नियम 134-ए : खुली निजी विद्यालयों की पोल
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नियम 134-ए के तहत वीरवार को ड्रॉ निकाला गया। सिरसा में स्कूलों द्वारा जारी की गई रिक्त सीटों से कम विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा में सफल रहे इस लिए पहले ड्रॉ में ही सभी का दाखिला हो गया। वहीं डबवाली में निजी विद्यालयों के 170 में से महज 27 बच्चे ही दाखिले के लिए क्वालिफाई हुए हैं। सातवीं क्लास में दाखिला पाने के लिए एक भी बच्चा क्वालिफाई नहीं हो सका। जबकि सरकारी स्कूलों के 27 बच्चों में से 19 बच्चे क्वालिफाई कर गए। रानियां खंड के अंतर्गत आने वाले शहर व गांवों के 96 बच्चों ने नियम 134 ए के तहत 56 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए है।
सिरसा में वीरवार को सभी खंड शिक्षा कार्यालयों में नियम 134-ए के तहत दाखिलों के लिए ड्रॉ निकाला गया। सिरसा खंड में मात्र 333 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश परीक्षा में 55 प्रतिशत या इससे अधिक अंक हासिल किए थे जबकि खंड में दूसरी से 12वीं कक्षा तक प्राइवेट स्कूलों में 1496 सीटें रिक्त थी। प्रवेश परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक लेने की कंडीशन के कारण अधिकतर विद्यार्थी सीटें रिक्त होने के बावजूद दाखिले से वंचित रह गए हैं। सिरसा खंड में कुल 1287 विद्यार्थियों ने नियम के तहत दाखिले के लिए आवेदन किया था जिसके बाद सरकार द्वारा 55 प्रतिशत अंक लेने की कंडीशन लगाने के बाद 1057 विद्यार्थी ही परीक्षा में बैठे जिसमें से मात्र 333 विद्यार्थियों ने ही सफलता हासिल की है। आज ड्रॉ के माध्यम से पास विद्यार्थियों को स्कूल आवंटित किए गए हैं। 64 स्कूलों में सीटों के अनुसार दाखिला दिया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी आत्म प्रकाश मेहरा ने बताया कि सीटें अधिक रिक्त थी और पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम थी इस लिए सभी को पहले ड्रॉ के तहत ही दाखिला मिल जाएगा।
डबवाली में बीईओ बलजिंद्र सिंह भंगू की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने ड्रॉ निकालते हुए सूची कार्यालय में चस्पा कर दी। ड्रॉ के साथ ही निजी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बयां हो गई। 42 निजी स्कूलों में दूसरी से बारहवीं कक्षा तक रिक्त पड़ी करीब 860 सीटों के लिए 197 बच्चों ने आवेदन किया था। सरकार ने आवेदनकर्ताओं का लर्निंग लेबल जांचने के लिए लिखित परीक्षा ली थी। निजी स्कूलों के 170 बच्चों को रोल नंबर जारी किए गए थे। जिसमें से 44 बच्चे गैरहाजिर रहे। शेष बच्चों का परिणाम काफी निराशा जनक रहा।
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले महज 27 बच्चे ही क्वालिफाई हो सके हैं। बीईओ बलजिंद्र सिंह भंगू ने बताया कि दूसरी कक्षा में छह, तीसरी में 11, चौथी में एक, पांचवी में दो, छठी में दो, आठवी में दो, नौवीं में एक, 10 में एक तथा बारहवीं में एक परीक्षार्थी क्वालिफाई हुआ है। सबसे खराब परिणाम कक्षा सातवीं के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों का रहा। कुल 16 बच्चे परीक्षा में बैठे थे, जिसमें से एक भी बच्चा पास नहीं हुआ। दूसरी ओर सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों का टेस्ट नहीं लिया था। सरकारी स्कूलों में आयोजित होने वाले मंथली टेस्ट के आधार पर ही विश्लेषण हुआ। कुल 197 में से 27 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने धारा 134-ए के तहत आवेदन किया था। जिसमें से 19 बच्चे क्वालिफाई हो गए हैं। यहां विशेषकर उल्लेखनीय है कि सरकार ने 55 प्रतिशत अंक जुटाने वाले को क्वालिफाई माना है। लेकिन निजी स्कूलों के बच्चों का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा।
क्या पूर्व में पढ़ा भूल गए बच्चे
लर्निंग लेबल टेस्ट में निजी स्कूलों के बच्चों का खराब प्रदर्शन दर्शाता है कि या तो वे पूर्व में पढ़ा सब कुछ भूल गए। या फिर निजी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सरकारी स्कूलों से भी बदतर है।
परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए सिरसा भेजा गया था। वहीं से रिजल्ट तैयार हुआ है। जिसके आधार पर ड्रॉ निकाला गया है।
-बलजिंद्र सिंह भंगू, बीईओ, डबवाली
रानियां में 96 बच्चों ने दी थी परीक्षा, 56 उत्तीर्ण
रानियां (ब्यूरो)। नियम 134-ए का लाभ लेने के लिए खंड के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों व शहर के कुल 177 विद्यार्थियों ने आवेदन पत्र भरे थे। जिनमें से आठ आवेदन पत्र खामियां निकलने के कारण रद्द कर दिए गए थे। पंाच आवेदन पत्र जिनकी परीक्षा ग्यारहवीं कक्षा के लिए होनी थी लेकिन सरकार की हिदायत अनुसार दसवी का रिजल्ट न आने के कारण पेंडिंग रख दिया गए। कुल 164 विद्यार्थियों में से केवल 96 बच्चों ने ही नियम 134 ए के तहत परीक्षा दी। जबकि 63 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे थे। वीरवार को घोषित हुए परीक्षा परिणाम में 96 में से 56 बच्चे उत्तीर्ण हुए हैं।