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Sirsa News: आस्था के आंगन में जला दीप अब फैला रहा शिक्षा का प्रकाश
Mon, 12 May 2025 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 12 May 2025 12:22 AM IST
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बच्चों को पढ़ाते हुए मास्टर कृष्ण कायत । संवाद
मनोज सिरसवाल
डबवाली। कभी बाबा रामदेव मंदिर में शुरू हुआ छोटा सा प्रयास अब शिक्षा का प्रकाश फैला रहा है। अभावग्रस्त और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने का सपना लेकर शुरू हुआ यह सफर अब डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर का रूप ले चुका है। बड़ी बात यह कि इन संस्थानों में पढ़कर दस से अधिक युवा सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं।
डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी की नींव वर्ष 2017 में बाबा रामदेव मंदिर के एक छोटे से कमरे में रखी गई थी। संचालक कृष्ण कायत ने जब देखा कि आसपास के वंचित बच्चों में प्रतिभा तो है पर उचित मार्गदर्शन नहीं है तो उन्होंने स्वयं निशुल्क कोचिंग देने का बीड़ा उठाया। बच्चों की सुविधा को देखते हुए सुबह और शाम दोनों समय कक्षाएं चलाई जाने लगीं। धीरे-धीरे यह स्थान कोचिंग सेंटर के साथ एक प्रेरक शिक्षा केंद्र बन गया।
कोविड काल के कठिन दौर में भी यह प्रयास रुका नहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई जारी रही। इसका परिणाम यह रहा कि यहां से पढ़े 10 से अधिक युवा आज विभिन्न सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। कोचिंग लेने वाले सफल बच्चों और पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रयासों ने इस लाइब्रेरी को एक जीवंत शिक्षा केंद्र में बदल दिया।
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कृष्ण कायत ने बताया कि कि शुरुआत में नजदीकी मोहल्लों के दस-बारह बच्चे ऐसे निकल कर आए, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। वह रोजगार की तलाश कर रहे थे। उन बच्चों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के फार्म भरवाए गए। समुदाय के सहयोग से बाबा रामदेव मंदिर के एक कमरे में बोर्ड लगाकर उन्होंने स्वयं निःशुल्क कोचिंग दी। कक्षाएं सुबह पांच बजे लगती थीं। कुछ विद्यार्थियों ने अनुरोध किया कि वे शाम के समय भी कक्षाएं लगाना चाहते हैं, ताकि अच्छी तैयारी हो सके। इसके बाद शाम को भी कक्षाएं लगानी शुरू हो गईं। संवाद
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अध्यापकों ने बढ़ाया मदद का हाथ, बनी प्रेरणा की मिसाल
छुट्टी के दिनों में अलग-अलग विषयों के अनुभवी शिक्षक स्वयं समय निकालकर यहां पढ़ाने आने लगे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें जुटाई गईं और मंदिर के एक कोने से शुरू हुई लाइब्रेरी अब एक कमरे में तब्दील हो गई। मास्टर भीम राय जैसे शिक्षक जुड़े तो दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग बैच शुरू हो गए। बाद में बीए के छात्रों ने भी यहां पढ़ने की इच्छा जताई। शाम के समय यह मंदिर कम कोचिंग सेंटर ज्यादा लगता था, क्योंकि मंदिर के दो कमरों में व बरामदे में कक्षाएं लगती थीं और एक कमरे में पुस्तकालय था।
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लाइब्रेरी आपके द्वार बना अनूठा प्रयोग
शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लाइब्रेरी आपके द्वार अभियान की शुरुआत की गई। कबाड़ से एक साइकिल रिक्शा खरीदकर उसे मिनी लाइब्रेरी में बदला गया। रविवार को कोचिंग सेंटर की टीम वंचित मोहल्लों में जाकर घर-घर किताबें पहुंचाने लगी। महिलाओं और गृहिणियों तक यह अभियान पहुंचा और उन्होंने भी पुस्तकें पढ़ना शुरू कर दिया।
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दो विद्यार्थियों का चयन केंद्रीय विद्यालय में हुआ तो लोगों का भरोसा बढ़ा
कृष्ण कायत बताते हैं कि शुरुआती दौर में छात्रों की संख्या कम और सहयोग सीमित था, जिससे हताशा भी हुई। लेकिन जैसे ही जरूरतमंद परिवार के दो विद्यार्थियों का चयन केंद्रीय विद्यालय में हुआ, लोगों का भरोसा बढ़ा और कोचिंग सेंटर को नई ऊर्जा मिल गई। तब से यह कारवां थमा नहीं है। आज भी यह सेंटर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी करवा रहा है। हर प्रकार की पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। वंचित समाज के बच्चों को भविष्य के सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा यह स्थान निरंतर दे रहा है।
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डबवाली। कभी बाबा रामदेव मंदिर में शुरू हुआ छोटा सा प्रयास अब शिक्षा का प्रकाश फैला रहा है। अभावग्रस्त और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने का सपना लेकर शुरू हुआ यह सफर अब डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर का रूप ले चुका है। बड़ी बात यह कि इन संस्थानों में पढ़कर दस से अधिक युवा सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं।
डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी की नींव वर्ष 2017 में बाबा रामदेव मंदिर के एक छोटे से कमरे में रखी गई थी। संचालक कृष्ण कायत ने जब देखा कि आसपास के वंचित बच्चों में प्रतिभा तो है पर उचित मार्गदर्शन नहीं है तो उन्होंने स्वयं निशुल्क कोचिंग देने का बीड़ा उठाया। बच्चों की सुविधा को देखते हुए सुबह और शाम दोनों समय कक्षाएं चलाई जाने लगीं। धीरे-धीरे यह स्थान कोचिंग सेंटर के साथ एक प्रेरक शिक्षा केंद्र बन गया।
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कोविड काल के कठिन दौर में भी यह प्रयास रुका नहीं। सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई जारी रही। इसका परिणाम यह रहा कि यहां से पढ़े 10 से अधिक युवा आज विभिन्न सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। कोचिंग लेने वाले सफल बच्चों और पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रयासों ने इस लाइब्रेरी को एक जीवंत शिक्षा केंद्र में बदल दिया।
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कृष्ण कायत ने बताया कि कि शुरुआत में नजदीकी मोहल्लों के दस-बारह बच्चे ऐसे निकल कर आए, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। वह रोजगार की तलाश कर रहे थे। उन बच्चों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के फार्म भरवाए गए। समुदाय के सहयोग से बाबा रामदेव मंदिर के एक कमरे में बोर्ड लगाकर उन्होंने स्वयं निःशुल्क कोचिंग दी। कक्षाएं सुबह पांच बजे लगती थीं। कुछ विद्यार्थियों ने अनुरोध किया कि वे शाम के समय भी कक्षाएं लगाना चाहते हैं, ताकि अच्छी तैयारी हो सके। इसके बाद शाम को भी कक्षाएं लगानी शुरू हो गईं। संवाद
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अध्यापकों ने बढ़ाया मदद का हाथ, बनी प्रेरणा की मिसाल
छुट्टी के दिनों में अलग-अलग विषयों के अनुभवी शिक्षक स्वयं समय निकालकर यहां पढ़ाने आने लगे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें जुटाई गईं और मंदिर के एक कोने से शुरू हुई लाइब्रेरी अब एक कमरे में तब्दील हो गई। मास्टर भीम राय जैसे शिक्षक जुड़े तो दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग बैच शुरू हो गए। बाद में बीए के छात्रों ने भी यहां पढ़ने की इच्छा जताई। शाम के समय यह मंदिर कम कोचिंग सेंटर ज्यादा लगता था, क्योंकि मंदिर के दो कमरों में व बरामदे में कक्षाएं लगती थीं और एक कमरे में पुस्तकालय था।
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लाइब्रेरी आपके द्वार बना अनूठा प्रयोग
शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लाइब्रेरी आपके द्वार अभियान की शुरुआत की गई। कबाड़ से एक साइकिल रिक्शा खरीदकर उसे मिनी लाइब्रेरी में बदला गया। रविवार को कोचिंग सेंटर की टीम वंचित मोहल्लों में जाकर घर-घर किताबें पहुंचाने लगी। महिलाओं और गृहिणियों तक यह अभियान पहुंचा और उन्होंने भी पुस्तकें पढ़ना शुरू कर दिया।
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दो विद्यार्थियों का चयन केंद्रीय विद्यालय में हुआ तो लोगों का भरोसा बढ़ा
कृष्ण कायत बताते हैं कि शुरुआती दौर में छात्रों की संख्या कम और सहयोग सीमित था, जिससे हताशा भी हुई। लेकिन जैसे ही जरूरतमंद परिवार के दो विद्यार्थियों का चयन केंद्रीय विद्यालय में हुआ, लोगों का भरोसा बढ़ा और कोचिंग सेंटर को नई ऊर्जा मिल गई। तब से यह कारवां थमा नहीं है। आज भी यह सेंटर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी करवा रहा है। हर प्रकार की पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। वंचित समाज के बच्चों को भविष्य के सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा यह स्थान निरंतर दे रहा है।