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Sirsa News: रंगड़ी खेड़ा में बाबा जालपीर अब्दुल रहीम के दरबार में सजा मेला पीरां दा
Thu, 28 May 2026 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 28 May 2026 11:16 PM IST
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पीरा दे मेले में महिलाएं पूजा करते हुए। । संवाद
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हजारों श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, दिखी आस्था और भाईचारे की मिसाल
फोटो-- 26 से 29
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव रंगड़ी खेड़ा स्थित बाबा जालपीर अब्दुल रहीम के दरबार में वीरवार को आयोजित मेला पीरां दा श्रद्धा, आस्था और भाईचारे का प्रतीक रहा। साल में चार बार लगने वाले इस मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा के दरबार में मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की।
हरियाणा, पंजाब और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा जालपीर अब्दुल रहीम के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने परिवार सहित चादरपोशी कर बाबा का आशीर्वाद लिया।
पूरा दिन दरबार में भक्तों की भारी भीड़ लगी रही और वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले की सबसे खास बात यह रही कि यहां सेवा और श्रद्धा को सर्वोपरि रखा जाता है। मंदिर परिसर में न तो कोई दान पात्र रखा गया और न ही किसी प्रकार की सेवा या प्रसाद के नाम पर कोई पर्ची काटी गई। गांव के लोग स्वयं तन, मन और धन से सेवा करते नजर आए।
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पूरा गांव मेले के आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेता है। श्रद्धालुओं की सेवा को अपना सौभाग्य मानता है। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुबह करीब नौ बजे धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मेले की शुरुआत हुई। इस दौरान चादरपोशी की रस्म अदा की गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर का आयोजन किया गया।
दरबार में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में केले और जलेबी वितरित की गई। पंजाब से पहुंचे कलाकारों ने भजनों और सूफियाना कलाम के माध्यम से समा बांध दिया। भक्तिमय संगीत से पूरा माहौल आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि बाबा के दरबार में सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ पहुंचते हैं जो आपसी भाईचारे और सौहार्द की अनूठी मिसाल है।
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव रंगड़ी खेड़ा स्थित बाबा जालपीर अब्दुल रहीम के दरबार में वीरवार को आयोजित मेला पीरां दा श्रद्धा, आस्था और भाईचारे का प्रतीक रहा। साल में चार बार लगने वाले इस मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा के दरबार में मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की।
हरियाणा, पंजाब और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा जालपीर अब्दुल रहीम के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने परिवार सहित चादरपोशी कर बाबा का आशीर्वाद लिया।
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पूरा दिन दरबार में भक्तों की भारी भीड़ लगी रही और वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले की सबसे खास बात यह रही कि यहां सेवा और श्रद्धा को सर्वोपरि रखा जाता है। मंदिर परिसर में न तो कोई दान पात्र रखा गया और न ही किसी प्रकार की सेवा या प्रसाद के नाम पर कोई पर्ची काटी गई। गांव के लोग स्वयं तन, मन और धन से सेवा करते नजर आए।
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पूरा गांव मेले के आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेता है। श्रद्धालुओं की सेवा को अपना सौभाग्य मानता है। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुबह करीब नौ बजे धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मेले की शुरुआत हुई। इस दौरान चादरपोशी की रस्म अदा की गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर का आयोजन किया गया।
दरबार में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में केले और जलेबी वितरित की गई। पंजाब से पहुंचे कलाकारों ने भजनों और सूफियाना कलाम के माध्यम से समा बांध दिया। भक्तिमय संगीत से पूरा माहौल आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि बाबा के दरबार में सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ पहुंचते हैं जो आपसी भाईचारे और सौहार्द की अनूठी मिसाल है।