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Sirsa News: किशोरी का दुष्कर्मी पिता दोषी करार, फास्ट ट्रैक कोर्ट आज सुनाएगी सजा

Thu, 25 Jul 2024 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 25 Jul 2024 01:57 AM IST
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Teenager's rapist father found guilty, fast track court will pronounce sentence today
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी पिता को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को दोषी करार दिया है। इस मामले में अदालत वीरवार को सजा सुनाएगी।
कालांवाली थाना क्षेत्र निवासी किशोरी (14) ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि वह कक्षा नौवीं में पढ़ती है। करीब छह माह पहले उसके पिता ने उसे खाने में नशीला पदार्थ डालकर दे दिया, जिससे वह अचेत हो गई। इसके बाद उसके पिता ने दुष्कर्म किया। 27 अक्तूबर 2019 को उसके पेट में दर्द हुआ तो मां उसे लेकर डॉक्टर के पास गई। डॉक्टर ने उसकी जांच कर मां को बताया कि आपकी बेटी गर्भवती है। मां ने बेटी से पूछा तो उसने बताया कि पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। यह जानकर मां हतप्रभ रह गई। इसके बाद वह उसे लेकर पुलिस थाने पहुंची। पुलिस ने किशोरी का बयान दर्ज कर 30 अक्तूबर 2019 को उसके पिता के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। दुष्कर्म की शिकार पीड़िता गर्भवती हो गई थी और 16 नवंबर 2019 को उसकी सिविल अस्पताल में एक प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई थी। किशोरी ने एक बच्ची को जन्म दिया था।

वकीलों ने केस लड़ने से कर दिया था इन्कार

बेटी से दुष्कर्म करने वाले आरोपी पिता का केस लड़ने से सिरसा के वकीलों ने इन्कार कर दिया था। हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपी पति की पत्नी ही उसका केस लड़ने को लेकर वकील करने के लिए न्यायालय परिसर में पहुंची। वह जिस भी वकील के पास अपने पति का केस लेकर पहुंची, उसने केस लड़ने से साफ इन्कार कर दिया। महिला ने वकीलों से उसके पति का केस लड़ने की गुहार लगाते हुए कहा कि उसका घर चलाने वाला अब कोई नहीं है। उसकी बेटी भी यही चाहती है कि किसी तरह उसका पिता जेल से बाहर आ जाए।
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पिता की लाडली बेटी थी

आरोपी के चार बच्चे हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि वह सबसे छोटी है और पिता की लाडली भी। उसे नहीं पता था कि पिता उसके साथ ऐसी घिनौनी हरकत करेगा। गौरतलब है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट पहले भी इसी प्रकार के एक जघन्य मामले में दोषी पिता को फांसी की सजा सुना चुकी है। बाद में हाईकोर्ट ने दोषी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
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