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निजी स्कूलों की हड़ताल के खिलाफ उतरे अभिभावक

Wed, 11 May 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Wed, 11 May 2016 12:30 AM IST
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प्रदर्शन - फोटो : bureau
नियम 134-ए के विरोध में निजी स्कूल संचालकों की ओर से की जा रही हड़ताल के खिलाफ सिरसा के अभिभावक भी मैदान में उतर आए हैं। अभिभावक मंच सिरसा की ओर से मंगलवार को इस संबंध में उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया गया। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई की एवज में मोटी-मोटी फीस वसूल करने वाले स्कूल संचालकों की आय की जांच भी करवाई जाए और जल्द से जल्द हड़ताल समाप्त करवाई जाए अन्यथा अभिभावक भी संघर्ष पर उतरने को मजबूर होंगे।
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मंगलवार सुबह अभिभावक मंच सिरसा की ओर से लालचंद गोदारा, प्रदीप सचदेवा, नत्थूराम, कमल शर्मा, अमरजीत सिंह, संजीव शर्मा, दीपक राय, गोपाल शर्मा सहित अन्य अभिभावक एकत्र होकर लघु सचिवालय पहुंचे। अभिभावकों ने उपायुक्त के नाम उनके कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इसके बाद डीईओ के नाम का ज्ञापन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी डॉ. यज्ञदत्त वर्मा को दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि नियम 134-ए के विरोध में निजी स्कूल संचालकों की ओर से की जा रही हड़ताल बच्चों के शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना चाहती है, लेकिन स्कूल संचालक ऐसे बच्चों को दाखिला देने की बजाय हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल का खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ रहा है जो पिछले कई सालों से निजी स्कूलों में नियमित रूप से पढ़ रहे हैं तथा अपनी तीन-तीन माह की फीस भी एडवांस जमा करवा चुके हैं।
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अभिभावकों ने कहा कि जब उन्होंने अपने बच्चों की फीस जमा करवा रखी है तो उनके बच्चों की पढ़ाई को बाधित क्यों किया जा रहा है। अभिभावकों ने रोष का इजहार करते हुए कहा कि यदि कभी किसी बच्चे की फीस निर्धारित समय पर जमा नहीं करवाते हैं तो स्कूल संचालक लेट फीस वसूल करते हैं, जबकि खुद हड़ताल पर बैठकर बच्चों का अहित कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावक हड़ताल के दिनों की फीस काटने की सोच रहे हैं क्योंकि जब पढ़ाई नहीं होगी तो फीस क्यों दी जाए। अभिभावकों ने उपायुक्त से मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई की एवज में मोटी-मोटी फीस वसूल करने वाले स्कूल संचालकों की आय की जांच भी करवाई जाए तथा जल्द से जल्द हड़ताल समाप्त करवाई जाए, अन्यथा अभिभावक भी संघर्ष पर उतरने को मजबूर होंगे।
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