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Sirsa News: राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने हरियाणा सामान्य तबादला नीति के विरोध में ज्ञापन सौंपा
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डबवाली। शिक्षक अपना ज्ञापन विधायक आदित्य देवीलाल को सौंपते हुए। शिक्षक
डबवाली। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की खंड इकाई डबवाली ने जिला कार्यकारिणी के नेतृत्व में रविवार को डबवाली के विधायक आदित्य देवीलाल चौटाला को उनके निवास स्थान पर पहुंच कर हरियाणा सामान्य तबादला नीति के विरोध में ज्ञापन सौंपा। जिला प्रधान विजय शर्मा ने बताया कि विभाग ने 2015 में ऑनलाइन सामान्य तबादला नीति बनाई थी। 2016 में इस नीति के तहत तबादले हुए।
पॉलिसी के अनुसार तबादला प्रक्रिया प्रतिवर्ष चलाई जानी थी। परंतु विभाग एवं सरकार की लेट लतीफी के चलते 10 साल बाद भी तबादले नहीं किए जा सके। अब सरकार ने नीतियों में बदलाव करते हुए जोन की जगह ब्लॉक इकाई कर दिया है। इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि जो शिक्षक किसी भी तरह से एक ब्लॉक में 15 वर्ष पूरे कर चुका है उनको उस ब्लॉक में दोबारा विकल्प नहीं मिलेगा।
इस नीति के बाद बहुत सारे शिक्षक प्रभावित होंगे। साथ ही कई ब्लॉक में विद्यालयों में अव्यवस्था भी फैलेगी। तबादला होने उपरांत अधिकारीगण व्यवस्था बनाने के नाम पर भ्रष्टाचार भी फैलाएंगे। सरकार सार्वजनिक मंचों से घोषणा करती है कि हमारी नीति की वजह से शिक्षक अपनी मर्जी के मनपसंद स्थान चुन सकते हैं। जबकि असलियत यह है कि कर्मचारी को दूर के विकल्प मजबूरी में चुनने पड़ते हैं।
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जिला महासचिव विजय सहारण ने बताया कि इस नई तबादला नीति में अंतरजिला तबादला भी होना है। कैडर बदलने हेतु विभाग ने नियम बनाया है कि जिस जिले में 90 प्रतिशत से कम शिक्षक कार्यरत हैं ,उन जिलों को अंतरजिला तबादला में शामिल नहीं किया जाएगा। जबकि कई शिक्षक वर्षों से अपने गृह जिला के नजदीक जाना चाह रहे थे। यह नीति भेदभाव को बढ़ावा देगी।
सभी जिलों को इस अंतरजिला तबादले में कैडर बदलने के लिए शामिल किया जाना चाहिए। इस अवसर पर डबवाली खंड प्रधान लाल बहादुर ने बताया कि पहले तो सरकार तबादले कर ही नहीं रही थी। अब जब सरकार तबादला कर रही है तो ऐसे ऐसे नियम बना कर कि सिर्फ शिक्षकों को प्रताड़ित ही करना हो। शिक्षकों ने विधायक से अपील की कि वे शिक्षकों की इन मांगों को सरकार तक पहुंचाएं और इन तुगलकी फरमानों से निजात दिलवाएं। विधायक ने ज्ञापन को उचित माध्यम से सरकार तक भेजने व उचित मंच पर बात रखने का आश्वासन दिया।
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पॉलिसी के अनुसार तबादला प्रक्रिया प्रतिवर्ष चलाई जानी थी। परंतु विभाग एवं सरकार की लेट लतीफी के चलते 10 साल बाद भी तबादले नहीं किए जा सके। अब सरकार ने नीतियों में बदलाव करते हुए जोन की जगह ब्लॉक इकाई कर दिया है। इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि जो शिक्षक किसी भी तरह से एक ब्लॉक में 15 वर्ष पूरे कर चुका है उनको उस ब्लॉक में दोबारा विकल्प नहीं मिलेगा।
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इस नीति के बाद बहुत सारे शिक्षक प्रभावित होंगे। साथ ही कई ब्लॉक में विद्यालयों में अव्यवस्था भी फैलेगी। तबादला होने उपरांत अधिकारीगण व्यवस्था बनाने के नाम पर भ्रष्टाचार भी फैलाएंगे। सरकार सार्वजनिक मंचों से घोषणा करती है कि हमारी नीति की वजह से शिक्षक अपनी मर्जी के मनपसंद स्थान चुन सकते हैं। जबकि असलियत यह है कि कर्मचारी को दूर के विकल्प मजबूरी में चुनने पड़ते हैं।
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जिला महासचिव विजय सहारण ने बताया कि इस नई तबादला नीति में अंतरजिला तबादला भी होना है। कैडर बदलने हेतु विभाग ने नियम बनाया है कि जिस जिले में 90 प्रतिशत से कम शिक्षक कार्यरत हैं ,उन जिलों को अंतरजिला तबादला में शामिल नहीं किया जाएगा। जबकि कई शिक्षक वर्षों से अपने गृह जिला के नजदीक जाना चाह रहे थे। यह नीति भेदभाव को बढ़ावा देगी।
सभी जिलों को इस अंतरजिला तबादले में कैडर बदलने के लिए शामिल किया जाना चाहिए। इस अवसर पर डबवाली खंड प्रधान लाल बहादुर ने बताया कि पहले तो सरकार तबादले कर ही नहीं रही थी। अब जब सरकार तबादला कर रही है तो ऐसे ऐसे नियम बना कर कि सिर्फ शिक्षकों को प्रताड़ित ही करना हो। शिक्षकों ने विधायक से अपील की कि वे शिक्षकों की इन मांगों को सरकार तक पहुंचाएं और इन तुगलकी फरमानों से निजात दिलवाएं। विधायक ने ज्ञापन को उचित माध्यम से सरकार तक भेजने व उचित मंच पर बात रखने का आश्वासन दिया।