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Sirsa News: जय श्री कृष्णा, राधे-राधे के जयकारों से गूंजा शहर
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कालांवाली। शहर कालांवाली में कलश यात्रा के दौरान हाथों में झंडे लिए हुए श्रद्धालु। संवाद
कालांवाली। दादू रोड पर स्थित गीता भवन मंदिर में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथा से पूर्व शहर कालांवाली में गीता भवन मंदिर कमेटी एवं महिला मंडल की ओर से स्वामी सुरेश मुनि के सानिध्य में शहर में कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा भवन से शुरू होकर दादू रोड, अनाज मंडी, पंजाब बस स्टैंड व रेलवे रोड से होती वापस मंदिर में पहुंची।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु हाथ में ध्वजारोहण व सिर पर कलश लेकर जय श्री कृष्णा, राधे-राधे आदि कई जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। जनता बैंड की ओर से दिखाए गए करतब मुख्य आर्कषण का केंद्र रहे। गीता भवन मंदिर में 9 से 16 सितंबर तक रोजाना दोपहर 3 से 5 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक कथा होगी। अंतिम दिन 16 सितंबर को हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर चेयरमैन विरेंद्र बांसल, प्रधान कृष्ण बांसल, उप-प्रधान सुखराम फत्तेवाला, आरके मजीठिया, जीवन रघुआना व अन्य मौजूद रहे।
कथावाचक अश्विनी शास्त्री ने की कथा
कथा के पहले दिन कथावाचक अश्विनी शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महात्म्य और भागवत उत्पत्ति पर विख्यान करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत महात्म्य श्रीमद्भागवत पुराण के महत्व को बताने वाली कथा है, जबकि भागवत उत्पत्ति श्रीमद्भागवत पुराण की उत्पत्ति और उसके प्रसार की प्रक्रिया को दर्शाती है। इसके अनुसार ब्रह्माजी ने इसे नारद को सुनाया और फिर नारद ने वेदव्यास को और उन्होंने इसे राजा परीक्षित को सुनाया। यह सब भागवत उत्पत्ति का अंश है, जो इस ग्रंथ के दिव्य ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति का भी वर्णन करता है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा को सुनने से व्यक्ति को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे वह जीवन के हर प्रकार के दुखों से मुक्त हो जाता है।
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यात्रा के दौरान श्रद्धालु हाथ में ध्वजारोहण व सिर पर कलश लेकर जय श्री कृष्णा, राधे-राधे आदि कई जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। जनता बैंड की ओर से दिखाए गए करतब मुख्य आर्कषण का केंद्र रहे। गीता भवन मंदिर में 9 से 16 सितंबर तक रोजाना दोपहर 3 से 5 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक कथा होगी। अंतिम दिन 16 सितंबर को हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर चेयरमैन विरेंद्र बांसल, प्रधान कृष्ण बांसल, उप-प्रधान सुखराम फत्तेवाला, आरके मजीठिया, जीवन रघुआना व अन्य मौजूद रहे।
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कथावाचक अश्विनी शास्त्री ने की कथा
कथा के पहले दिन कथावाचक अश्विनी शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महात्म्य और भागवत उत्पत्ति पर विख्यान करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत महात्म्य श्रीमद्भागवत पुराण के महत्व को बताने वाली कथा है, जबकि भागवत उत्पत्ति श्रीमद्भागवत पुराण की उत्पत्ति और उसके प्रसार की प्रक्रिया को दर्शाती है। इसके अनुसार ब्रह्माजी ने इसे नारद को सुनाया और फिर नारद ने वेदव्यास को और उन्होंने इसे राजा परीक्षित को सुनाया। यह सब भागवत उत्पत्ति का अंश है, जो इस ग्रंथ के दिव्य ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति का भी वर्णन करता है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा को सुनने से व्यक्ति को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे वह जीवन के हर प्रकार के दुखों से मुक्त हो जाता है।
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