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Sirsa News: सिर्फ गर्भवतियों व बच्चों को किया दाखिल, अन्य किए रेफर
Tue, 09 Dec 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 09 Dec 2025 11:38 PM IST
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सिरसा अस्पताल में मरीज इंतजार करते हुए। संवाद
सिरसा। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों को ही अस्पताल में दाखिल किया गया। बाकी सब मरीजों को रेफर किया गया। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) की सीधी भर्ती के विरोध में चिकित्सकों की हड़ताल जारी है।
इसके बावजूद अस्पताल में रूटीन चेकअप की सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं, क्योंकि एनएचएम के तहत कार्यरत चिकित्सक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से पहुंचे डॉक्टर पूरे दिन सेवाओं में जुटे रहे। हालांकि, बाल रोग और डिलीवरी को छोड़कर किसी भी गंभीर मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि अत्यधिक गंभीर मरीज मिलने पर उन्हें तुरंत अग्रोहा रेफर कर दिया जाए, लेकिन पिछले दो दिनों में ऐसा कोई मामला नहीं पहुंचा। वहीं, लड़ाई-झगड़ों में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों की एलएलआर भी नहीं काटी गई और उन्हें बिना औपचारिक प्रक्रिया के सीधे अग्रोहा जाने की सलाह दे दी गई, जिससे मरीजों और परिजनों में नाराजगी रही।
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डायलिसिस ब्रांच में हालात खराब रहे
अस्पताल के डायलिसिस ब्रांच में हालात और भी खराब रहे। यहां चल रहे निर्माण कार्य और आरओ पानी की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। रोजाना 20 से 30 मरीज डायलिसिस के लिए सेंटर पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार को पानी की उपलब्धता न होने के चलते कई मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पाया। पंजाब के सरदूलगढ़ से आए नारायण गर्ग को भी उपचार न मिलने के कारण लौटना पड़ा। अस्पताल प्रशासन की ओर से पर्याप्त आरओ पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है, जबकि एक मरीज के डायलिसिस के लिए 250 से 300 लीटर पानी आवश्यक होता है। पानी की कमी से मरीजों की सेहत पर गंभीर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
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चिकित्सकों का आरोप- सीधी भर्ती गलत
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन सिरसा के प्रधान डॉ. आरके दहिया और सह सचिव डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा कि सरकार एसएमओ की सीधी भर्ती करने जा रही है, जो मेडिकल ऑफिसर्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। चिकित्सक वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं और सीधी भर्ती होने पर प्रमोशन लगभग रूक जाएगा। डॉ. विपुल ने कहा कि सरकार मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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ओपीडी सिस्टम आधा घंटा रहा बंद
हड़ताल के दिन मंगलवार को नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रही। रोजाना 40 से 45 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं, जिन्हें लौटना पड़ा। एक्सरे सेवा जारी रही। मेडिकल फिटनेस आदि के लिए पहुंचे खिलाड़ियों व अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 11 बजे ई-उपचार (एचएमआईएस ) सर्वर डाउन हो गया, जिससे ओपीडी स्लिप से लेकर दवाइयों तक का काम प्रभावित रहा। करीब आधे घंटे बाद सिस्टम सामान्य हुआ।
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बाल विभाग व सर्जरी की ओपीडी एनएचएम और अग्रोहा के डॉक्टरों ने संभाली
रानियां में एनएचएम के डॉक्टर सागर को बाल रोग विभाग की जिम्मेदारी दी गई। दो दिन में पांच से छह गंभीर बच्चों को भर्ती किया गया। जनरल सर्जन की ओपीडी अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डॉ. सूर्यांश और एनएचएम डॉक्टर स्वाती ने संभाली। उन्होंने बताया कि रूटीन का चेकअप किया जा रहा है।
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मरीजों की परेशानी, एमएलआर नहीं काटी
चतरगढ़पट्टी के सुरेश ने बताया कि झगड़े के बाद अस्पताल लाए गए थे। एमएलआर की फीस भर दी, लेकिन पर्ची देने वाला कोई नहीं था। उन्हें अग्रोहा रेफर कर दिया गया। कीर्ति नगर के अशोक कुमार ने भी बताया कि उन पर हमले के बाद सिविल अस्पताल पहुंचे, लेकिन एमएलआर न होने पर उन्हें भी अग्रोहा भेज दिया गया।
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इसके बावजूद अस्पताल में रूटीन चेकअप की सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं, क्योंकि एनएचएम के तहत कार्यरत चिकित्सक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से पहुंचे डॉक्टर पूरे दिन सेवाओं में जुटे रहे। हालांकि, बाल रोग और डिलीवरी को छोड़कर किसी भी गंभीर मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
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अग्रोहा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि अत्यधिक गंभीर मरीज मिलने पर उन्हें तुरंत अग्रोहा रेफर कर दिया जाए, लेकिन पिछले दो दिनों में ऐसा कोई मामला नहीं पहुंचा। वहीं, लड़ाई-झगड़ों में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों की एलएलआर भी नहीं काटी गई और उन्हें बिना औपचारिक प्रक्रिया के सीधे अग्रोहा जाने की सलाह दे दी गई, जिससे मरीजों और परिजनों में नाराजगी रही।
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डायलिसिस ब्रांच में हालात खराब रहे
अस्पताल के डायलिसिस ब्रांच में हालात और भी खराब रहे। यहां चल रहे निर्माण कार्य और आरओ पानी की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। रोजाना 20 से 30 मरीज डायलिसिस के लिए सेंटर पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार को पानी की उपलब्धता न होने के चलते कई मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पाया। पंजाब के सरदूलगढ़ से आए नारायण गर्ग को भी उपचार न मिलने के कारण लौटना पड़ा। अस्पताल प्रशासन की ओर से पर्याप्त आरओ पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है, जबकि एक मरीज के डायलिसिस के लिए 250 से 300 लीटर पानी आवश्यक होता है। पानी की कमी से मरीजों की सेहत पर गंभीर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
चिकित्सकों का आरोप- सीधी भर्ती गलत
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन सिरसा के प्रधान डॉ. आरके दहिया और सह सचिव डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा कि सरकार एसएमओ की सीधी भर्ती करने जा रही है, जो मेडिकल ऑफिसर्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। चिकित्सक वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं और सीधी भर्ती होने पर प्रमोशन लगभग रूक जाएगा। डॉ. विपुल ने कहा कि सरकार मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ओपीडी सिस्टम आधा घंटा रहा बंद
हड़ताल के दिन मंगलवार को नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रही। रोजाना 40 से 45 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं, जिन्हें लौटना पड़ा। एक्सरे सेवा जारी रही। मेडिकल फिटनेस आदि के लिए पहुंचे खिलाड़ियों व अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 11 बजे ई-उपचार (एचएमआईएस ) सर्वर डाउन हो गया, जिससे ओपीडी स्लिप से लेकर दवाइयों तक का काम प्रभावित रहा। करीब आधे घंटे बाद सिस्टम सामान्य हुआ।
बाल विभाग व सर्जरी की ओपीडी एनएचएम और अग्रोहा के डॉक्टरों ने संभाली
रानियां में एनएचएम के डॉक्टर सागर को बाल रोग विभाग की जिम्मेदारी दी गई। दो दिन में पांच से छह गंभीर बच्चों को भर्ती किया गया। जनरल सर्जन की ओपीडी अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डॉ. सूर्यांश और एनएचएम डॉक्टर स्वाती ने संभाली। उन्होंने बताया कि रूटीन का चेकअप किया जा रहा है।
मरीजों की परेशानी, एमएलआर नहीं काटी
चतरगढ़पट्टी के सुरेश ने बताया कि झगड़े के बाद अस्पताल लाए गए थे। एमएलआर की फीस भर दी, लेकिन पर्ची देने वाला कोई नहीं था। उन्हें अग्रोहा रेफर कर दिया गया। कीर्ति नगर के अशोक कुमार ने भी बताया कि उन पर हमले के बाद सिविल अस्पताल पहुंचे, लेकिन एमएलआर न होने पर उन्हें भी अग्रोहा भेज दिया गया।