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Sirsa News: सीडीएलयू में इनफाॅर्मेशन सेंटर का नाम बदला
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अशोक सिंघल
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय स्थित इनफाॅर्मेशन सेंटर एंड गाइडेंस ब्यूरो भवन का नामकरण राष्ट्रवादी विचारक, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल के नाम पर करने की घोषणा की गई है। उक्त निर्णय कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई की ओर से लिया गया है।
कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने कहा कि अशोक सिंघल, एक ऐसी महान विभूति, जिनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके विचारों को विद्यार्थियों में समायोजित करने के लिए कुलपति ने उक्त निर्णय लिया। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि अशोक सिंघल एक प्रखर चिंतक, असाधारण संगठक और ओजस्वी वक्ता थे।
उनका जन्म 27 सितंबर 1926 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के उपरांत उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में जीवन का प्रारंभ किया और तत्पश्चात विश्व हिंदू परिषद जैसे बड़े संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए भारत की सांस्कृतिक पहचान को फिर से जागृत करने में अद्वितीय योगदान दिया।
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सिंघल राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख शिल्पकारों में से एक रहे और उन्होंने सदैव भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए अहिंसात्मक और लोकतांत्रिक माध्यमों से संघर्ष किया। वे केवल एक संगठनकर्ता नहीं थे, बल्कि विचारों के धनी और चरित्र से दृढ़ व्यक्तित्व थे, जिनका लक्ष्य भारत को आत्मगौरव, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की ओर ले जाना था।
कुलपति ने कहा कि अशोक सिंघल जैसे महान विचारक का नाम हमारे भवन से जुड़ना न केवल हमारे लिए गर्व की बात है, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों को देश सेवा, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों की ओर उन्मुख करेगा। उन्होंने कहा कि यह भवन अब अशोक सिंघल भवन के नाम से जाना जाएगा।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री पाना नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ सार्थक करना भी है। अशोक सिंघल भवन का नामकरण विश्वविद्यालय की उस भावना को दर्शाता है जो भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय को बढ़ावा देती है। यह भवन विचारों, संवादों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम भी बनेगा।
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कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने कहा कि अशोक सिंघल, एक ऐसी महान विभूति, जिनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके विचारों को विद्यार्थियों में समायोजित करने के लिए कुलपति ने उक्त निर्णय लिया। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि अशोक सिंघल एक प्रखर चिंतक, असाधारण संगठक और ओजस्वी वक्ता थे।
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उनका जन्म 27 सितंबर 1926 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के उपरांत उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में जीवन का प्रारंभ किया और तत्पश्चात विश्व हिंदू परिषद जैसे बड़े संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए भारत की सांस्कृतिक पहचान को फिर से जागृत करने में अद्वितीय योगदान दिया।
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सिंघल राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख शिल्पकारों में से एक रहे और उन्होंने सदैव भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए अहिंसात्मक और लोकतांत्रिक माध्यमों से संघर्ष किया। वे केवल एक संगठनकर्ता नहीं थे, बल्कि विचारों के धनी और चरित्र से दृढ़ व्यक्तित्व थे, जिनका लक्ष्य भारत को आत्मगौरव, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की ओर ले जाना था।
कुलपति ने कहा कि अशोक सिंघल जैसे महान विचारक का नाम हमारे भवन से जुड़ना न केवल हमारे लिए गर्व की बात है, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों को देश सेवा, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों की ओर उन्मुख करेगा। उन्होंने कहा कि यह भवन अब अशोक सिंघल भवन के नाम से जाना जाएगा।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री पाना नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ सार्थक करना भी है। अशोक सिंघल भवन का नामकरण विश्वविद्यालय की उस भावना को दर्शाता है जो भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय को बढ़ावा देती है। यह भवन विचारों, संवादों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम भी बनेगा।