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Sirsa News: गांव जोड़कियां में सौंफ की खेती कर सतबीर कमा रहे लाखों रुपये

Mon, 27 May 2024 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 27 May 2024 12:25 AM IST
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Satbir is earning lakhs of rupees by cultivating fennel in village Jodkiyan
सौंफ की खेती करते सतबीर।
नाथूसरी चौपटा। गेहूं, कपास, बाजरा और धान आदि पारंपरिक फसलों के साथ अब खेती के तरीके भी बदलने लगे हैं। इसके तहत सिरसा जिले के किसान सतबीर सौंफ की जैविक खेती करके लाखों रुपये कमा रहे हैं।
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गांव जोड़कियां निवासी किसान सतबीर देहड़ू ने पिछले साल यूट्यूब पर सौंफ की खेती का वीडियो देखा। इससे उन्हें सौंफ उगाने की प्रेरणा मिली। इस खेती के बारे में उन्होंने कई माध्यमों से जानकारी ली। बीए पास कर चुके सतबीर जिले में सौंप की खेती करने वाले एकमात्र किसान हैं। बाजार में सौंफ की मांग काफी है।
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उन्होंने बताया कि अक्तूबर 2023 में वह जोधपुर राजस्थान से सौंफ का बीज लाए। उन्होंने पहली बार एक एकड़ में करीब 800 ग्राम बीज बोया। इस फसल को पककर तैयार होने में 150-180 दिन का समय लगा। एक एकड़ से दो लाख रुपये की आय हो सकती है। सौंफ की खेती बहुत मुनाफा देने वाली है, लेकिन इसके बारे में किसानों को जानकारी नहीं होती, इसलिए किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर रहते हैं।
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उन्होंने बताया कि सौंफ की खेती के लिए मीठे पानी की जरूरत होती है। इसलिए उन्होंने खेत में पानी की डिग्गी बनवाई। सौंफ की फसल को तीन सिंचाई की जरूरत होती है। इसकी कटाई अप्रैल में की जाती है। संवाद


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जैविक तरीके से होती है तैयार

किसान सतबीर ने बताया कि सौंफ की खेती जैविक तरीके से होती है। इसमें किसी प्रकार की खाद या स्प्रे की जरूरत नहीं होती और पैदावार भी अच्छी होती है। जैविक तरीके से तैयार सौंफ लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। इसी कारण जैविक खाद्य पदार्थों की तरफ ज्यादातर लोग आकर्षित होते हैं।



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समस्या:
किसान सतबीर ने बताया कि सौंफ की पैदावार तो अच्छी हो जाती है, लेकिन नजदीक मंडी न होने के कारण फसल को जोधपुर पहुंचाना होता है। इसमें अधिक व्यय करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक खेती के लिए अनुदान मांगा है। ताकि घाटे का सौदा बन रही खेती किसानों के लिए लाभ का सौदा बन सके।
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