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Sirsa News: फर्जी सरकारी कार्यालय खोलने का आरोपी पुलिस के समक्ष नहीं हुआ पेश
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सिरसा। हिसार रोड पर भारत सरकार की ओर से पंजीकृत बताकर खोले गए फर्जी कार्यालय के मामले में पुलिस ने जांच को आगे बढ़ा दिया है। जांच में पता चला है कि आरोपी कार्यालय प्रमुख गांव राजपुरा, हिसार निवासी राममेहर ने कार्यालय के नाम से पंचकूला के आईसीआईसीआई बैंक में ज्वाइंट खाता खुलवाया हुआ है और ईमेल आईडी भी बनाई हुई है। आरोपी राममेहर पुलिस के अभी तक सामने पेश नहीं हुआ है।
अब पुलिस बैंक खाते और ई-मेल की जांच करेगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि आरोपी राममेहर ने कितना लेनदेन हुआ है। सिविल लाइन पुलिस के मुताबिक इस मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस का सहयोग भी लिया जाएगा। पुलिस के मुताबिक बोलेरो गाड़ी पर जो नीली बत्ती लगाई हुई थी, वह राममेहर ने कहां से खरीदी और इसकी अनुमति कहां से ली, इसकी भी जांच की जा रही है।
पक्की नौकरी के नाम पर महिला स्टाफ से लिए डेढ़ लाख रुपये
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि राममेहर ने कार्यालय में जो स्टाफ रखा हुआ था, उनसे भी एक से डेढ़ लाख रुपये लिए हुए थे। महिला स्टाफ को पहले इंटरव्यू के बहाने बुलाया गया और बाद में पक्की नौकरी देने के बहाने प्रत्येक से डेढ़ लाख रुपये की डिमांड की गई। पक्की नौकरी के लालच में करीब सात महिलाओं ने आरोपी राममेहर को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दे दिए। इसके बाद उक्त महिलाएं नियमित रूप से काम पर आने लगीं।
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गेट पर चस्पा किया हुआ था नोटिस
राममेहर ने कार्यालय के गेट पर नोटिस भी चस्पा किया हुआ था, जिसमें लिखा था कि मुख्यालय की ओर से फैसला है कि कोई कर्मचारी ड्यूटी से 10 मिनट लेट आता है तो उस दिन अवकाश माना जाएगा। उसका वेतन काट लिया जाएगा। उक्त फर्जी कार्यालय हिसार रोड पर तीन मंजिला बिल्डिंग के ऊपर बना हुआ है। पुलिस की जांच में ये फर्जी पाया गया। मौके पर आरोपी राममेहर नहीं मिला। यहां के केवल महिला स्टाफ मिली। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि कार्यालय में आने वाले लोगों से सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरवाने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। वहीं, समाज कल्याण विभाग का कहना है कि उक्त कार्यालय का उनके विभाग से कोई संबंध नहीं है।
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अब पुलिस बैंक खाते और ई-मेल की जांच करेगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि आरोपी राममेहर ने कितना लेनदेन हुआ है। सिविल लाइन पुलिस के मुताबिक इस मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस का सहयोग भी लिया जाएगा। पुलिस के मुताबिक बोलेरो गाड़ी पर जो नीली बत्ती लगाई हुई थी, वह राममेहर ने कहां से खरीदी और इसकी अनुमति कहां से ली, इसकी भी जांच की जा रही है।
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पक्की नौकरी के नाम पर महिला स्टाफ से लिए डेढ़ लाख रुपये
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि राममेहर ने कार्यालय में जो स्टाफ रखा हुआ था, उनसे भी एक से डेढ़ लाख रुपये लिए हुए थे। महिला स्टाफ को पहले इंटरव्यू के बहाने बुलाया गया और बाद में पक्की नौकरी देने के बहाने प्रत्येक से डेढ़ लाख रुपये की डिमांड की गई। पक्की नौकरी के लालच में करीब सात महिलाओं ने आरोपी राममेहर को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दे दिए। इसके बाद उक्त महिलाएं नियमित रूप से काम पर आने लगीं।
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गेट पर चस्पा किया हुआ था नोटिस
राममेहर ने कार्यालय के गेट पर नोटिस भी चस्पा किया हुआ था, जिसमें लिखा था कि मुख्यालय की ओर से फैसला है कि कोई कर्मचारी ड्यूटी से 10 मिनट लेट आता है तो उस दिन अवकाश माना जाएगा। उसका वेतन काट लिया जाएगा। उक्त फर्जी कार्यालय हिसार रोड पर तीन मंजिला बिल्डिंग के ऊपर बना हुआ है। पुलिस की जांच में ये फर्जी पाया गया। मौके पर आरोपी राममेहर नहीं मिला। यहां के केवल महिला स्टाफ मिली। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि कार्यालय में आने वाले लोगों से सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरवाने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। वहीं, समाज कल्याण विभाग का कहना है कि उक्त कार्यालय का उनके विभाग से कोई संबंध नहीं है।