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Sirsa News: सार्वजनिक शौचालयों में महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड सुविधा नदारद
Tue, 09 Dec 2025 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 09 Dec 2025 11:42 PM IST
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सिरसा। माेहंता मार्केट स्थित महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय। संवाद
सिरसा। शहर के सार्वजनिक शौचालयों में महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड की सुविधा पूरी तरह नदारद है। स्वच्छता और महिला स्वास्थ्य को लेकर चलाए जा रहे कई अभियानों के बावजूद जमीनी स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। महिलाओं का अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज न उठाना भी इस समस्या को बढ़ावा देता है। जबकि सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन शिकायत न होने के कारण यह मुद्दा सरकारी दफ्तरों में दबकर रह जाता है। परिणामस्वरूप कई जगहों पर केवल औपचारिकता निभाने के लिए ही सुविधा दिखा दी जाती है।
सार्वजनिक शौचालयों में लगाए जाने वाले सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों का भी यही हाल है। बाजार, बस स्टैंड, पार्कों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बने महिला शौचालयों का निरीक्षण करने पर स्पष्ट हुआ कि इन मशीनों का कहीं भी कोई निशान नहीं है। कई महिलाओं ने बताया कि नगर परिषद स्वच्छता रैंकिंग के दौरान ही इन्हें दिखावे के लिए लगाती है। रैंकिंग के बाद न तो मशीनों की देखरेख की जाती है और न ही उनमें पैड भरे जाते हैं।
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अचानक जरूरत पड़ने पर होती है भारी परेशानी
महिला संगठनों ने नगर परिषद की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक शौचालयों में सेनेटरी पैड सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए और उसकी नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है। अचानक जरूरत होने पर महिलाओं को दुकानों की तलाश में भटकना पड़ता है, जिससे असुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
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क्या थी योजना?
नगर परिषद ने कुछ वर्ष पहले शहर के सार्वजनिक महिला शौचालयों में बड़े शहरों की तर्ज पर सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने की योजना शुरू की थी। मशीन में महिलाएं 5 रुपये का सिक्का डालकर नैपकिन प्राप्त कर सकती थीं। साथ ही उपयोग किए नैपकिन नष्ट करने के लिए इंसिनरेटर मशीनें भी लगाने का प्रस्ताव था, जो पैड को जलाकर नष्ट कर देती हैं, लेकिन यह योजना जमीन पर कभी लागू होती नजर नहीं आई। अधिकांश शौचालयों में न मशीनें हैं और न ही डस्टबिन।
महिलाओं के अनुभव
धरातल पर काम बिल्कुल नहीं हो रहा। मंत्री आते समय ही फटाफट काम होते हैं। कई बार सार्वजनिक शौचालयों में गई हूं, कहीं भी सेनेटरी पैड मशीन नहीं, न ही पैड फेंकने के लिए डस्टबिन। सफाई तक नहीं होती, महिलाओं का जाने का मन ही नहीं करता। - डॉ. मोनिका गोदारा, स्टेट कोऑर्डिनेटर, सामाजिक न्याय संगठन
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मोहंता मार्केट का सार्वजनिक शौचालय शहर का एकमात्र महिला शौचालय है, पर वहां भी सेनेटरी पैड मशीन नहीं है। किसी भी सरकारी कार्यालय में भी यह सुविधा नहीं है। डस्टबिन तक नहीं रखे जाते। - पूजा वर्मा, युवती
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सिक्का बेस सेनेटरी पैड मशीनों की व्यवस्था सार्वजनिक शौचालयों में की जाएगी। एक मशीन का ट्रायल नगर परिषद के शौचालय में चल रहा है, जो सफल रहा। जल्द ही सभी सार्वजनिक शौचालयों में इसका प्रबंध किया जाएगा। - जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद
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सार्वजनिक शौचालयों में लगाए जाने वाले सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों का भी यही हाल है। बाजार, बस स्टैंड, पार्कों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बने महिला शौचालयों का निरीक्षण करने पर स्पष्ट हुआ कि इन मशीनों का कहीं भी कोई निशान नहीं है। कई महिलाओं ने बताया कि नगर परिषद स्वच्छता रैंकिंग के दौरान ही इन्हें दिखावे के लिए लगाती है। रैंकिंग के बाद न तो मशीनों की देखरेख की जाती है और न ही उनमें पैड भरे जाते हैं।
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अचानक जरूरत पड़ने पर होती है भारी परेशानी
महिला संगठनों ने नगर परिषद की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक शौचालयों में सेनेटरी पैड सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए और उसकी नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है। अचानक जरूरत होने पर महिलाओं को दुकानों की तलाश में भटकना पड़ता है, जिससे असुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
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क्या थी योजना?
नगर परिषद ने कुछ वर्ष पहले शहर के सार्वजनिक महिला शौचालयों में बड़े शहरों की तर्ज पर सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने की योजना शुरू की थी। मशीन में महिलाएं 5 रुपये का सिक्का डालकर नैपकिन प्राप्त कर सकती थीं। साथ ही उपयोग किए नैपकिन नष्ट करने के लिए इंसिनरेटर मशीनें भी लगाने का प्रस्ताव था, जो पैड को जलाकर नष्ट कर देती हैं, लेकिन यह योजना जमीन पर कभी लागू होती नजर नहीं आई। अधिकांश शौचालयों में न मशीनें हैं और न ही डस्टबिन।
महिलाओं के अनुभव
धरातल पर काम बिल्कुल नहीं हो रहा। मंत्री आते समय ही फटाफट काम होते हैं। कई बार सार्वजनिक शौचालयों में गई हूं, कहीं भी सेनेटरी पैड मशीन नहीं, न ही पैड फेंकने के लिए डस्टबिन। सफाई तक नहीं होती, महिलाओं का जाने का मन ही नहीं करता। - डॉ. मोनिका गोदारा, स्टेट कोऑर्डिनेटर, सामाजिक न्याय संगठन
मोहंता मार्केट का सार्वजनिक शौचालय शहर का एकमात्र महिला शौचालय है, पर वहां भी सेनेटरी पैड मशीन नहीं है। किसी भी सरकारी कार्यालय में भी यह सुविधा नहीं है। डस्टबिन तक नहीं रखे जाते। - पूजा वर्मा, युवती
सिक्का बेस सेनेटरी पैड मशीनों की व्यवस्था सार्वजनिक शौचालयों में की जाएगी। एक मशीन का ट्रायल नगर परिषद के शौचालय में चल रहा है, जो सफल रहा। जल्द ही सभी सार्वजनिक शौचालयों में इसका प्रबंध किया जाएगा। - जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद