काटकर नए पौधे लगा देंगे। वे पर्यावरण संरक्षण में योगदान देंगे। जिला वन अधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कानूनी अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई संभव नहीं है।
प्राचार्य ने दिया समाधान का भरोसा
प्राचार्य लक्ष्मण दास नाहर ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी शिकायतों की जांच कर संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि हेड टीचर के तबादले सहित अन्य मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।
हेड टीचर ने आरोपों को बताया निराधार
हेड टीचर राजेंद्र कौर ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत रंजिश के चलते लगाया जा रहा है। उन्होंने कभी किसी विद्यार्थी, अभिभावक या ग्रामीण के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्जर पेड़ों को हटाने के लिए वह लगातार संबंधित विभागों को पत्र लिखती रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला वन अधिकारी से भी बातचीत हुई है लेकिन विभाग ने मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण फिलहाल पेड़ों की कटाई में असमर्थता जताई है।