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दो घंटे जेनरेटर पर चले ऑक्सीजन प्लांट का सफल ट्रायल, शुद्धता रही 93 फीसदी
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ऑक्सीजन प्लांट को शुरू करते इंजीनियर
- फोटो : Sirsa
सिरसा। नागरिक अस्पताल में स्थापित किया गया ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल सफल रहा। लेकिन अब इसे चलाने में एक नई समस्या अस्पताल प्रबंधन के सामने आ गई है। प्लांट को चलाने के लिए 415 वोल्टेज बिजली चाहिए, लेकिन अस्पताल को मिल रही है सिर्फ 380 वोल्टेज। ऐसे में प्लांट स्थापित होने और सफल ट्रायल के बाद भी प्लांट चालू नहीं हो पाया।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद केंद्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए निर्देश दिए थे। उसी के बाद अस्पताल में 1000 प्रति मिनट की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया। इसके लिए एनएचआई को इसका ठेका दिया गया था। उसके बाद सभी काम पूर्ण कर लिए गए। लेकिन मंगलवार को आवश्यकता अनुसार बिजली का लोड उपलब्ध नहीं होने के कारण 48 घंटे की बजाय जेनरेटर से बिजली सप्लाई दी गई। उसके बाद प्लांट का केवल 2 घंटे का ट्रायल लेने के बाद बंद कर दिया गया। अब अस्पताल में लगे ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही इसका 48 घंटे वाला ट्रायल हो पाएगा। 48 घंटे प्लांट चलने के बाद पता चल सकेगा की उससे मिलने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता क्या है।
बता दें कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट देरी से पहुंचने और खराबी के चलते इसे शुरू नहीं किया जा सका। जुलाई में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के बाद उसके ड्रायर में खराबी आ गई। इसके बाद अगस्त में इंजीनियरों ने उसके ड्रायर को बदल दिया। इसके बाद संबंधित कंपनी के इंजीनियरों के न पहुंचने के कारण इसका ट्रायल नहीं हो पाया। सोमवार देर शाम को इंजीनियर नागरिक अस्पताल में पहुंचे और जांच के बाद मंगलवार को ऑक्सीजन प्लांट का दो घंटे तक ट्रायल लिया, जोकि सफल रहा।
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जेनरेटर से एक घंटा प्लांट चलाने का खर्च करीब 2700 रुपये
चंडीगढ़ से पावर नोमिटिक कंपनी के इंजीनियर प्रवीण कुमार और नवीन कुमार प्लांट का ट्रायल लेने के लिए पहुंचे। बिजली पावर कम होने के कारण इसे जेनरेटर पर चलाया गया। प्रवीण कुमार ने बताया कि जेनरेटर पर दो घंटे ही इसे चालू रखा जा सका है। जेनरेटर पर प्लांट को चालू रखने के लिए एक घंटे में 30 लीटर डीजल की खपत होती है। जो कि करीब 2700 रुपये पड़ता है। ऐसे में 48 घंटे तक प्लांट को चालू स्थिति में रखने के लिए खर्च काफी अधिक होगा। जबकि प्लांट को हमेशा चालू स्थिति में ही रखा जाना है। जेनरेटर पर इसे शुरू रखने के लिए बजट की अधिक आवश्यकता रहेगी। ऐसे में अब ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही ट्रायल लिया जा सकेगा।
शुरूआती दौर में 93 फीसदी रही ऑक्सीजन की शुद्धता
दो घंटे तक प्लांट को शुरू रखने के दौरान ऑक्सीजन की शुद्धता 93 फीसदी रही। हालांकि 48 घंटे प्लांट को चालू स्थिति रखने के बाद ही इसकी शुद्धता की जांच की जा सकती है। प्लांट को 415 वोल्टेज बिजली समान रहनी आवश्यक है। दो दिन चालू स्थिति में रखने के बाद प्लांट की ऑक्सीजन अस्पताल में बेड तक पहुंचाई जा सकती है। ट्रायल होने के बाद विभाग की ओर से गुरुग्राम में स्थित लैब में ऑक्सीजन के सैंपल भेजे जाएंगे।
ऑक्सीजन पहुंचने के लिए की जा चुकी है पाइप फिटिंग
अस्पताल प्रशासन की ओर से पहले ही वार्डों में स्थित सभी बेड तक ऑक्सीजन सेंटर लाइन बिछाई जा चुकी है। मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए उपकरण भी लगाए जा चुके है। अभी फिलहाल अस्पताल की ओर से सिलिंडरों के माध्यम से ही मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है।
प्लांट में 10 हजार लीटर ऑक्सीजन रहेगी स्टॉक
किसी कारणवश अगर प्लांट बंद हो जाता है तो उसके बाद भी 10 हजार लीटर ऑक्सीजन प्लांट में स्टॉक में रहेगी। प्लांट में लगे बड़े डिब्बों में अतिरिक्त ऑक्सीजन एकत्र होती रहेगी। ऐसे में मरीजों के सामने ऑक्सीजन का संकट पैदा नहीं होगा। प्लांट पर्यावरण से हवा को एकत्र कर उसमें से गैस, नमी, नाइट्रोजन और अन्य धूल के कण अलग कर शुद्ध ऑक्सीजन एकत्र करता है। जिसके बाद इसे मरीजों तक पहुंचाया जाएगा।
बिजली की वोल्टेज कम होने के कारण जेनरेटर पर प्लांट का दो घंटे ट्रायल लिया गया। ट्रायल के दौरान शुद्धता 93 फीसदी रही है। बिजली की वोल्टेज बढ़ाने के लिए अस्पताल में 1 हजार केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया जाना है जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही 48 घंटे तक प्लांट को चालू स्थिति में रख ट्रायल लिया जाएगा।
-डॉ. बुधराम, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल सिरसा
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद केंद्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए निर्देश दिए थे। उसी के बाद अस्पताल में 1000 प्रति मिनट की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया। इसके लिए एनएचआई को इसका ठेका दिया गया था। उसके बाद सभी काम पूर्ण कर लिए गए। लेकिन मंगलवार को आवश्यकता अनुसार बिजली का लोड उपलब्ध नहीं होने के कारण 48 घंटे की बजाय जेनरेटर से बिजली सप्लाई दी गई। उसके बाद प्लांट का केवल 2 घंटे का ट्रायल लेने के बाद बंद कर दिया गया। अब अस्पताल में लगे ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही इसका 48 घंटे वाला ट्रायल हो पाएगा। 48 घंटे प्लांट चलने के बाद पता चल सकेगा की उससे मिलने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता क्या है।
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बता दें कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट देरी से पहुंचने और खराबी के चलते इसे शुरू नहीं किया जा सका। जुलाई में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के बाद उसके ड्रायर में खराबी आ गई। इसके बाद अगस्त में इंजीनियरों ने उसके ड्रायर को बदल दिया। इसके बाद संबंधित कंपनी के इंजीनियरों के न पहुंचने के कारण इसका ट्रायल नहीं हो पाया। सोमवार देर शाम को इंजीनियर नागरिक अस्पताल में पहुंचे और जांच के बाद मंगलवार को ऑक्सीजन प्लांट का दो घंटे तक ट्रायल लिया, जोकि सफल रहा।
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जेनरेटर से एक घंटा प्लांट चलाने का खर्च करीब 2700 रुपये
चंडीगढ़ से पावर नोमिटिक कंपनी के इंजीनियर प्रवीण कुमार और नवीन कुमार प्लांट का ट्रायल लेने के लिए पहुंचे। बिजली पावर कम होने के कारण इसे जेनरेटर पर चलाया गया। प्रवीण कुमार ने बताया कि जेनरेटर पर दो घंटे ही इसे चालू रखा जा सका है। जेनरेटर पर प्लांट को चालू रखने के लिए एक घंटे में 30 लीटर डीजल की खपत होती है। जो कि करीब 2700 रुपये पड़ता है। ऐसे में 48 घंटे तक प्लांट को चालू स्थिति में रखने के लिए खर्च काफी अधिक होगा। जबकि प्लांट को हमेशा चालू स्थिति में ही रखा जाना है। जेनरेटर पर इसे शुरू रखने के लिए बजट की अधिक आवश्यकता रहेगी। ऐसे में अब ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही ट्रायल लिया जा सकेगा।
शुरूआती दौर में 93 फीसदी रही ऑक्सीजन की शुद्धता
दो घंटे तक प्लांट को शुरू रखने के दौरान ऑक्सीजन की शुद्धता 93 फीसदी रही। हालांकि 48 घंटे प्लांट को चालू स्थिति रखने के बाद ही इसकी शुद्धता की जांच की जा सकती है। प्लांट को 415 वोल्टेज बिजली समान रहनी आवश्यक है। दो दिन चालू स्थिति में रखने के बाद प्लांट की ऑक्सीजन अस्पताल में बेड तक पहुंचाई जा सकती है। ट्रायल होने के बाद विभाग की ओर से गुरुग्राम में स्थित लैब में ऑक्सीजन के सैंपल भेजे जाएंगे।
ऑक्सीजन पहुंचने के लिए की जा चुकी है पाइप फिटिंग
अस्पताल प्रशासन की ओर से पहले ही वार्डों में स्थित सभी बेड तक ऑक्सीजन सेंटर लाइन बिछाई जा चुकी है। मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए उपकरण भी लगाए जा चुके है। अभी फिलहाल अस्पताल की ओर से सिलिंडरों के माध्यम से ही मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है।
प्लांट में 10 हजार लीटर ऑक्सीजन रहेगी स्टॉक
किसी कारणवश अगर प्लांट बंद हो जाता है तो उसके बाद भी 10 हजार लीटर ऑक्सीजन प्लांट में स्टॉक में रहेगी। प्लांट में लगे बड़े डिब्बों में अतिरिक्त ऑक्सीजन एकत्र होती रहेगी। ऐसे में मरीजों के सामने ऑक्सीजन का संकट पैदा नहीं होगा। प्लांट पर्यावरण से हवा को एकत्र कर उसमें से गैस, नमी, नाइट्रोजन और अन्य धूल के कण अलग कर शुद्ध ऑक्सीजन एकत्र करता है। जिसके बाद इसे मरीजों तक पहुंचाया जाएगा।
बिजली की वोल्टेज कम होने के कारण जेनरेटर पर प्लांट का दो घंटे ट्रायल लिया गया। ट्रायल के दौरान शुद्धता 93 फीसदी रही है। बिजली की वोल्टेज बढ़ाने के लिए अस्पताल में 1 हजार केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया जाना है जिसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद ही 48 घंटे तक प्लांट को चालू स्थिति में रख ट्रायल लिया जाएगा।
-डॉ. बुधराम, डिप्टी सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल सिरसा