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कड़े पहरे में हुई माता चांदकौर की अंतिम अरदास
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:30 AM IST
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पुलिस
- फोटो : Bureau
पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साये और भारी-भरकम सुरक्षा प्रबंधों में बीच शनिवार को नामधारी समुदाय के एक गुट की ओर से श्रीजीवननगर डेरे में गुरु माता चांद कौर की अंतिम अरदास का आयोजन किया गया। दूसरे गुट के विरोध के चलते विवाद की आशंका को देखते हुए जिले के आला अधिकारी और कई जिलों का पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। क्षेत्र में चप्पे चप्पे पर कड़ी सुरक्षा रही। दूसरे गुट के लोग प्रशासन की सख्ती के चलते डेरा मस्तानगढ़ तक ही सीमित रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न होने के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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गौरतलब है कि चार अप्रेल को लुधियाना के भैणी साहिब में मोटरसाइकिल सवार हत्यारों ने नामधारी समुदाय की गुरु माता चांद कौर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। गुरु माता की अंतिम अरदास के लिए सतगुरु उदय सिंह महाराज ने 10 अप्रेल को भैणी साहिब में कार्यक्रम रखा है। सतगुरु उदय सिंह के बड़े भाई ठाकुर दलीप सिंह ने इस आयोजन से एक दिन पहले नौ अप्रेल को जीवननगर स्थित गुरुद्वारे में अंतिम अरदास कार्यक्रम की घोषणा कर दी। इस घोषणा से दूसरे गुट के लोग सकते में आ गए और उन्होंने जीवननगर में होने वाले कार्यक्रम को रद करवाने के लिए जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया।
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एक गुट ने हर हाल में कार्यक्रम करने और दूसरे गुट ने किसी भी कीमत पर कार्यक्रम न होने देने का ऐलान किया था। इस विवाद के चलते प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए थे। जिलाधीश शरणदीप कौर बराड़ ने शुक्रवार से जीवननगर ही नहीं रानियां व ऐलनाबाद में भी की ओर से धारा 144 लगा दी। जिला प्रशासन ने शुक्रवार रात को ही जीवननगर में डेरा डाल दिया। कई जिलों की पुलिस को मौके पर बुला लिया गया। शुक्रवार शाम से ही पुलिस बल जीवननगर पहुंचना शुरू हो गया, पूरी रात पुलिस की गाड़ियां आती रहीं। शनिवार सुबह पुलिस के घुड़सवार भी बुला लिए गए। पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तबदील हो गया। क्षेत्र के हर छोटे से छोटे रास्ते पर भी नाका लगा दिया गया। हर आने-जाने वाले वाहन की तलाशी ली गई और पूछताछ के बाद ही लोगों को आगे जाने दिया गया। संदिग्ध वस्तुओं व तेजधार हथियारों को नाके पर ही जब्त कर लिया गया।
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अनहोनी की आशंका के चलते एंबुलेंस व अग्निशमन गाड़ियों को भी मौके पर तैनात कर दिया। सिरसा के उपमंडलाधीश परमजीत सिंह चहल, नगराधीश विजेंद्र सिंह, उप पुलिस अधीक्षक रविंद्र सिंवर, ऐलनाबाद के उपमंडलाधीश प्रदीप दहिया, उप पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह, तहसीलदार राजेंद्र वर्मा, एसएचओ रानियां दलीप सिंह, यातायात थाना प्रभारी अनिल सोढीं सहित तमाम आला अधिकारी मौके पर मौजूद थे। सीआईडी और आईबी के कर्मचारी भी चप्पे चप्पे पर निगरानी रखे हुए थे।
सड़कों पर पूरी तरह नाकाबंदी
सिरसा से रानियां जाते समय गांव भंभूर में पुलिस ने तिराहे की पूरी तरह से नाकाबंदी की हुई थी। रानियां और ऐलनाबाद की ओर जाने वाले हर छोटे बड़े वाहन की सघन तलाशी ली जा रही थी। रानियां की ओर जाने वाले वाहनों पर विशेष निगरानी की जा रही थी। जीवननगर मोड़ की ओर जाने वाले रास्तों की पूरी तरह से नाकाबंदी की हुई थी। जगह-जगह पर दमकल और वज्रवाहन खड़े हुए थे। मुख्य मार्ग से आयोजन स्थल तक जाने वाले रास्ते पर हर 50 कदम पर पुलिस की टीम खड़ी हुई थी। वाहनों की सघन जांच की जा रही थी। किरपाण और तलवारें तक आयोजन स्थल तक नहंी ले जाने दी गई।
खेतों में भी की पुलिस ने गश्त
महिला पुलिस की जवान पूरी मुस्तैदी से चौकसी रखे हुए थी। आयोजन स्थल के चारो ओर पुलिस ने घेराबंदी की गई थी। इतना ही नहीं आसपास खेतों में भी पुलिस के जवान गयत कर रहे थे। पुलिस प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात रहे। दूसरी ओर सतगुरु उदय सिंह महाराज से जुड़े श्रद्धालु शुक्रवार रात को ही डेरा मस्तानगढ़ में एकत्रित होने शुरू हो गए थे। जिनमें भैणी साहिब में होने वाले तय कार्यक्रम से ठीक पहले श्री जीवननगर में कार्यक्रम करने को लेकर भारी रोष देखा गया।
सतगुरु उदय सिंह ने की शांति की अपील
उधर गुरु माता की हत्या के मामले में ठाकुर दलीप सिंह पर शक की उंगली उठ रही है। ऐसे में उनके द्वारा गुरु माता को अंतिम अरदास व श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम को दूसरे पक्ष के लोग अनुचित ठहरा रहे हैं। डेरा मस्तानगढ़ में एकत्रित हुए लोग किसी भी कीमत पर श्रीजीवननगर में यह कार्यक्रम नहीं होने देना चाहते थे, पर सतगुरु उदय सिंह ने कोई भी गलत कदम न उठाने का आदेश दिया और शांति बनाए रखने की अपील की। शनिवार सुबह सतगुरु के मिले स्पष्ट आदेश के बाद उक्त श्रद्धालु शांत हो गए और और अपने आप को मस्तानगढ़ डेरे तक सीमित कर लिया।
जत्थों में नहीं जाने दिया श्रद्धालुओं को
ठाकुर दलीप सिंह से जुड़े श्रद्धालु भी शुक्रवार सुबह से ही जीवननगर डेरे में पहुंचने शुरू हो गए थे। हर हाल में कार्यक्रम आयोजित करने पर इस गुट के लोग अड़े रहे। प्रशासन ने एक समूह या जत्थों में श्रद्धालुओं को कार्यक्रम स्थल पर जाने से रोके रखा। पर एक दो को तलाशी लेकर कार्यक्रम स्थल पर जाने दिया। कार्यक्रम 10 बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम का आयोजन शांति पूर्वक संपन्न होने के बाद पर प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
गुरु गद्दी को लेकर है विवाद
रानियां। सतगुरु जगजीत सिंह के देहावसान के बाद से नामधारी पंथ की गुरु गद्दी को लेकर विवाद चल रहा है। सतगुरु जगजीत सिंह के केवल एक पुत्री ही है। सतगुरु जगजीत सिंह अपने छोटे भाई महाराज वीर सिंह के दोनों पुत्रों ठाकुर दलीप सिंह व ठाकुर उदय सिंह को गोद ले रखा था। सतगुरु जगजीत सिंह के देहावसान के बाद गुरु गद्दी के लिए दामाद जगतार सिंह, ठाकुर दलीप सिंह व ठाकुर उदय सिंह का नाम सामने आया। नामधारी समुदाय ने 18 दिसंबर 2012 को ठाकुर उदय सिंह को गुरु गद्दी पर बैठा दिया। मगर ठाकुर दलीप सिंह ने इसे स्वीकार नहीं किया और तब से वे अलग रास्ता अपनाए हुए हैं। दोनों गुटों द्वारा एक दूसरे पर समय-समय पर अनेक आरोप लगाए जाते रहे हैं। पिछले छह-सात वर्षों से ठाकुर दलीप सिंह को भैणी साहिब डेरे में घुसने नहीं दिया गया है। सतगुरु जगजीत सिंह के देहावसान और गुरु माता चंद कौर की हत्या के बाद भी ठाकुर दलीप सिंह को अंतिम दर्शन नहीं करने दिए गए। ऐसे में ठाकुर दलीप सिंह अपने श्रद्धालुओं के साथ अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।