{"_id":"574359414f1c1b61276907ee","slug":"sirsa-hindi-news-thed-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिकरियों ने कहा कीमती सामान बाहर निकल लो तो लोगों ने उनको दिखाए चप्पल-जूते ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिकरियों ने कहा कीमती सामान बाहर निकल लो तो लोगों ने उनको दिखाए चप्पल-जूते
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Tue, 24 May 2016 12:56 AM IST
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थेहड़
- फोटो : bureau
जिला प्रशासन की ओर से 35 हजार थेहड़वासियों को मोटिवेट करके घर खाली करवाने योजना सोमवार को धरी की धरी रह गई। शाम को पुलिस सुरक्षा के बीच प्रशासन की तरफ से तहसीलदार ओम प्रकाश सरकारी अमला लेकर थेहड़ पहुंचे। सरकारी अमले को देखकर थेहड़वासी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। बच्चे, बूढे और जवानों ने की आंखों में घर खाली करने के आदेश को लेकर आक्रोश था। बेघर होने की कगार पर पहुंचे थेहड़वासियों को देखकर सरकारी तंत्र से जुड़ा हर शख्स सहम गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने थेहड़वासियों से कहा कि थेहड़ प्राचीन धरोहर है और इस पर पुरातत्व आधीन है। इसलिए थेहडवासी अपने-अपने घर से कीमती सामान निकालकर इसे खाली कर दो। अधिकारियों ने जब घर खाली करने की बात बोली तो थेहड़वासी तैश में आ गए और अधिकारियों को दो टूक जवाब दिया खाली नहीं करेंगे, जान दे देेंगे। स्थिति बिगड़ने लगी तो लोगों ने जूते-चप्पल अपने हाथों में उठा लिए। यह देख सरकारी अमले की सांसें अटक गई। तभी थेहड़ संघर्ष समिति की प्रधान एडवाकेट संजू बाला ने हालात को संभाला। प्रधान संजू बाला ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासन बेघर करने के लिए मोटिवेट करने आया है, जरा देखों 35 हजार थेहड़ वासियों की आंखों में कितना आक्रोश है। हर एक थेहड़ वासी अपनी जाने देने को तैयार है लेकिन किसी भी सूरत में अपने घर खाली नहीं करेंगे। एडवोकेट संजू बाला ने तैश में आए थेहड़वासियों को समझाया अधिकारी प्रशासन व सरकार के कहने पर समझाने आए हैं। इसलिए कोई गुस्से में आकर कानून अपने हाथ में न लें। प्रशासन ने थेहड़वासियों को 13 जून तक अपने घर खाली करने का नोटिस दिया हुआ है।
सरकार की मंशा केवल उजाड़ने की
थेहड़वासियों का कहना है कि बीजेपी सरकार की मंशा शुरू से ही थेहड़वासियों को उजाड़ने की रही है। सरकार उन्हें बसाना चाहती तो
हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करके चार महीने के अंदर थेहड़ खाली करवाने की बात नहीं करती। पिछले छह दशक से लोग थेहड़ पर
रह रहे हैं। प्रशासन की तरफ से सारी सारी सरकारी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, पक्की सड़कें आदि दी हुई हैं। थेहड़ वासी नगर परिषद
को हाऊस टैक्स तक अदा करते हैं। अब बीजेपी सरकार हाईकोर्ट में कहती है कि थेहड़ पर अनाधिकृत निर्माण हुआ है। चुनाव के समय
तो वोट लेने के लिए तो नेता बोलते रहे किसी सूरत में उन्हेें थेहड़ से नहीं हटाया जाएगा। थेहड़ पर 35 हजार लोगों के आशियाने हैं।
संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला का कहना है बीजेपी ने वोट बैंक के लिए चुनाव तक अपने मनसुबे जाहिर नहीं किए।
अगर सरकार की मंशा ठीक होती तो अदालत व अदालत के बाहर दोहरी नीति का खेल नहीं खेलती। थेहड़वासी अब खुद अदालत का
द्वार खट खटाएंगे।
चार सालों से लटक रही है तलवार
2012 से ही थेहड़ की जमीन पर अपना दावा करते हुए पुरातत्व विभाग ने अदालत में याचिका दायर करके इसे कब्जा मुक्त करवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने जिला प्रशासन से थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने का आदेश दिया। जिला प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 450 लोगों को नोटिस जारी करके 26 अक्टूबर 2012 तक अपने मकान खाली करने का आदेश दिया। जिलाधीश की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 20 अक्टूबर तक कब्जा न हटाने पर बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और 26 अक्तूबर को मकानों को गिराकर कब्जा ले लिया जाएगा, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया था। थेहड़वासी सड़कों पर उतर आए और सिरसा में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। थेहड़वासियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आठ नवंबर तक स्टे लगा दिया और साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सरकार की तरफ से मिले जवाब के बाद स्टे हटा लिया गया। 20 जनवरी 2016 को हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिवक्ता ने हाईकोर्ट बताया कि आज से चार महीने के बीच अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा।
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सरकार की मंशा केवल उजाड़ने की
थेहड़वासियों का कहना है कि बीजेपी सरकार की मंशा शुरू से ही थेहड़वासियों को उजाड़ने की रही है। सरकार उन्हें बसाना चाहती तो
हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करके चार महीने के अंदर थेहड़ खाली करवाने की बात नहीं करती। पिछले छह दशक से लोग थेहड़ पर
रह रहे हैं। प्रशासन की तरफ से सारी सारी सरकारी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, पक्की सड़कें आदि दी हुई हैं। थेहड़ वासी नगर परिषद
को हाऊस टैक्स तक अदा करते हैं। अब बीजेपी सरकार हाईकोर्ट में कहती है कि थेहड़ पर अनाधिकृत निर्माण हुआ है। चुनाव के समय
तो वोट लेने के लिए तो नेता बोलते रहे किसी सूरत में उन्हेें थेहड़ से नहीं हटाया जाएगा। थेहड़ पर 35 हजार लोगों के आशियाने हैं।
संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला का कहना है बीजेपी ने वोट बैंक के लिए चुनाव तक अपने मनसुबे जाहिर नहीं किए।
अगर सरकार की मंशा ठीक होती तो अदालत व अदालत के बाहर दोहरी नीति का खेल नहीं खेलती। थेहड़वासी अब खुद अदालत का
द्वार खट खटाएंगे।
चार सालों से लटक रही है तलवार
2012 से ही थेहड़ की जमीन पर अपना दावा करते हुए पुरातत्व विभाग ने अदालत में याचिका दायर करके इसे कब्जा मुक्त करवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने जिला प्रशासन से थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने का आदेश दिया। जिला प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 450 लोगों को नोटिस जारी करके 26 अक्टूबर 2012 तक अपने मकान खाली करने का आदेश दिया। जिलाधीश की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 20 अक्टूबर तक कब्जा न हटाने पर बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और 26 अक्तूबर को मकानों को गिराकर कब्जा ले लिया जाएगा, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया था। थेहड़वासी सड़कों पर उतर आए और सिरसा में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। थेहड़वासियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आठ नवंबर तक स्टे लगा दिया और साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सरकार की तरफ से मिले जवाब के बाद स्टे हटा लिया गया। 20 जनवरी 2016 को हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिवक्ता ने हाईकोर्ट बताया कि आज से चार महीने के बीच अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा।
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