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Sirsa News: रामलला का हुआ जन्म, पंडाल में गूंजे जय श्रीराम के नारे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Sep 2025 11:45 PM IST
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Ramlala was born, slogans of Jai Shri Ram echoed in the pandal.
सिरसा।श्री विष्णु क्लब में रामलीला के दूसरे दिन राम जन्म का मंचन करते हुए कलाकार। क्लब
सिरसा। श्री विष्णु क्लब में चल रही रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार को रामलला के जन्म और श्रवण कुमार की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान कलाकारों की ओर से प्रस्तुत किए गए सजीव दृश्यों को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। जैसे ही भगवान श्रीराम के जन्म का मंचन हुआ, समूचा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
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रामलीला की शुरुआत श्रवण कुमार लीला से हुई, जिसमें दिखाया गया कि कैसे श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जाते हैं। जब श्रवण कुमार अपने प्यासे माता पिता के लिए पानी लेने को लेकर नदी पर जाता है, तभी राजा दशरथ नदी का तीर लगने से उसकी मौत हो जाती है।
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श्रवण कुमार की मौत के उपरांत उनके प्यासे माता पिता के लिए वह पानी लेकर जाते हैं, लेकिन अपने पुत्र की मृत्यु की खबर सुनकर वे दोनों राजा दशरथ को पुत्र वियोग में मृत्यु होने का श्राप देते हैं। इसके उपरांत वहीं, पर वह पुत्र को याद करते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। इस दृश्य में कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय का परिचय दिया। राजा दशरथ व श्रवण कुमार के माता पिता के बीच का संवाद सुनकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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रामजन्म का संजीव चित्रण किया
राजा दशरथ और श्रवण कुमार की कथा के दृश्य का पटाक्षेप हो गया। मंच का पर्दा गिर गया और दोबारा पर्दा उठाया गया तो श्री राम के जन्म की कथा की शुरूआत हुई। श्रीराम जन्म के दृश्य को कलाकार मंच पर पहुंचे। राजा दशरथ के महल का दृश्य नजर आया और कलाकारों ने अपना अभिनय शुरू किया। दशरथ महल में खुशी का माहौल था, सभी झूम रहे थे। आतिशबाजी चलने लगी, आवाज आई की श्रीराम का जन्म हुआ है। पंडाल में जय श्री राम के नारे गुंजने लगे। श्रीराम जन्म की खुशियां मनाई गई और नृत्य हुआ। इसके बाद पर्दा गिर जाता है। इस आयोजन में पार्षद संजीव रातुसरिया, दीपक बंसल, मुकेश रोहिल्ला, राजेंद्र जांगड़ा व मुनीश भी पहुंचे और सभी का स्वागत श्री विष्णु क्लब ने किया।

रामलीला से मिलती है अच्छाई से बुराई पर जीत की शिक्षा : सेठी
क्लब के प्रधान दीपक सेठी ने बताया कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो लोगों को एकजुट करता है। रामलीला के माध्यम से अच्छाई की बुराई पर जीत, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा जैसे मूल्यों को दर्शाया जाता है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाती आ रही है। रिंकू शर्मा ने राजा दशरथ, अजय डोडा ने श्रवण कुमार, मनीष शर्मा ने श्रवण के पिता, लोकेश सलूजा ने श्रवण की माता, विकास सेठी ने श्रृंगी ऋषि, अंकुश मेहता ने भगवान विष्णु, रोहित मेहता ने ब्रह्मा, नरेंद्र चोपड़ा ने शिवजी, दीपक ऐलावादी ने इंद्र देवता, जतिन नागपाल ने वरुण, मनीष शर्मा ने अग्नि देवता, युवराज सेठी ने सूरज देवता, दीपांश सेठी ने वायु देवता, प्रियंका शर्मा ने पृथ्वी, निशा शर्मा ने केकई, अंकित शर्मा ने सुमित्रा, वंश मल्होत्रा ने मंत्री का किरदार अदा किया। रामलीला में आए हुए अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
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