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Sirsa News: जजपा के जिला महासचिव की दुकान को बुलडोजर से ढहाया, हाईकोर्ट के आदेश पर सिरसा नगर परिषद ने की कार्रवाई
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प्रशासन की ओर से जेसीबी की मदद से गिराई गई जजपा नेता द्वारा कब्जा कर बनाई दुकान।
सिरसा। परशुराम चौक पर शुक्रवार दोपहर करीब एक घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा, जब जननायक जनता पार्टी (जजपा) के जिला महासचिव की दुकान पर बुलडोजर चला। यह कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर की गई थी। कार्रवाई के दौरान जजपा सुप्रीमो अजय सिंह चौटाला भी मौके पर पहुंचे और दुकानदार को सांत्वना दी।
दुकानदार योगेश शर्मा ने बताया कि यह जगह सरकारी थी और उन्होंने इसे 2005 में बीएंडआर से 2.83 लाख रुपये में खरीदी थी। उनका कहना था कि इसके रेवेन्यू रिकॉर्ड को जांचा जाए, क्योंकि इस पर उनकी रजिस्ट्री और इंतकाल भी उनके पिता के नाम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जगह को अब अनिल गोयल और मनमोहन गोयल को दी जा रही है, जो गलत है। योगेश शर्मा ने कहा कि अगर सरकारी जमीन को सरकार वापस लेती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह जगह गलत तरीके से अन्य लोगों को दी जा रही है।
मनमोहन गोयल ने कहा कि यह जगह 1925 में कमेटी के नक्शे के अनुसार पास हुई थी और योगेश शर्मा ने इसके आधे से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने 1991 में इस पर दावा किया था और 1998 में सेशन कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में गया और 2014 में उनके पक्ष में फैसला आया। 5 जनवरी को अदालत ने प्रशासन को जमीन खाली करवाने का आदेश दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। ड्यूटी मजिस्ट्रेट सत्यवान ढिलोड ने कहा कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की गई थी। जिला प्रशासन की ओर से कब्जा छुड़वाकर जगह खाली करवाई गई है।
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दुकानदार योगेश शर्मा ने बताया कि यह जगह सरकारी थी और उन्होंने इसे 2005 में बीएंडआर से 2.83 लाख रुपये में खरीदी थी। उनका कहना था कि इसके रेवेन्यू रिकॉर्ड को जांचा जाए, क्योंकि इस पर उनकी रजिस्ट्री और इंतकाल भी उनके पिता के नाम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जगह को अब अनिल गोयल और मनमोहन गोयल को दी जा रही है, जो गलत है। योगेश शर्मा ने कहा कि अगर सरकारी जमीन को सरकार वापस लेती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह जगह गलत तरीके से अन्य लोगों को दी जा रही है।
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मनमोहन गोयल ने कहा कि यह जगह 1925 में कमेटी के नक्शे के अनुसार पास हुई थी और योगेश शर्मा ने इसके आधे से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने 1991 में इस पर दावा किया था और 1998 में सेशन कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में गया और 2014 में उनके पक्ष में फैसला आया। 5 जनवरी को अदालत ने प्रशासन को जमीन खाली करवाने का आदेश दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। ड्यूटी मजिस्ट्रेट सत्यवान ढिलोड ने कहा कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की गई थी। जिला प्रशासन की ओर से कब्जा छुड़वाकर जगह खाली करवाई गई है।
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