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Sirsa News: शहर के बाजाराें में एकमात्र महिला शौचालय बदहाल
Sun, 27 Oct 2024 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 27 Oct 2024 02:39 AM IST
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सिरसा में शौचालय के आगे रस्सी बांधकर सुखाने के लिए रखे गए कपड़े।
सिरसा। त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारों की चहल-पहल दोगुनी हो गई है। शनिवार को बाजारों में दिवाली की खरीदारी के लिए हजारों महिलाएं आईं। बाजार आने वाली महिलाओं को कई परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है, सबसे पड़ी परेशानी सार्वजनिक शौचालय की है।
शहर के पांच बाजारों के आसपास बना एकमात्र महिला शौचालय मोहता मार्केट में है। यहां पर इतने बदतर हालत हैं, कि महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। सफाई के अभाव में यहां पर हमेशा दुर्गंध बनी रहती है। लोग अपने वाहन भी इसके बाहर खड़े कर देते हैं। भले ही नगर परिषद शहर के बाजारों में स्वच्छता और महिलाओं के लिए व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
शहर में पांच मुख्य बाजार हैं। जिसमें मीना बाजार, पालिका बाजार, रोड़ी बाजार, सूरतगढ़िया बाजार व सदर बाजार आते हैं। इन पांचों बाजारों में शौचालय नहीं हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वच्छता मिशन के तहत लोगों को खुले में शौच न करने के लिए जागरूक किया जाता है, लेकिन शहर के बाजारों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। एकमात्र शौचालय जो बना है वो भी मोहता मार्केट में है। सफाई न होने से इसमें भी हमेशा गंदगी फैली रहती है। इसमें पानी का भी प्रबंध नहीं है। विडंबना की बात यह है कि मोहता मार्केट में ही नगर परिषद का कार्यालय बना हुआ है। जो कि इस शौचालय की दीवार से सटा है। उसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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बाजार में यह शौचालय सिर्फ नाम का शौचालय बनकर रह गया है, यह भी किसी काम का नहीं हैं। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। देखरेख न होने के कारण बुरा हाल है। पुरुषों का शौचालय भी इसके साथ बना दिया गया है, जिसके कारण महिलाएं उसमें जाने से शर्म महसूस करतीं हैं। -ममता बंसल, दुकानदार।
दिवाली पर्व पर बाजार में खरीदारी करने के लिए आए थे। यहां महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। एक शौचालय जो बना है वह भी बुरे हाल में है। सफाई न होने से यहां गंदगी और दुर्गंध फैली हुई है। पास में बैठे रंगाई वाले शौचालय के आगे कपड़े तक सुखाने के लिए डाल देते हैं, जिससे इसका पता ही नहीं चलता। - मनप्रीत कौर, खरीदार।
सामान की खरीदारी के लिए बाजार में आए हैं। बाजार में बने इस एकमात्र शौचालय की हालत काफी बदतर है। संबंधित विभाग और कर्मचारियों को व्यवस्था बनानी चाहिए। इसमें सीट तक टूटी पड़ी है। टंकी में पानी तक नहीं है। शौचालय के नाम पर नगर परिषद के पास करोड़ों रुपये आता है, लेकिन इससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। - अर्शदीप कौर।
बाजारों में रोजाना खरीदारी करने के लिए हजारों ग्राहक आते हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा होती है लेकिन उनके लिए बाजार में सबसे जरूरी शौचालय तक की सुविधा नहीं है। एकमात्र शौचालय जो है वह भी काफी बदतर हालत में है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। नगर परिषद को चाहिए कि बाजारों में अन्य शौचालयों का निर्माण करवाए। - योगेश गोयल, दुकानदार।
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शहर के पांच बाजारों के आसपास बना एकमात्र महिला शौचालय मोहता मार्केट में है। यहां पर इतने बदतर हालत हैं, कि महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। सफाई के अभाव में यहां पर हमेशा दुर्गंध बनी रहती है। लोग अपने वाहन भी इसके बाहर खड़े कर देते हैं। भले ही नगर परिषद शहर के बाजारों में स्वच्छता और महिलाओं के लिए व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
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शहर में पांच मुख्य बाजार हैं। जिसमें मीना बाजार, पालिका बाजार, रोड़ी बाजार, सूरतगढ़िया बाजार व सदर बाजार आते हैं। इन पांचों बाजारों में शौचालय नहीं हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वच्छता मिशन के तहत लोगों को खुले में शौच न करने के लिए जागरूक किया जाता है, लेकिन शहर के बाजारों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। एकमात्र शौचालय जो बना है वो भी मोहता मार्केट में है। सफाई न होने से इसमें भी हमेशा गंदगी फैली रहती है। इसमें पानी का भी प्रबंध नहीं है। विडंबना की बात यह है कि मोहता मार्केट में ही नगर परिषद का कार्यालय बना हुआ है। जो कि इस शौचालय की दीवार से सटा है। उसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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बाजार में यह शौचालय सिर्फ नाम का शौचालय बनकर रह गया है, यह भी किसी काम का नहीं हैं। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। देखरेख न होने के कारण बुरा हाल है। पुरुषों का शौचालय भी इसके साथ बना दिया गया है, जिसके कारण महिलाएं उसमें जाने से शर्म महसूस करतीं हैं। -ममता बंसल, दुकानदार।
दिवाली पर्व पर बाजार में खरीदारी करने के लिए आए थे। यहां महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। एक शौचालय जो बना है वह भी बुरे हाल में है। सफाई न होने से यहां गंदगी और दुर्गंध फैली हुई है। पास में बैठे रंगाई वाले शौचालय के आगे कपड़े तक सुखाने के लिए डाल देते हैं, जिससे इसका पता ही नहीं चलता। - मनप्रीत कौर, खरीदार।
सामान की खरीदारी के लिए बाजार में आए हैं। बाजार में बने इस एकमात्र शौचालय की हालत काफी बदतर है। संबंधित विभाग और कर्मचारियों को व्यवस्था बनानी चाहिए। इसमें सीट तक टूटी पड़ी है। टंकी में पानी तक नहीं है। शौचालय के नाम पर नगर परिषद के पास करोड़ों रुपये आता है, लेकिन इससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। - अर्शदीप कौर।
बाजारों में रोजाना खरीदारी करने के लिए हजारों ग्राहक आते हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा होती है लेकिन उनके लिए बाजार में सबसे जरूरी शौचालय तक की सुविधा नहीं है। एकमात्र शौचालय जो है वह भी काफी बदतर हालत में है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। नगर परिषद को चाहिए कि बाजारों में अन्य शौचालयों का निर्माण करवाए। - योगेश गोयल, दुकानदार।