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Sirsa News: 11 दिनों से मंडी में पड़ा धान, अब बदलने लगा रंग, नहीं हो रही खरीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2025 10:38 PM IST
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Paddy lying in the market for 11 days, now changing colour, no purchases taking place
रोड़ी अनाजमंडी में खुले में पड़ा धान। संवाद
रोड़ी। अनाज मंडी में धान की आवक निरंतर बढ़ रही है। वहीं, छह अक्तूबर की बारिश से मंडी में धान लेकर आए किसानों को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, मंडी में पड़ी धान की फसल का रंग भी अब बदलने लगा है और किसान अपनी फसल तक नहीं बेच पाए हैं। रोड़ी में धान खरीद का आंकड़ा हजारों क्विंटल में पहुंच चुका है।
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कुछ किसान ऐसे भी हैं जो 11 दिनों से मंडी में अपनी फसल के लिए बेचने की आस में बैठे हुए हैं और उनका धान नहीं बिक रहा है। इतना ही नहीं, उनके दर्द को कोई सुनने वाला भी नहीं है। अधिकारियों ने अपने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि शनिवार तक रोड़ी खरीद केंद्र में कुल 19,182 क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई।
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इसमें से 18,918 क्विंटल धान की खरीद पूरी की जा चुकी है। शनिवार को अकेले 5,983 क्विंटल धान की खरीद हुई। इसी दौरान सामने आया कि कुछ किसान ऐसे हैं जो कई दिनों से मंडी में डेरा डाले हुए हैं, जो फसल नहीं बेच पाए। मार्केट कमेटी के अधिकारी मौके पर आने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे। इस लापरवाही के चलते किसानों की मेहनत और फसल दोनों बर्बाद हो रही हैं।
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रोड़ी निवासी किसान रण सिंह ने बताया कि वह दो अक्तूबर को अपनी 150 क्विंटल धान लेकर मंडी पहुंचे थे। धान की नमी 18 आने के कारण फसल को खरीदा नहीं गया। छह अक्तूबर को हुई बारिश के चलते करीब 20 क्विंटल धान खराब हो गया और अब उसकी नमी 26 तक पहुंच गई है। रण सिंह ने बताया कि वे पिछले 11 दिनों से मंडी में वे बैठे हैं। इस लापरवाही से किसान का मानसिक व आर्थिक दोनों तरह से नुकसान हुआ है।





पिता मंडी में फसल की कर रहे रखवाली

रोड़ी निवासी रण सिंह ने बताया कि वे दो अक्तूबर को अपनी साढ़े पांच एकड़ की 150 क्विंटल धान की फसल लेकर रोड़ी मंडी पहुंचे थे। उनके दो बेटे है, जोकि घर पर पशुओं की देखभाल व परिवार की देखभाल करते हैं। एक बेटा रोजाना शाम को घर से उनके लिए खाना लेकर आता है। रात को भी खरीद केंद्र में पड़े धान की रखवाली करनी पड़ती है। मार्केट कमेटी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण परिवार से दूर रहकर रातभर जागता रहता हूं। रोजाना एक ही प्रश्न दिल को बेचैन कर रहा है कि कड़ी मेहनत से तैयार की गई धान की फसल जोकि बारिश के खराब हो गई और लगभग 20 क्विंटल का नुकसान हुआ। इसका जिम्मेदार कौन है, उनका कसूर क्या है।



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हर रोज मिल रही है तारीख

किसान जस्सी ने बताया कि वह एक सप्ताह पहले अपनी 200 क्विंटल धान की फसल मंडी में लेकर आए थे। शेड के नीचे धान लगा दिया और मौसम बदल गया। इसके बाद आज तक धान को कोई खरीद नहीं रहा है। रोज परचेजर व मंडी के अधिकारी तारीख पर तारीख दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि धान की बिजाई कर कोई गलती कर दी है। सरकार कह रही है कि किसान का एक एक दाना खरीदेगी। यहां एक सप्ताह से फसल की रखवाली कर रहे है, कोई खरीदने वाला नहीं है।


----------------खरीद लगातार हो रही है, जो किसान 11 दिनों से मंडी में है, उसका कुछ धान बारिश के कारण खराब भी हुआ है। खरीद परचेजिंग कंपनी करती है, हमें सिर्फ गेट पास काटना होता है। सरकार के नियमों के मुताबिक बिना पंजीकरण के गेट पास नहीं काट सकते। जो किसान 11 दिनों से मंडी में बैठा है, उसके पास पंजीकरण ही नहीं है।



- तरसेम सिंह, मंडी सुपरवाइजर, रोड़ी।
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