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Sirsa News: बाढ़ से निपटने की अधूरी तैयारी, सिरसा जिले में केवल 40 फीसद काम पूरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:55 AM IST
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only 40 percent work complete of flood relief
मीरपुर में चल रहा काम। 
बाढ़ से निपटने की अधूरी तैयारी, सिरसा जिले में केवल 40 फीसद काम पूरा
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-घग्गर की सफाई और ड्रेन पर गेट लगाने का काम जारी, कच्चे तटबंधों की मजबूती का जिम्मा पंचायतों पर

फोटो कैप्शनः
-गांव मीरपुर व बनसुधार के पास कच्चे तटबंध को जेसीबी व ट्रैक्टर ट्रॉली के माध्यम से मिट्टी डालकर दुरुस्त करते हुए ग्रामीण।
-ओटू हेड पर भवन निर्माण सामग्री से गेट को बनाने का काम जारी।
-गांव खैरेका के पास पक्के तटबंध को मजबूत करने के लिए लाया गया पत्थर

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा। जिले में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सिंचाई विभाग और प्रशासन की तैयारियां अभी भी अधूरी हैं। विभागीय स्तर पर अब तक केवल करीब 40 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। पिछले साल की तरह ही इस बार भी हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। ओटू हेड के पास घग्गर नदी की खोदाई और हिसार-घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन पर गेट लगाने का काम कई दिनों से जारी है, लेकिन सबसे संवेदनशील माने जाने वाले कच्चे तटबंधों को मजबूत करने की दिशा में अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। ऐसे में कई गांवों की पंचायतें अपने स्तर पर तटबंधों को मजबूत करने में जुटी हैं।

प्रशासन ने पक्के तटबंधों को मजबूत करने की जिम्मेदारी तो तय की है, लेकिन यह कार्य भी अपेक्षित गति से शुरू नहीं हो सका। मई और जून में सामान्य से कम बारिश होने के कारण अधिकारियों में इस बार पहले जैसी गंभीरता नजर नहीं आ रही। फिलहाल घग्गर नदी पूरी तरह खाली है, जिससे तैयारियों की रफ्तार भी धीमी बनी हुई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का दावा है कि रंगा क्षेत्र से लेकर ओटू हेड तक निरीक्षण किया जा चुका है। कटाव रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर बड़े पत्थर लगाने की योजना है। इसके लिए पत्थर मंगवा भी लिए गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें लगाया नहीं गया है।
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लाखों के टेंडर किए गए हैं जारी
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग और पंचायती राज विभाग ने अपने-अपने स्तर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लाखों रुपये के टेंडर जारी किए हैं। सिंचाई विभाग पंपिंग सिस्टम को अपग्रेड करने और आपात स्थिति में अतिरिक्त मशीनरी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग ने शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पंप और जनरेटर की व्यवस्था के लिए टेंडर लगाए हैं। अभी पूरा काम नहीं हो सका है।
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ये गांव हैं सबसे अधिक संवेदनशील
मुसाहिबवाला, पनिहारी, फरवाई खुर्द, नेजाडेला कलां, झोपड़ा, मीरपुर कॉलोनी, मीरपुर, अहमदपुर, ढाणी सुखचैन, केलनिया, अलानूर उर्फ नानकपुर, माधोसिंघाना, खैरेकां, बनसुधार
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दो सालों का अब तक नहीं मिला मुआवजा
गांव अहमदपुर के सरपंच संदीप कुमार ने बताया कि अहमदपुर, ढाणी सुखचैन और आसपास के ग्रामीण मिलकर करीब 10 एकड़ क्षेत्र में फैले कच्चे तटबंध को अपने स्तर पर मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मीरपुर के पास तटबंध टूटने से हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। सरकार ने वर्ष 2023 की बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक किसानों को भुगतान नहीं मिला। वहीं वर्ष 2025 में हुए नुकसान का मुआवजा भी अब तक नहीं दिया गया है।

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वर्जन
तटबंधों को मजबूत करने का कार्य जारी है। हिसार-घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन पर गेट लगाए जा रहे हैं और ओटू हेड की सफाई भी चल रही है। पक्के तटबंधों को मजबूत करने के लिए पत्थर मंगवाए जा चुके हैं, जिन्हें जल्द लगाया जाएगा। घग्गर में पानी आने की स्थिति से निपटने के लिए विभाग पूरी तैयारी कर रहा है।
-रघुवीर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग
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