{"_id":"68978ef128e820df3f06efc6","slug":"the-public-is-asking-when-will-the-government-crack-down-on-the-game-of-patient-referral-sirsa-news-c-21-1-hsr1033-684653-2025-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: जनता कर रही सवाल, मरीज रेफर के खेल पर कब नकेल कसेगी सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: जनता कर रही सवाल, मरीज रेफर के खेल पर कब नकेल कसेगी सरकार
Sat, 09 Aug 2025 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 09 Aug 2025 11:39 PM IST
विज्ञापन
डबवाली के नागरिक अस्पताल में इंतजार करते मरीज।
डबवाली। डबवाली के नागरिक अस्पताल में भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावे किए जा रहे हों लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं। 25 साल पहले बनाए गए इस 100 बेड के अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर इतना गिर चुका है कि यहां आने वाले मरीज केवल बुखार, खांसी-जुकाम की दवा पाकर लौट जाते हैं। चिकित्सकों के अभाव में गंभीर बीमारी के मरीजों के हिस्से बस रेफर करने की सुविधा आती है।
हरियाणा पंजाब के बाार्डर से सटे इस क्षेत्र के अस्पताल में दूर-दूर से रोजाना करीब 700 मरीज उपचार की उम्मीद में आते हैं लेकिन अल्ट्रासाउंड, लैब टेस्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी निजी अस्पतालों में जाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं जनता सर्जन, त्वचा रोग, नाक-कान-गला या अन्य गंभीर रोगों के विशेषज्ञों की सालों से बाट जोह रही है। सालों पहले बनी बिल्डिंग में हालात बिगड़े तो उसके नवीनीकरण, पेयजल, बरसाती पानी, सीवरेज और फायर सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए तो टेंडर जारी किया गया लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति यथावत है। शहर की आम जनता और मौजिज लोग यह सवाल कर रहे हैं कि उन्हें कब बेहतर इलाज मिलेगा और मरीजों को रेफर करने का खेल कब रुकेगा।
जरूरी लैब टेस्ट भी नहीं, मरीजों की जेब पर बोझ
अस्पताल की लैब में भी भारी कमियां हैं। कुछ सामान्य रक्त जांच तो यहां होती है लेकिन विटामिन डी3, विटामिन बी12, सोडियम-पोटेशियम, थायरॉइड, और मधुमेह के एचबीए1सी जैसे जरूरी टेस्ट यहां उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरन मरीजों को ये जांच बाहर की निजी लैब से करवानी पड़ती हैं, जहां इनकी कीमत कई गुना अधिक होती है। गर्भवती महिलाओं को भी इन जांचों का करवाना होता है लेकिन सुविधा नहीं मिलती।
विज्ञापन
महीने भर में 22,000 से 23,000 ओपीडी
इस क्षेत्र में इलाज की किस कदर दरकार है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य बीमारियों की जांच और इलाज के लिए भी रोजाना 700 के करीब ओपीडी होती हैं। महीने भर में यह आंकड़ा 22,000 से 23,000 तक जा पहुंचता है। जबकि चिकित्सकों के 42 स्वीकृत पदों पर केवल 17 चिकित्सक ही पदस्थ हैं। अगर यहां गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा मिले तो जनता को बड़ा फायदा हो सकता है। केवल रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यहां की अल्ट्रासाउंड मशीन को अंबाला भेजे जाने को लेकर जनता में भारी रोष है।
-डबवाली नागरिक अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज और अल्ट्रासांउड व लैब टेस्ट जैसी बुनयादी सुविधा भी नहीं है। मरीजों को रेफर किया जाता है और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। सरकार को चाहिए कि स्थिति में सुधार करे।
-टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन नगर परिषद डबवाली
-नागरिक अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। यहां ना तो सर्जन, ना चमड़ी रोग विशेषज्ञ, ना ईएनटी और ना ही गंभीर रोगों के स्पेशलिस्ट हैं। सरकार एक तरफ तो आमजन को भरपूर सुविधाएं देने का दम भरती है दूसरी तरफ ये हालात हैं।
-गुरदीप कामरा, पूर्व प्रधान, कच्चा आढ़तियां एसोसिएशन, डबवाली
-अस्पताल की व्यवस्था की कहानी तो पूरा शहर जानता है। यहां केवल खांसी जुकाम की दवा मिलती है। गंभीर अवस्था के मरीजों को तो केवल एक सुविधा मिलती है और वो है रेफर सुविधा। इस तस्वीर को बदलना चाहिए।
-सुमित अनेजा पार्षद
-नागरिक अस्पताल में 100 बेड की व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन यह तो देखना चाहिए था कि बिना चिकित्सकों के इलाज कैसे मिलेगा। बिना जांच के जनता को सुविधा कैसे मिलेगी।
-संजीव शाद, प्रसिद्ध रंगकर्मी व समाजसेवी
-सरकार घोषणाएं तो करती है पर उन्हें धरातल पर लागू नहीं किया जाता। नागरिक अस्पताल भी सरकार की अनदेखी का एक ताजा उदाहरण है। जहां सुविधाओं के नाम पर बस खानापूर्ति की जाती है।
-जग्गा सिंह बराड़, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
विज्ञापन
हरियाणा पंजाब के बाार्डर से सटे इस क्षेत्र के अस्पताल में दूर-दूर से रोजाना करीब 700 मरीज उपचार की उम्मीद में आते हैं लेकिन अल्ट्रासाउंड, लैब टेस्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी निजी अस्पतालों में जाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं जनता सर्जन, त्वचा रोग, नाक-कान-गला या अन्य गंभीर रोगों के विशेषज्ञों की सालों से बाट जोह रही है। सालों पहले बनी बिल्डिंग में हालात बिगड़े तो उसके नवीनीकरण, पेयजल, बरसाती पानी, सीवरेज और फायर सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए तो टेंडर जारी किया गया लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति यथावत है। शहर की आम जनता और मौजिज लोग यह सवाल कर रहे हैं कि उन्हें कब बेहतर इलाज मिलेगा और मरीजों को रेफर करने का खेल कब रुकेगा।
विज्ञापन
जरूरी लैब टेस्ट भी नहीं, मरीजों की जेब पर बोझ
अस्पताल की लैब में भी भारी कमियां हैं। कुछ सामान्य रक्त जांच तो यहां होती है लेकिन विटामिन डी3, विटामिन बी12, सोडियम-पोटेशियम, थायरॉइड, और मधुमेह के एचबीए1सी जैसे जरूरी टेस्ट यहां उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरन मरीजों को ये जांच बाहर की निजी लैब से करवानी पड़ती हैं, जहां इनकी कीमत कई गुना अधिक होती है। गर्भवती महिलाओं को भी इन जांचों का करवाना होता है लेकिन सुविधा नहीं मिलती।
विज्ञापन
महीने भर में 22,000 से 23,000 ओपीडी
इस क्षेत्र में इलाज की किस कदर दरकार है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य बीमारियों की जांच और इलाज के लिए भी रोजाना 700 के करीब ओपीडी होती हैं। महीने भर में यह आंकड़ा 22,000 से 23,000 तक जा पहुंचता है। जबकि चिकित्सकों के 42 स्वीकृत पदों पर केवल 17 चिकित्सक ही पदस्थ हैं। अगर यहां गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा मिले तो जनता को बड़ा फायदा हो सकता है। केवल रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यहां की अल्ट्रासाउंड मशीन को अंबाला भेजे जाने को लेकर जनता में भारी रोष है।
-डबवाली नागरिक अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज और अल्ट्रासांउड व लैब टेस्ट जैसी बुनयादी सुविधा भी नहीं है। मरीजों को रेफर किया जाता है और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। सरकार को चाहिए कि स्थिति में सुधार करे।
-टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन नगर परिषद डबवाली
-नागरिक अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। यहां ना तो सर्जन, ना चमड़ी रोग विशेषज्ञ, ना ईएनटी और ना ही गंभीर रोगों के स्पेशलिस्ट हैं। सरकार एक तरफ तो आमजन को भरपूर सुविधाएं देने का दम भरती है दूसरी तरफ ये हालात हैं।
-गुरदीप कामरा, पूर्व प्रधान, कच्चा आढ़तियां एसोसिएशन, डबवाली
-अस्पताल की व्यवस्था की कहानी तो पूरा शहर जानता है। यहां केवल खांसी जुकाम की दवा मिलती है। गंभीर अवस्था के मरीजों को तो केवल एक सुविधा मिलती है और वो है रेफर सुविधा। इस तस्वीर को बदलना चाहिए।
-सुमित अनेजा पार्षद
-नागरिक अस्पताल में 100 बेड की व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन यह तो देखना चाहिए था कि बिना चिकित्सकों के इलाज कैसे मिलेगा। बिना जांच के जनता को सुविधा कैसे मिलेगी।
-संजीव शाद, प्रसिद्ध रंगकर्मी व समाजसेवी
-सरकार घोषणाएं तो करती है पर उन्हें धरातल पर लागू नहीं किया जाता। नागरिक अस्पताल भी सरकार की अनदेखी का एक ताजा उदाहरण है। जहां सुविधाओं के नाम पर बस खानापूर्ति की जाती है।
-जग्गा सिंह बराड़, वरिष्ठ कांग्रेस नेता