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बिजलीकर्मियों को हटाने पर गुस्साए संगठन
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Tue, 17 May 2016 01:10 AM IST
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प्रदर्शन करते बिजली कर्मचारी
- फोटो : Bureau
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बिजलीकर्मियों को नौकरी से हटाने, सस्पेंड करने और वेतन काटने के विरोध में सोमवार को शहर में बिजली, रोडवेज, नहरी विभाग व पीडब्ल्यूडी आदि विभागों के कर्मचारियों ने भूख हड़ताल, धरना-प्रदर्शन कर रोष जताया।
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हरियाणा सरकार की ओर से पावर कॉरपोरेशन की 23 सब डिवीजनों को ठेकेदारों को सौंपने के विरोध में 11 मई को दोनों यूनियनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से किए गए सामूहिक अवकाश में शामिल पावर कॉरपोरेशन में कार्यरत ठेके पर लगे करीब 10 हजार बिजली कर्मचारियों को नौकरी से हटाने, नियमित कर्मचारियों को सस्पेंड करने और वेतन काटने का विरोध जताया जा रहा है।
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सोमवार को बरनाला रोड स्थित 33केवी सब स्टेशन पर कर्मचारी नेता राजमोहिंद्र शर्मा की अध्यक्षता में क्रमिक भूख हड़ताल आयोजित की गई, जिसमें विजय पाल बेरी, जीत सिंह, मोना कुमार, सुरेंद्र माजोका, राय साहब भूख हड़ताल पर बैठे। तो दूसरी ओर टिब्बा वाले बिजलीघर पर भी सोमवार को प्रधान सुखेदव सिंह, उपाध्यक्ष संजय रानी, एचवीपीएन से प्रधान दीपक राज, संगठनकर्ता नीलम मलिक, यूनिट संगठनकर्ता बिशन सिंह, उपाध्यक्ष विपिन शर्मा ने भूख हड़ताल की। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि संयुक्त अवकाश लेना कोई गुनाह नहीं है, बावजूद उसके सरकार ने ठेके पर लगे कर्मचारियों को हटाकर तानाशाही का सबूत दिया है, जिससे प्रदेश के सभी विभागों के कर्मचारियों में रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो बिजली संशोधन बिल लागू करने की योजना बना रही है, उससे न केवल अधिक रेट पर बिजली दी जाएगी, बल्कि इससे निजीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि एचएसईबी के समय विभाग का घाटा 400 करोड़ रुपये बताया जाता था, लेकिन बोर्ड तोडने के बाद यह बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपये हो गया जो कि निगम की गलत नीतियों का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि क्रमिक भूख हड़ताल के बाद भी यदि उक्त बिल रद नहीं किया गया तो 25 व 30 जून को कच्चे व पक्के कर्मचारी संयुक्त रूप से हड़ताल पर चले जाएंगे।
रोडवेज कर्मचारियों ने दिया समर्थन
हरियाणा रोडवेज सिरसा डिपो की तालमेल कमेटी की डिपो प्रधान रामकुमार चुरनियां, मदनलाल खोथ, भीम सिंह चक्कां, कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान आत्माराम सहारण, रोडवेज यूनियन के प्रांतीय उपप्रधान लक्ष्मण दास ने इस फैसले को हिटलरशाही करार देते हुए चेतावनी दी कि हटाए गए व सस्पेंड किए गए कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से ड्यूटी पर वापस नहीं लिया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसके तहत 17 मई को प्रात: 11 बजे सभी कर्मचारी संगठनों द्वारा 33केवी बिजली घर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर रामानंद, जिला पटवार एसोसिएशन के प्रधान अशोक पटवारी, सर्व कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान महेंद्र शर्मा, अजीत सिंह, रामनिवास, दया सिंह, राजकुमार बैनीवाल, गुरादित्ता कंबोज, राजेंद्र गुर्जर, सरदीश सिंह, चिमन लाल सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों ने दी चेतावनी
हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स यूनियन की तीनों शाखाओं की ओर से जनस्वास्थ्य मंडल कार्यालयों व नहर कॉलोनी में रोष सभाएं आयोजित की गई। रोष सभाओं की अध्यक्षता जिला प्रधान सोहन सिंह रंधावा ने की। यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष कृपाशंकर त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही कर्मचारियों को बहाल नहीं किया गया तो यूनियन बिजली कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होगी। इस मौके पर पूर्व महेंद्र शर्मा, रमेश कम्बोज, धर्मपाल सैनी, लालचंद मेहता, रामबिलास भांभू, सत्यवान, वेदप्रकाश, रामकुमार भरोखां, रामनिवास, प्रेम फौजी, रमेश सैनी आदि उपस्थित थे।
बिजली कर्मचारियों को अकेला न समझे सरकार : जाखड़
सरकार द्वारा बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को प्रताड़ित करने को लेकर हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेशाध्यक्ष कंवर सिंह यादव व प्रमुख प्रवक्ता विजय पाल जाखड़ ने कहा कि सरकार बिजली कर्मचारियों को अकेला समझने की भूल न करे। वे सोमवार सुबह स्थानीय बिजली घर में हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी पावर के आह्वान पर निजीकरण के विरोध में सब यूनिट स्तर पर किए जा रहे क्रमिक अनशन के पहले दिन अपना समर्थन देने पहुंचे थे। उनके साथ जिला प्रधान आत्माराम सहारण, रोडवेज के डिपो प्रधान राम कुमार चुरणिया, देवीलाल बिरडा, राम कृष्ण सहित अनेक पदाधिकारी व सदस्यगण मौजूद रहे।
हरियाणा कर्मचारी महासंघ का कर्मचारी केवल आंदोलन के आदेश का इंतजार कर रहा है। बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए अपनाए जा रहे ओछे हथकंडे सरकार की बौखलाहट व हठधर्मिता दर्शाती है, जिसे हरियाणा का कर्मचारी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर हरियाणा कर्मचारी महासंघ प्रदेश के जनहित के विभाग को बचाने के लिए हरियाणा बंद का आह्वान सहित किसी प्रकार के आंदोलन की घोषणा कर सकता है। सरकार हठधर्मिता को छोड़ कर ओछे हथकंडे न अपना कर इस मसले को बातचीत के जरिए हल करे। उन्होंने सरकार को चेताया कि अगर सरकार इस बार भी न मानी, तो महासंघ को बड़ा आंदोलन करना होगा, जिससे प्रदेश की शांति भंग होगी, जिसकी जिम्मेदार सरकार ही होगी।
भूख हड़ताल पर बैठे बिजली कर्मचारी
नाथूसरी चोपटा। नाथूसरी चोपटा स्थित बिजली विभाग के कार्यालय पर बिजली बोर्ड के चार कर्मचारी सरकार द्वारा किए जा रहे बिजली बोर्ड के निजीकरण के विरोध स्वरूप व अन्य मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरी नहीं करेगी तब तक वे उनकी हड़ताल जारी रहेगी। भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारी महेंद्र सिंह रामकुमार, दयाराम व राकेश कुमार ने बताया कि सरकार बोर्ड का निजीकरण कर रही है जो सरासर गलत है। कच्चे कर्मचारियों को शोषण हो रहा है उनको पक्का किया जाए व अन्य कर्मचारी हित की अन्य मांगों को भी पुरा किया जाए। उनका कहना है कर्मचारियों के हित को देखते हुए भूख हड़ताल शुरू की है तथा जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जाएगी तब तक वे भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे।
अध्यापक संघ ने भी दिया समर्थन
ओढ़ां। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबद्ध सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा के खंड प्रधान जगदेव सिंह गिल की अध्यक्षता में खंड के अध्यापकों ने खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिजली कर्मचारियों के समर्थन में धरना दिया। धरने के उपरांत खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया जिसमें मांग की गई कि अपनी व जनता की जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों का जिस प्रकार से उत्पीडन किया गया वो निंदनीय है। उल्लेखनीय है कि 11 मई को बिजली कर्मचारी सामुहिक अवकाश पर थे। लेकिन सरकार ने उनकी जायज मांगों का निपटारा करने की बजाय 7400 कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने व 100 से अधिक नियमित कर्मचारियों को निलंबित करने तथा सभी 28000 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने जैसा निर्णय लिया।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि उत्पीडन का यह निर्णय वापस लिया जाए तथा कर्मचारियों की मांगों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाए। जिला प्रधान बूटा सिंह ने कहा कि बिजली विभाग में 23 सब डिविजनों में निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों के निलंबन व आऊट सोर्सिंग के कर्मचारियों को निकालने का फैसला लेकर सरकार जो तानाशाही का परिचय दे रही है उससे हरियाणा में कर्मचारी आंदोलन और तीव्र होगा। खंड सचिव अजायब सिंह ने कहा कि संघ निजीकरण का विरोध पहले भी करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। इस मौके पर शमशेर सिंह, रमेश कुमार, रामकुमार और कुलदीप सिंह सहित अनेक अध्यापक मौजूद थे।