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Sirsa News: प्राकृतिक खेती के लिए प्रगतिशील किसान और वैज्ञानिक एक मंच पर आए, पराली जलाने के मामलों में 95 प्रतिशत तक आई कमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Dec 2025 10:55 PM IST
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Progressive farmers and scientists came together on a platform for natural farming, resulting in up to a 95 percent reduction in stubble burning cases.
प्राकृतिक खेती की प्रदर्शनी के लिए स्टॉल पर रखीं स​ब्जियां व बीज। 
सिरसा। कृषि उपनिदेशक कार्यालय परिसर में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मकसद से एक दिवसीय प्रदर्शनी कम कार्यशाला में किसान, प्रगतिशील किसान और वैज्ञानिक एक मंच पर आए। वहीं, वर्मी कंपोस्ट व आर्गेनिक तरीके से खाद के प्रोडक्ट भी किसानों के सामने रखे गए। हरियाणा के साथ साथ राजस्थान के सरसों खल से तैयार की गई खाद को भी प्रस्तुत किया गया। रानियां के किसान देसी सब्जियों की प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाली किस्म लेकर पहुंचे।
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प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों ने बताए अनुभव
इस दौरान गांव केहरवाला के मदनलाल और सुरेंद्र कुमार ने बताया कि गाय के गोबर व मूत्र से प्राकृतिक खेती करते हैं। गिर नस्ल की गाय हमारे पास है। देसी गोभी, तोरी, काचर , ककड़ी, खट्टी भिंडी, देसी मिर्च यानी पहाड़ी मिर्च, देसी हल्दी, देसी लहसुन जैसी वैरायटी हैं। 50 से 60 प्रकार के देसी बीज है। मार्च और अप्रैल में किसानों को बीच उपलब्ध करवाए हैं। उन किसानों को हमारे साथ मिलकर प्राकृतिक खेती पर काम करेंगे। मौजूदा समय में 300 किसान हमारे साथ हैं। दो से ढाई एकड़ में खेती कर रहे हैं। देश के अलग अलग राज्यों में घूमकर इस खेती को बढ़ावा देने का काम किया है। कुरुक्षेत्र गुरुकुल से प्राकृतिक खेती को सिखा है और आगे लोगों को सिखा रहे हैं।
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गांव घोडावाली निवासी राजकुमार ने बताया कि 2020 से केंचुआ खाद बना रहे हैं। राजीव दीक्षित से प्रेरणा मिली थी। किसानों को आर्गेनिक खेती को लेकर प्रेरित करते हैं। एक एकड़ में 150 बैग लगा रखे हैं। किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ रहे हैं। 250 के आसपास किसान जुड़े हुए हैं। गांव गुडियाखेड़ा में 306 गेहूं की किस्म लगाई थी। 5000 रुपये कीमत पर किसान की गेहूं बिकी थी। हमारे बताए अनुसार खाद डालने पर प्रति एकड़ 50 मन तक गेहूं की उपज आ जाती है।
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किसानों ने अधिकारियों से पूछे सवाल
चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ..देवेंद्र जाखड़ ने मंच पर किसानों को भूमि व फसलों की जानकारी दे रहे थे। इस दौरान एक युवा किसान ने बाजरे में पाए जाने वाली अधीरा बीमारी की समस्या को लेकर सवाल किया। युवा किसान ने कहा कि आज तक वैज्ञानिक इस बीमारी का इलाज नहीं कर पाए। ड़ॉ जाखड़ ने कहा कि बीमारी को लेकर काम हो रहा हैं। युवा किसान ने कहा कि आप लोग कार्यालय से बाहर निकलकर खेतों की मेढ़ो पर धक्के खाइए, तब आपको सच्चाई का पता चलेगा।
सभी हैरानी तब रह गए , जब कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र जाखड़ ने कहा कि उन्हें अधीरा बीमारी की जानकारी है। यह बीमार चार साल पहले रामपुरा बगड़ी में आई थी और अब साहुवाला द्वितीय तक पहुंच गई है। किसान की इस बात को कृषि विश्वविद्यालय तक पहुंचा देंगे। कहेंगे तो वे कैंप लगा देंगे और टीम की विजिट करवा देंगे। वहीं, किसान ने कहा कि उनसे कुछ गलती हुई तो माफी चाहते हैं। लेकिन सच्चाई जो बताई है, वहीं है।
डॉ साहब आप हम लोगों से मजाक करना छोड़िए
रानियां के नाथौर गांव किसान ने कहा कि डॉ साहब आप हम लोगों से मजाक करना छोड़िए। आज से दस दिन पहले सरसों का बीज लेकर गांव में गए और बोले कि यह अच्छा बीज है। क्या अब ये लोग बताएंगे कि बीज कौन सा अच्छा है। डॉ जाखड़ ने कहा कि वह बीज नहीं लेकर गए। इस पर किसान ने कहा कि आप नहीं तो आपका विभाग लेकर गया होगा। आप हमें बता रहे हैं, जब बिजाई का सीजन पूरा हो गया है। डॉ. जाखड़ ने कहा कि बीज के बारे में कृषि उप निदेशक बता देंगे। मेरा वक्त पूरा हुआ।

जहर मुक्त खेती सबसे बड़ी मांग - एडीसी

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जहर मुक्त खेती समय की सबसे बड़ी मांग है और इस दिशा में हमें विशेष रूप से प्रयास करने होंगे। खेत में फसल अवशेष जलाने से बचना होगा, ताकि मित्र कीटों को नुकसान न पहुंचे और वे अपना काम सही तरीके से कर पाएं। उन्होंने कहा कि जहरीले रसायन से ऐसे मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं, जो फसल पैदावार व जमीन की उपजाऊ शक्ति में सहायक बनते हैं।


कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने कहा कि एक दिवसीय कार्यशाला में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को आमंत्रित किया गया। सिरसा में प्राकृतिक खेती को लगातार बढावा दिया जा रहा है। सिरसा जिला में पराली जलाने के मामलों में इस बार 95 प्रतिशत तक की कमी आई है। गत वर्ष 188 मामले सामने आए थे, जबकि इस बार 15 जगह पर ही पराली जलाने की घटनाएं सामने आई है। उन्होंने कहा कि किसानों ने पराली प्रबंधन में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
ये लोग रहे मौजूद
हरियाणा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीटयूट जींद से डा. सुभाष, कपास अनुसंधान केंद्र से डा. ऋषि शर्मा , जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र, विषय विशेषज्ञ राकेश कुंट, गुण नियंत्रण निरीक्षक डा. अमित वर्मा, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डा. विजेंद्र चौहान, ड्रोन दीदी विमला सिंवर मौजूद रहीं।
इन किसानों को किया सम्मानित
प्राकृतिक खेती कर रहे सिंहपुरा के किसान जगदीश कुमार, सुकेरावाला के किसान मनोज कुमार, रामपुर थेड़ी के गुरदेव सिंह, ममेरा खुर्द के जगदीश कड़वासरा, राजपुरा साहनी के बलबीर सिंह, बाजेकां के मदन सहाराण, कर्मगढ के प्रमोद कुमार व डबवाली के आशीष मेहता को भी सम्मानित किया गया। पराली प्रबंधन में विशेष योगदान देने पर पोहडक़ां के निर्मल सिंह, बरुवाली के जितेंद्र सिंह, पनिहारी के रणजीत सिंह, रंधावा के सीबीजी प्लांट से आशीष व विजय को सम्मानित किया गया।

पराली प्रबंधन में सफल संरपंचों का सम्मान भी
वहीं, पराली प्रबंधन को लेकर सफल रहे रेड जोन के सरपंचों को विशेष रूप से कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। अतिरिक्त उपायुक्त विरेद्र सहरावत ने ग्राम पंचायत मल्लेकां के सरपंच सुखदेव सिंह, देसू मलकाना के सरपंच गुरजीत कौर, झोरडऩाली के सरपंच विजय कुमार, मंगाला की सरपंच अनीता रानी को सम्मानित किया गया है।
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