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दस साल पहले दिए निशुल्क कनेक्शन, अब आ रहे हैं बिल
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:29 AM IST
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सिरसा। दस वर्ष पूर्व शुरू की गई इंदिरा गांधी पेयजल योजना दलित परिवारों के गले की फांस बन गई है। सरकार ने वर्ष 2006 में यह योजना शुरू की थी, जिसके तहत अनुसूचित जाति व जनजाति के परिवारों को निशुल्क कनेक्शन दिए गए थे। अब सरकार ने इन कनेक्शनधारियों को बीते वर्षों का बिल थमाना शुरू कर दिया है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा भेजे जा रहे हजारों रुपये के बिल की वजह से दलित परिवार सकते में है। उन्हें कुछ सुझायी नहीं पड़ रहा।
विभाग द्वारा इन दिनों पेयजल के बिल भेजे जा रहे है। इसमें दलित परिवारों को भी बिल थमाए गए है। इन बिल पर बीते वर्षों के बकाये का हवाला देते हुए हजारों रुपये जमा करवाने की हिदायत दी गई है। बिल अदायगी न करने पर पानी का कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई है। योजना के तहत एक घर में दो-दो-तीन-तीन कनेक्शन दर्शा दिए गए, जबकि जलापूर्ति एक ही कनेक्शन से हो रही है। विभाग ने तीन कनेक्शन के बिल थमा दिए है। इसी प्रकार दलित परिवारों के जो उपभोक्ता पहले से ही कनेक्शनधारी थे और नियमित रूप से अपने बिल की अदायगी कर रहे है, विभाग ने उन्हें भी इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत बकाये के बिल थमा दिए है। ऐसे में दलित परिवारों के लिए यह योजना गले की फांस बन गई है।
दस वर्ष पूर्व विभाग के अधिकारियों ने योजना के तहत जमकर बंदरबांट की। कागजों में कनेक्शन दर्शा दिए और करोड़ों के वारे-न्यारे कर डाले। उपभोक्ताओं को 200 लीटर वाली पानी की टंकी थमाई और कागजों में एसएस पाइप, टूंटी, पक्की थड़ी बनाना दर्शाकर मोटा गोलमाल कर डाला। अब विभाग द्वारा बिल भेजे जाने पर ऐसे उपभोक्ता अपनी पीड़ा लेकर विभाग के चक्कर लगा रहे है। विभाग में अब कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए यह सिरदर्द बना हुआ है।
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पहले भरो बिल, फिर कटेगा कनेक्शन
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत कागजों में दर्शाए गए बिलों को निरस्त करवाना भी टेड़ी खीर बना हुआ है। जो उपभोक्ता पहले से ही कनेक्शनधारी है और नियमित रूप से अपना बिल भी अदा कर रहा है। उन उपभोक्ताओं को भी इस योजना के तहत जारी किए गए बिल को निरस्त करवाना सिरदर्द बना हुआ है। विभागीय अधिकारी नियमों का हवाला देते हुए पहले बिल की अदायगी करने और बाद में कनेक्शन काटने की औपचारिकता पूरी करने की बात कह रहे है। विभाग द्वारा कनेक्शन काटने की एवज में भी फीस के रूप में 500 रुपये की मांग की जा रही है। जबकि धरातल पर दोहरा कनेक्शन है ही नहीं?
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कागजों में ही बिछा दी पाइप लाइन
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत सिरसा जिला में भी जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर चपत लगाई। कागजों में पाइप लाइन बिछाना दर्शाया गया। दलित परिवारों के घरों तक कनेक्शन के लिए अलग-अलग लाइन बिछाई दर्शायी गई। इसके अलावा उपभोक्ताओं के घर पर सीसी पाइप का कनेक्शन, पानी की टंकी, टूंटी, आंगन में सीमेंटिड थड़ी बनानी दर्शायी। एक घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों को अलग-अलग राशनकार्ड के आधार पर कनेक्शन देना दर्शा दिया। अनेक शिकायतें भी हुई लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उन्हें अनसुना कर दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिवस 19 नवंबर 2006 को हरियाणा में यह योजना शुरू की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस योजना का श्रीगणेश किया। योजना के तहत दलित परिवारों को घर-द्वार पर पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। कहा गया कि दलित परिवारों की महिलाओं को पीने के पानी के लिए घड़ा उठाकर घर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। योजना के तहत दलित परिवारों के घरों में निशुल्क पानी का कनेक्शन, टूंटी व सीमेंटिड थड़ी बनवाकर देना था।
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देश का पहला राज्य का दावा
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत प्रदेश के आठ लाख दलित परिवारों को पेयजल कनेक्शन देने का ऐलान किया गया था और इसके लिए लगभग 300 करोड़ के बजट का भी प्रावधान किया गया। दावा किया गया कि दलित परिवारों को घर-द्वार पर पीने का पानी पहुंचाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बना है।
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बिल में 50 फीसदी छूट का वादा
तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इस योजना के तहत दलित परिवारों को निशुल्क कनेक्शन देने के साथ ही पानी के बिल में भी 50 फीसदी छूट देने का दावा किया था। दलित परिवारों को कनेक्शन के लिए भी किसी प्रकार के फाइल दाखिल करने की जरूरत नहीं और बिल में भी छूट का वादा बड़ा लुभावना रहा। लेकिन अब इन परिवारों को विभाग द्वारा हजारों रुपये के बिल थमाए जा रहे है। ऐसे दावों की हकीकत अब लोगों के सामने आ रही है।
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अब भी दूषित पेयजल आपूर्ति
विभाग द्वारा स्वच्छ पेजयल के लाख दावे किए जाते है लेकिन विभाग की प्रयोगशाला ही उन दावों की पोल खोलती है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पानी के सैंपल फेल पाए जाते रहे है। अब भी शहर के विभिन्न इलाकों में पीने का स्वच्छ पानी मुहैया नहीं है। लोगों को दुर्गंध वाला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभाग के ट्यूबवैल जहरीला पानी उगल रहे है, इस पीने के अयोग्य पानी की विभाग द्वारा आपूर्ति की जा रही है।
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गैर दलितों को भी बांटी टंकियां
इंदिरा गांधी पेयजल योजना में बरती गई धांधली का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर ठेकेदारों ने गैर-दलितों को भी पानी की टंकियां बांट दी। वार्ड पार्षदों की देखरेख में इस योजना के तहत कार्य किया गया था। पार्षदों ने अपने गैर-दलित चहेतों को भी पानी की टंकियां बांट दी, जिसकी वजह से हकदार दलित परिवार योजना से वंचित ही रह गए।
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बिल तो आएगी ही: प्रकाशवीर
जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाशवीर ने कहा कि योजना के तहत टंकियां निशुल्क देने और कनेक्शन निशुल्क देने की योजना थी जो दी गई। पानी का बिल तो अब आएगा ही। उन्होंने बताया कि योजना के तहत जो फ्री था वो दे दिया पानी फ्री देने की कोई योजना नहीं थी। विभाग ने पात्र को ही टंकियां दी और उनके कनेक्शन किए हैं। यदि कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच कर ली जाएगी।
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विभाग द्वारा इन दिनों पेयजल के बिल भेजे जा रहे है। इसमें दलित परिवारों को भी बिल थमाए गए है। इन बिल पर बीते वर्षों के बकाये का हवाला देते हुए हजारों रुपये जमा करवाने की हिदायत दी गई है। बिल अदायगी न करने पर पानी का कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई है। योजना के तहत एक घर में दो-दो-तीन-तीन कनेक्शन दर्शा दिए गए, जबकि जलापूर्ति एक ही कनेक्शन से हो रही है। विभाग ने तीन कनेक्शन के बिल थमा दिए है। इसी प्रकार दलित परिवारों के जो उपभोक्ता पहले से ही कनेक्शनधारी थे और नियमित रूप से अपने बिल की अदायगी कर रहे है, विभाग ने उन्हें भी इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत बकाये के बिल थमा दिए है। ऐसे में दलित परिवारों के लिए यह योजना गले की फांस बन गई है।
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दस वर्ष पूर्व विभाग के अधिकारियों ने योजना के तहत जमकर बंदरबांट की। कागजों में कनेक्शन दर्शा दिए और करोड़ों के वारे-न्यारे कर डाले। उपभोक्ताओं को 200 लीटर वाली पानी की टंकी थमाई और कागजों में एसएस पाइप, टूंटी, पक्की थड़ी बनाना दर्शाकर मोटा गोलमाल कर डाला। अब विभाग द्वारा बिल भेजे जाने पर ऐसे उपभोक्ता अपनी पीड़ा लेकर विभाग के चक्कर लगा रहे है। विभाग में अब कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए यह सिरदर्द बना हुआ है।
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पहले भरो बिल, फिर कटेगा कनेक्शन
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत कागजों में दर्शाए गए बिलों को निरस्त करवाना भी टेड़ी खीर बना हुआ है। जो उपभोक्ता पहले से ही कनेक्शनधारी है और नियमित रूप से अपना बिल भी अदा कर रहा है। उन उपभोक्ताओं को भी इस योजना के तहत जारी किए गए बिल को निरस्त करवाना सिरदर्द बना हुआ है। विभागीय अधिकारी नियमों का हवाला देते हुए पहले बिल की अदायगी करने और बाद में कनेक्शन काटने की औपचारिकता पूरी करने की बात कह रहे है। विभाग द्वारा कनेक्शन काटने की एवज में भी फीस के रूप में 500 रुपये की मांग की जा रही है। जबकि धरातल पर दोहरा कनेक्शन है ही नहीं?
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कागजों में ही बिछा दी पाइप लाइन
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत सिरसा जिला में भी जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर चपत लगाई। कागजों में पाइप लाइन बिछाना दर्शाया गया। दलित परिवारों के घरों तक कनेक्शन के लिए अलग-अलग लाइन बिछाई दर्शायी गई। इसके अलावा उपभोक्ताओं के घर पर सीसी पाइप का कनेक्शन, पानी की टंकी, टूंटी, आंगन में सीमेंटिड थड़ी बनानी दर्शायी। एक घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों को अलग-अलग राशनकार्ड के आधार पर कनेक्शन देना दर्शा दिया। अनेक शिकायतें भी हुई लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उन्हें अनसुना कर दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिवस 19 नवंबर 2006 को हरियाणा में यह योजना शुरू की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस योजना का श्रीगणेश किया। योजना के तहत दलित परिवारों को घर-द्वार पर पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। कहा गया कि दलित परिवारों की महिलाओं को पीने के पानी के लिए घड़ा उठाकर घर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। योजना के तहत दलित परिवारों के घरों में निशुल्क पानी का कनेक्शन, टूंटी व सीमेंटिड थड़ी बनवाकर देना था।
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देश का पहला राज्य का दावा
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत प्रदेश के आठ लाख दलित परिवारों को पेयजल कनेक्शन देने का ऐलान किया गया था और इसके लिए लगभग 300 करोड़ के बजट का भी प्रावधान किया गया। दावा किया गया कि दलित परिवारों को घर-द्वार पर पीने का पानी पहुंचाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बना है।
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बिल में 50 फीसदी छूट का वादा
तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इस योजना के तहत दलित परिवारों को निशुल्क कनेक्शन देने के साथ ही पानी के बिल में भी 50 फीसदी छूट देने का दावा किया था। दलित परिवारों को कनेक्शन के लिए भी किसी प्रकार के फाइल दाखिल करने की जरूरत नहीं और बिल में भी छूट का वादा बड़ा लुभावना रहा। लेकिन अब इन परिवारों को विभाग द्वारा हजारों रुपये के बिल थमाए जा रहे है। ऐसे दावों की हकीकत अब लोगों के सामने आ रही है।
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अब भी दूषित पेयजल आपूर्ति
विभाग द्वारा स्वच्छ पेजयल के लाख दावे किए जाते है लेकिन विभाग की प्रयोगशाला ही उन दावों की पोल खोलती है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पानी के सैंपल फेल पाए जाते रहे है। अब भी शहर के विभिन्न इलाकों में पीने का स्वच्छ पानी मुहैया नहीं है। लोगों को दुर्गंध वाला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभाग के ट्यूबवैल जहरीला पानी उगल रहे है, इस पीने के अयोग्य पानी की विभाग द्वारा आपूर्ति की जा रही है।
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गैर दलितों को भी बांटी टंकियां
इंदिरा गांधी पेयजल योजना में बरती गई धांधली का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर ठेकेदारों ने गैर-दलितों को भी पानी की टंकियां बांट दी। वार्ड पार्षदों की देखरेख में इस योजना के तहत कार्य किया गया था। पार्षदों ने अपने गैर-दलित चहेतों को भी पानी की टंकियां बांट दी, जिसकी वजह से हकदार दलित परिवार योजना से वंचित ही रह गए।
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बिल तो आएगी ही: प्रकाशवीर
जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रकाशवीर ने कहा कि योजना के तहत टंकियां निशुल्क देने और कनेक्शन निशुल्क देने की योजना थी जो दी गई। पानी का बिल तो अब आएगा ही। उन्होंने बताया कि योजना के तहत जो फ्री था वो दे दिया पानी फ्री देने की कोई योजना नहीं थी। विभाग ने पात्र को ही टंकियां दी और उनके कनेक्शन किए हैं। यदि कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच कर ली जाएगी।