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इंदिरा गांधी पेयजल योजना बनी टेंशन
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Wed, 21 Sep 2016 12:39 AM IST
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शहर में पानी की सप्लाई देने वाले दोनों मुख्य टैंक अभी तक नहीं ढके गए।
- फोटो : अमर उजाला
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इंदिरा गांधी पेयजल योजना के 99 फीसदी लाभपात्र बिल अदा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पिछले तीन सालों में जनस्वास्थ्य विभाग के करीब डेढ़ करोड़ रुपये फंस गए हैं। इस बार भी लोग बिल भरने के मूड में नहीं। लाभपात्रों का कहना है कि जब कनेक्शन ही नहीं हुआ तो बिल कैसा?
वर्ष 2006 में अनुसूचित वर्ग (एससी) के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इंदिरा गांधी पेयजल योजना लागू की थी। इसके तहत शहर डबवाली में 3117 लाभपात्रों को मुफ्त में पेयजल कनेक्शन के साथ-साथ पेयजल स्टोरेज के लिए 200 लीटर की टंकी भी दी गई थी। करीब सात साल बाद विभाग ने अप्रैल 2013 से उपरोक्त लाभपात्रों के बिल बनाने शुरू किए। तीन साल के भीतर अब विभाग छठा बिल जारी कर रहा है। बिल फ्लेट रेट 120 रुपये प्रति माह के हिसाब से भेजे जा रहे हैं। साथ में सरचार्ज भी जोड़ा जा रहा है। विभाग के अनुसार 36 माह का बिल सरचार्ज सहित करीब 5040 रुपये प्रति लाभपात्र बैठता है। भारी भरकम बिल जारी होने के बाद एससी वर्ग के लोग विरोध जताने के लिए विभाग के कार्यालय में पहुंच रहे हैं। लोगों के सवालों के आगे अधिकारी तथा कर्मचारी बेबस नजर आ रहे हैं। हालांकि बिलों के विरोध के चलते एससी वर्ग बहुल आबादी वाले वार्डों में विरोध की गूंज सुनाई देने लगी है। ऐसे में करीब दस साल पहले लागू हुई इंदिरा गांधी पेयजल योजना विवादों में नजर आ रही है। चूंकि लाभपात्रों का आरोप है कि उन्हें मुफ्त में पेयजल टंकी दी गई थी, कनेक्शन नहीं किया गया था। उनके घरों में पहले से ही पेयजल कनेक्शन था, जोकि विभाग के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। विभाग दो बिल कैसे भेज सकता है?
99 फीसदी नहीं भरते बिल
विभाग के रिकॉर्ड का आंकलन करें तो तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट हो रही है। विभाग का कहना है कि वर्ष 2013 में वाटर पॉलिसी लागू होने के बाद सरकार ने बिल बनाने की हिदायत दी थी। पॉलिसी समझकर महज एक फीसदी लाभपात्रों ने पानी के मीटर लगवाए और बिल भरने लगे। करीब 99 फीसदी लोगों की ओर विभाग के करीब पौने दो करोड़ रुपये बकाया हैं। नियमानुसार ऐसे सभी लाभपात्र डिफॉल्टर लिस्ट में आते हैं।
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मुफ्त कनेक्शन पर खर्च हुए थे 2500 से 3000 रुपये
इंदिरा गांधी पेयजल योजना की बात करें तो सरकारी काम निजी कंपनियों के हाथों में था। एससी वर्ग को जारी हुए प्रति कनेक्शन पर सरकार ने करीब 2500 से 3000 रुपये खर्च किए थे। 200 लीटर की टंकी, पाइप जनस्वास्थ्य विभाग का था। निजी कंपनी को कनेक्शन करना था। वर्ष 2006-07 में डबवाली में ही सात-आठ निजी कंपनियों को ठेका दिया गया था।
विभाग की दलील
आरोपों के बीच जनस्वास्थ्य विभाग दलील देते हुए नजर आ रहा है। विभाग का कहना है कि कनेक्शन दिए गए थे। प्रमाण के तौर पर फोटो भी की गई थी। संबंधित लाभपात्र से कनेक्शन होने पर एक फार्म भी भरवाया गया था। ऐसे में योजना में गड़बड़ी की बात नहीं।
वार्ड वाइज कनेक्शन सूची
वार्ड कनेक्शन
1 07
2 02
3 00
4 18
5 17
6 00
7 391
8 457
9 247
10 00
11 00
12 01
13 40
14 847
15 292
16 134
17 312
18 53
19 15
20 284
कुल 3117
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के लाभपात्रों को बिल भरना होगा। सरकार ने उन्हें मुफ्त में कनेक्शन मुहैया करवाए थे। करीब पौने दो करोड़ रुपये का बिल लाभपात्रों की ओर बकाया है। योजना में यह कहीं नहीं है कि लाभपात्रों का बिल माफ है।
-भानी राम, एसडीई, जनस्वास्थ्य विभाग, डबवाली
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वर्ष 2006 में अनुसूचित वर्ग (एससी) के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इंदिरा गांधी पेयजल योजना लागू की थी। इसके तहत शहर डबवाली में 3117 लाभपात्रों को मुफ्त में पेयजल कनेक्शन के साथ-साथ पेयजल स्टोरेज के लिए 200 लीटर की टंकी भी दी गई थी। करीब सात साल बाद विभाग ने अप्रैल 2013 से उपरोक्त लाभपात्रों के बिल बनाने शुरू किए। तीन साल के भीतर अब विभाग छठा बिल जारी कर रहा है। बिल फ्लेट रेट 120 रुपये प्रति माह के हिसाब से भेजे जा रहे हैं। साथ में सरचार्ज भी जोड़ा जा रहा है। विभाग के अनुसार 36 माह का बिल सरचार्ज सहित करीब 5040 रुपये प्रति लाभपात्र बैठता है। भारी भरकम बिल जारी होने के बाद एससी वर्ग के लोग विरोध जताने के लिए विभाग के कार्यालय में पहुंच रहे हैं। लोगों के सवालों के आगे अधिकारी तथा कर्मचारी बेबस नजर आ रहे हैं। हालांकि बिलों के विरोध के चलते एससी वर्ग बहुल आबादी वाले वार्डों में विरोध की गूंज सुनाई देने लगी है। ऐसे में करीब दस साल पहले लागू हुई इंदिरा गांधी पेयजल योजना विवादों में नजर आ रही है। चूंकि लाभपात्रों का आरोप है कि उन्हें मुफ्त में पेयजल टंकी दी गई थी, कनेक्शन नहीं किया गया था। उनके घरों में पहले से ही पेयजल कनेक्शन था, जोकि विभाग के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। विभाग दो बिल कैसे भेज सकता है?
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99 फीसदी नहीं भरते बिल
विभाग के रिकॉर्ड का आंकलन करें तो तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट हो रही है। विभाग का कहना है कि वर्ष 2013 में वाटर पॉलिसी लागू होने के बाद सरकार ने बिल बनाने की हिदायत दी थी। पॉलिसी समझकर महज एक फीसदी लाभपात्रों ने पानी के मीटर लगवाए और बिल भरने लगे। करीब 99 फीसदी लोगों की ओर विभाग के करीब पौने दो करोड़ रुपये बकाया हैं। नियमानुसार ऐसे सभी लाभपात्र डिफॉल्टर लिस्ट में आते हैं।
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मुफ्त कनेक्शन पर खर्च हुए थे 2500 से 3000 रुपये
इंदिरा गांधी पेयजल योजना की बात करें तो सरकारी काम निजी कंपनियों के हाथों में था। एससी वर्ग को जारी हुए प्रति कनेक्शन पर सरकार ने करीब 2500 से 3000 रुपये खर्च किए थे। 200 लीटर की टंकी, पाइप जनस्वास्थ्य विभाग का था। निजी कंपनी को कनेक्शन करना था। वर्ष 2006-07 में डबवाली में ही सात-आठ निजी कंपनियों को ठेका दिया गया था।
विभाग की दलील
आरोपों के बीच जनस्वास्थ्य विभाग दलील देते हुए नजर आ रहा है। विभाग का कहना है कि कनेक्शन दिए गए थे। प्रमाण के तौर पर फोटो भी की गई थी। संबंधित लाभपात्र से कनेक्शन होने पर एक फार्म भी भरवाया गया था। ऐसे में योजना में गड़बड़ी की बात नहीं।
वार्ड वाइज कनेक्शन सूची
वार्ड कनेक्शन
1 07
2 02
3 00
4 18
5 17
6 00
7 391
8 457
9 247
10 00
11 00
12 01
13 40
14 847
15 292
16 134
17 312
18 53
19 15
20 284
कुल 3117
इंदिरा गांधी पेयजल योजना के लाभपात्रों को बिल भरना होगा। सरकार ने उन्हें मुफ्त में कनेक्शन मुहैया करवाए थे। करीब पौने दो करोड़ रुपये का बिल लाभपात्रों की ओर बकाया है। योजना में यह कहीं नहीं है कि लाभपात्रों का बिल माफ है।
-भानी राम, एसडीई, जनस्वास्थ्य विभाग, डबवाली