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Sirsa News: रामलीला में दिखाई नशे पर आधारित लघु नाटिका
Sun, 28 Sep 2025 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 28 Sep 2025 02:51 AM IST
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ओढ़ां में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
ओढ़ां। श्री दुर्गा नाटक क्लब की ओर गांव ओढ़ां में रामलीला आयोजित की जा रही है। इसकी पांचवीं रात्रि की शुरुआत उद्यमी प्रीतम सिंह, विनोद गोदारा और समाजसेवी दर्शना महंत के पौत्र वीरू ने संयुक्त रूप से की। दीपा, हरजीत और खुशी ने नशे पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की जिस पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।
रामलीला के पहले दृश्य में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता अपनी छोटी माता कैकेयी से वन जाने की आज्ञा लेने आते हैं तब कैकेयी उनको राजसी वस्त्र उतारकर भगवा वस्त्र पहनने के लिए देती है जिसे देख राजा दशरथ बहुत दुखी होते हैं। राजा अपने खास मंत्री सौमित्र को राम-लक्ष्मण के साथ वन में भेजते हैं कि वे जाते ही उनको वापस ले आएंगे जिससे मेरा वचन भी पूरा हो जाएगा और राम को भी आज्ञा पालन का मौका मिल जाएगा।
राजा दशरथ की ओर से भेजे गए मंत्री सौमित्र ने जंगल में जाते ही भगवान राम से लौटने के लिए कहा, तो राम ने मंत्री के साथ जाने से मना कर दिया और यह बात कहकर उन्हें लौटा दिया कि अब तो वे 14 साल काटकर ही महलों में पांव रखेंगे। जब राजा दशरथ को इस बात का पता चलता है तो वह इस सदमे को सहन न कर पाने के कारण अपने प्राण त्याग देते हैं, जिससे अयोध्या में शोक छा जाता है और राजगद्दी खाली होने के बाद अपने ननिहाल गए भरत और शत्रुघ्न को बुलाया जाता है।
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रामलीला के पहले दृश्य में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता अपनी छोटी माता कैकेयी से वन जाने की आज्ञा लेने आते हैं तब कैकेयी उनको राजसी वस्त्र उतारकर भगवा वस्त्र पहनने के लिए देती है जिसे देख राजा दशरथ बहुत दुखी होते हैं। राजा अपने खास मंत्री सौमित्र को राम-लक्ष्मण के साथ वन में भेजते हैं कि वे जाते ही उनको वापस ले आएंगे जिससे मेरा वचन भी पूरा हो जाएगा और राम को भी आज्ञा पालन का मौका मिल जाएगा।
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राजा दशरथ की ओर से भेजे गए मंत्री सौमित्र ने जंगल में जाते ही भगवान राम से लौटने के लिए कहा, तो राम ने मंत्री के साथ जाने से मना कर दिया और यह बात कहकर उन्हें लौटा दिया कि अब तो वे 14 साल काटकर ही महलों में पांव रखेंगे। जब राजा दशरथ को इस बात का पता चलता है तो वह इस सदमे को सहन न कर पाने के कारण अपने प्राण त्याग देते हैं, जिससे अयोध्या में शोक छा जाता है और राजगद्दी खाली होने के बाद अपने ननिहाल गए भरत और शत्रुघ्न को बुलाया जाता है।
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